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हिमाचल: 13,500 फीट पर बदला मणिमहेश का नजारा, डल झील जमने लगी, रास्ता भी बर्फ से ढका; श्रद्धालुओं की राह कठिन
Sun, 25 Oct 2026 12:30 PM IST
Ankesh Dogra
संवाद न्यूज एजेंसी, भरमौर (चंबा)।
संवाद न्यूज एजेंसी, भरमौर (चंबा)।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Sun, 25 Oct 2026 12:30 PM IST
सार
चंबा जिले के भरमौर में स्थित पवित्र मणिमहेश डल झील का बड़ा हिस्सा जमने लगा है। झील के किनारे स्थित चतुर्मुखी शिवलिंग पर करीब छह इंच बर्फ जम गई है।
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बर्फ से जमी डल झील।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
समुद्र तल से करीब 13,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित पवित्र मणिमहेश डल झील जमने लगी है। झील का बड़ा हिस्सा जम चुका है, जबकि किनारे स्थित चतुर्मुखी शिवलिंग पर करीब छह इंच बर्फ जम गई है। ऊंचाई वाले क्षेत्र में मौसम में बदलाव और तापमान में गिरावट के बीच कैलाश यात्रा का मार्ग भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
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शुक्रवार को डल झील पहुंचे संवाद न्यूज एजेंसी के प्रतिनिधि ने वहां बर्फ से ढके शिवलिंग और जमती झील का नजारा देखा। इस बार यात्रा के दौरान क्षेत्र में पांच से छह बार बर्फबारी हो चुकी है। ग्लेशियर पॉइंट से डल झील तक करीब दो किलोमीटर रास्ता बर्फ से ढका हुआ है। श्रद्धालुओं को इस हिस्से में बर्फ पर पैदल चलकर आगे बढ़ना पड़ रहा है। फिसलन, कड़ाके की ठंड और मौसम में अचानक बदलाव से यात्रा के दौरान मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
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बर्फ के बीच भी दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालु
कठिन परिस्थितियों के बावजूद श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए मणिमहेश पहुंच रहे हैं। हड़सर से डल झील तक करीब 13 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग पर धन्छौ में दो अस्थायी दुकानें अभी भी खुली हैं। इनके दीपावली के बाद तक खुले रहने की संभावना जताई गई है। हालांकि, ऊंचाई वाले क्षेत्र में मौसम तेजी से बदल सकता है। ऐसे में बर्फ से ढके रास्तों पर आगे बढ़ना जोखिम भरा हो सकता है। श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।
राधाष्टमी के बाद यात्रा में सावधानी जरूरी
राधाष्टमी के बाद मणिमहेश यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। इस अवधि में बर्फबारी, फिसलन और गिरते तापमान के कारण यात्रा जोखिम भरी हो सकती है। श्रद्धालुओं को निकलने से पहले मौसम की स्थिति और प्रशासन के निर्देशों की जानकारी लेनी चाहिए। आस्था के साथ सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। बर्फ से ढके रास्ते पर परिस्थितियों का आकलन किए बिना आगे बढ़ने से बचना चाहिए।
कठिन परिस्थितियों के बावजूद श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए मणिमहेश पहुंच रहे हैं। हड़सर से डल झील तक करीब 13 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग पर धन्छौ में दो अस्थायी दुकानें अभी भी खुली हैं। इनके दीपावली के बाद तक खुले रहने की संभावना जताई गई है। हालांकि, ऊंचाई वाले क्षेत्र में मौसम तेजी से बदल सकता है। ऐसे में बर्फ से ढके रास्तों पर आगे बढ़ना जोखिम भरा हो सकता है। श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।
राधाष्टमी के बाद यात्रा में सावधानी जरूरी
राधाष्टमी के बाद मणिमहेश यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। इस अवधि में बर्फबारी, फिसलन और गिरते तापमान के कारण यात्रा जोखिम भरी हो सकती है। श्रद्धालुओं को निकलने से पहले मौसम की स्थिति और प्रशासन के निर्देशों की जानकारी लेनी चाहिए। आस्था के साथ सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। बर्फ से ढके रास्ते पर परिस्थितियों का आकलन किए बिना आगे बढ़ने से बचना चाहिए।