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Chamba News: मिंजर मेले के बाद भी खाली हाथ स्थानीय कलाकार
Thu, 01 Oct 2026 10:17 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 01 Oct 2026 10:17 PM IST
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चंबा। अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले के समापन के करीब तीन माह बाद भी सैकड़ों स्थानीय कलाकारों को मेहनताना नहीं मिल पाया है।
लंबित भुगतान की मांग को लेकर मोहम्मद खान, रमेश राही और राजेश जैरी ने वीरवार को अतिरिक्त उपायुक्त चंबा अमित मेहरा से मुलाकात कर समस्या रखी। कलाकारों ने प्रशासन से जल्द मेहनताना जारी करने की मांग की। कलाकारों ने बताया कि मिंजर मेला समाप्त हुए करीब तीन माह बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक भुगतान नहीं हुआ है। मेहनताना लेने के लिए उन्हें रोजाना उपायुक्त कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। कलाकारों का कहना है कि पहली बार ऐसा हुआ है कि मेला समाप्त होने के इतने समय बाद भी स्थानीय कलाकारों का भुगतान लंबित है। उनका आरोप है कि स्थानीय कलाकारों के अलावा दूसरे राज्यों से आए कलाकारों और नामी कलाकारों का भुगतान उनके बैंक खातों में कर दिया गया, जबकि स्थानीय कलाकार अभी भी मेहनताना मिलने का इंतजार कर रहे हैं। इससे कलाकारों में मेला समिति के प्रति रोष है। सबसे अधिक परेशानी समूहों में प्रस्तुति देने वाले कलाकारों को उठानी पड़ रही है। तीसा, भटियात, भरमौर और डलहौजी के दूरदराज क्षेत्रों से कई कलाकार अपने खर्चे पर वाहन किराया देकर चंबा पहुंचे थे। उन्होंने मिंजर मेले में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, लेकिन तीन माह बाद भी मेहनताना नहीं मिला है। संवाद
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लंबित भुगतान की मांग को लेकर मोहम्मद खान, रमेश राही और राजेश जैरी ने वीरवार को अतिरिक्त उपायुक्त चंबा अमित मेहरा से मुलाकात कर समस्या रखी। कलाकारों ने प्रशासन से जल्द मेहनताना जारी करने की मांग की। कलाकारों ने बताया कि मिंजर मेला समाप्त हुए करीब तीन माह बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक भुगतान नहीं हुआ है। मेहनताना लेने के लिए उन्हें रोजाना उपायुक्त कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। कलाकारों का कहना है कि पहली बार ऐसा हुआ है कि मेला समाप्त होने के इतने समय बाद भी स्थानीय कलाकारों का भुगतान लंबित है। उनका आरोप है कि स्थानीय कलाकारों के अलावा दूसरे राज्यों से आए कलाकारों और नामी कलाकारों का भुगतान उनके बैंक खातों में कर दिया गया, जबकि स्थानीय कलाकार अभी भी मेहनताना मिलने का इंतजार कर रहे हैं। इससे कलाकारों में मेला समिति के प्रति रोष है। सबसे अधिक परेशानी समूहों में प्रस्तुति देने वाले कलाकारों को उठानी पड़ रही है। तीसा, भटियात, भरमौर और डलहौजी के दूरदराज क्षेत्रों से कई कलाकार अपने खर्चे पर वाहन किराया देकर चंबा पहुंचे थे। उन्होंने मिंजर मेले में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, लेकिन तीन माह बाद भी मेहनताना नहीं मिला है। संवाद