{"_id":"66818aa02daf9f01c9022745","slug":"kashiyad-village-yearns-for-road-palanquin-is-the-only-support-in-case-of-illness-chamba-news-c-88-1-cmb1003-128136-2024-06-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chamba News: सड़क के लिए तरसा काशियाड़ गांव, बीमारी में पालकी ही सहारा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chamba News: सड़क के लिए तरसा काशियाड़ गांव, बीमारी में पालकी ही सहारा
Sun, 30 Jun 2024 10:11 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 30 Jun 2024 10:11 PM IST
विज्ञापन
खज्जियार (चंबा)। सरकार हर गांव को सड़क से जोड़ने के दावे तो करती है, लेकिन चंबा की कोल्हड़ी पंचायत के काशियाड़ गांव तक अभी तक जीवन रेखा नहीं पहुंच पाई है। सात गांव सड़क से अछूते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के सात दशक बाद भी उनके गांव तक सड़क नहीं पहुंची है।
ऐसे में विकास की रफ्तार नहीं बढ़ पाई है। कई बार सरकार और विभाग को अवगत करवाया गया, मगर लोक निर्माण विभाग संयुक्त निरीक्षण करने तक ही सीमित रह गया है। सड़क सुविधा से न जुड़ने पर ग्रामीणों में काफी रोष है। जानकारी के अनुसार कोहलड़ी से काशियाड़ गांव तक अगर सड़क बनती है तो क्षेत्र की करीब दो हजार आबादी लाभान्वित होगी। इससे गांव काशियाड़, चैली, खब्बर, फकरोग, लाहड़, डिबरी और बेई गांवों को सड़क सुविधा की सौगात मिलेगी।
--
विभाग हर बार आश्वासन देता है। सरकार भी सड़क से जोड़ने के दावे करती है, मगर आज दिन तक कोई सकारात्मक पहल नहीं हो पाई है। - आशीष कुमार
--
गांव में किसी बुजुर्ग या गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ती है तो पालकी में उन्हें मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है। लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। - लोकेश कुमार
विज्ञापन
--
सड़क निर्माण को लेकर संयुक्त टीम हर बार निरीक्षण करती है, मगर आज तक सड़क के निर्माण की संभावनाएं धरातल पर नहीं दिखी हैं। - नीरज सूर्यवंशी
--
जब ग्रामीण सड़क निर्माण का मामला उठाते हैं तो हर बार फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए आवेदन करने की बात सामने आती है। पांच साल से यही बात सुनने में आ रही है।
- अनूप सूर्यवंशी
-- लोक निर्माण विभाग के कनिष्ठ अभियंता देस राज ने कहा कि यह मामला ध्यान में है। संयुक्त निरीक्षण कर लिया गया है। फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए मामला भेजा गया है। जैसे ही स्वीकृति मिलती है तो आगामी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
--
विज्ञापन
ऐसे में विकास की रफ्तार नहीं बढ़ पाई है। कई बार सरकार और विभाग को अवगत करवाया गया, मगर लोक निर्माण विभाग संयुक्त निरीक्षण करने तक ही सीमित रह गया है। सड़क सुविधा से न जुड़ने पर ग्रामीणों में काफी रोष है। जानकारी के अनुसार कोहलड़ी से काशियाड़ गांव तक अगर सड़क बनती है तो क्षेत्र की करीब दो हजार आबादी लाभान्वित होगी। इससे गांव काशियाड़, चैली, खब्बर, फकरोग, लाहड़, डिबरी और बेई गांवों को सड़क सुविधा की सौगात मिलेगी।
विज्ञापन
विभाग हर बार आश्वासन देता है। सरकार भी सड़क से जोड़ने के दावे करती है, मगर आज दिन तक कोई सकारात्मक पहल नहीं हो पाई है। - आशीष कुमार
गांव में किसी बुजुर्ग या गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ती है तो पालकी में उन्हें मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है। लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। - लोकेश कुमार
विज्ञापन
सड़क निर्माण को लेकर संयुक्त टीम हर बार निरीक्षण करती है, मगर आज तक सड़क के निर्माण की संभावनाएं धरातल पर नहीं दिखी हैं। - नीरज सूर्यवंशी
जब ग्रामीण सड़क निर्माण का मामला उठाते हैं तो हर बार फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए आवेदन करने की बात सामने आती है। पांच साल से यही बात सुनने में आ रही है।
- अनूप सूर्यवंशी