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Chamba News: खुद सीखी सिलाई, अब गांव की बेटियों के हाथों में दे रहीं हुनर
Mon, 07 Sep 2026 10:50 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 07 Sep 2026 10:50 PM IST
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घर से शुरू किया सिलाई स्कूल, करीब 50 बेटियों को दे चुकीं प्रशिक्षण
बिंता का प्रयास, हुनर के साथ आत्मनिर्भरता की राह दिखा रही बेटियों को
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। एक समय अपने हुनर को संवारने की कोशिश करने वाली भलेई की बिंता देवी अब उसी हुनर को गांव की बेटियों की ताकत बना रही हैं।
सिलाई-कढ़ाई में दक्षता हासिल करने के बाद उन्होंने रोजगार के लिए बाहर जाने के बजाय घर से ही सिलाई स्कूल शुरू किया। आज उनका यह छोटा-सा प्रयास कई बेटियों के लिए हुनर सीखने और भविष्य संवारने का माध्यम बन चुका है।
बिंता देवी अब तक करीब 50 लड़कियों को सिलाई-कढ़ाई की बारीकियां सिखा चुकी हैं। वह बेटियों को केवल सिलाई करना नहीं सिखातीं, बल्कि इस हुनर को आत्मनिर्भरता से जोड़ने के लिए भी प्रेरित करती हैं। उनका मानना है कि हाथ में कोई व्यावहारिक हुनर हो तो परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, आगे बढ़ने के रास्ते तलाशे जा सकते हैं।
घर से संचालित सिलाई स्कूल में लड़कियां अपने खाली समय का उपयोग करते हुए प्रशिक्षण ले रही हैं। इससे उन्हें घरेलू कामकाज के साथ-साथ ऐसा कौशल सीखने का अवसर मिल रहा है, जिसका इस्तेमाल वे आगे चलकर रोजगार या स्वरोजगार के रूप में कर सकती हैं।
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बिंता देवी का कहना है कि आज के दौर में बेटियों को पढ़ाई के साथ कोई न कोई व्यावहारिक हुनर भी जरूर सीखना चाहिए। सिलाई-कढ़ाई ऐसा कौशल है, जिसे कम संसाधनों में भी सीखा और घर से ही आमदनी के साधन में बदला जा सकता है। इसी सोच के साथ वह लगातार अधिक से अधिक बेटियों को प्रशिक्षण देने में जुटी हैं।
उनका यह प्रयास क्षेत्र में महिला आत्मनिर्भरता की एक अलग मिसाल बन रहा है। खुद के लिए शुरू किया गया सिलाई का सफर अब दूसरी बेटियों के सपनों को आकार देने में मदद कर रहा है।
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बिंता का प्रयास, हुनर के साथ आत्मनिर्भरता की राह दिखा रही बेटियों को
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। एक समय अपने हुनर को संवारने की कोशिश करने वाली भलेई की बिंता देवी अब उसी हुनर को गांव की बेटियों की ताकत बना रही हैं।
सिलाई-कढ़ाई में दक्षता हासिल करने के बाद उन्होंने रोजगार के लिए बाहर जाने के बजाय घर से ही सिलाई स्कूल शुरू किया। आज उनका यह छोटा-सा प्रयास कई बेटियों के लिए हुनर सीखने और भविष्य संवारने का माध्यम बन चुका है।
बिंता देवी अब तक करीब 50 लड़कियों को सिलाई-कढ़ाई की बारीकियां सिखा चुकी हैं। वह बेटियों को केवल सिलाई करना नहीं सिखातीं, बल्कि इस हुनर को आत्मनिर्भरता से जोड़ने के लिए भी प्रेरित करती हैं। उनका मानना है कि हाथ में कोई व्यावहारिक हुनर हो तो परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, आगे बढ़ने के रास्ते तलाशे जा सकते हैं।
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घर से संचालित सिलाई स्कूल में लड़कियां अपने खाली समय का उपयोग करते हुए प्रशिक्षण ले रही हैं। इससे उन्हें घरेलू कामकाज के साथ-साथ ऐसा कौशल सीखने का अवसर मिल रहा है, जिसका इस्तेमाल वे आगे चलकर रोजगार या स्वरोजगार के रूप में कर सकती हैं।
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बिंता देवी का कहना है कि आज के दौर में बेटियों को पढ़ाई के साथ कोई न कोई व्यावहारिक हुनर भी जरूर सीखना चाहिए। सिलाई-कढ़ाई ऐसा कौशल है, जिसे कम संसाधनों में भी सीखा और घर से ही आमदनी के साधन में बदला जा सकता है। इसी सोच के साथ वह लगातार अधिक से अधिक बेटियों को प्रशिक्षण देने में जुटी हैं।
उनका यह प्रयास क्षेत्र में महिला आत्मनिर्भरता की एक अलग मिसाल बन रहा है। खुद के लिए शुरू किया गया सिलाई का सफर अब दूसरी बेटियों के सपनों को आकार देने में मदद कर रहा है।