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Chamba News: मान्यता... धर्मराज की कचहरी में होता है कर्मों का लेखा-जोखा

Sat, 12 Sep 2026 10:54 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा Updated Sat, 12 Sep 2026 10:54 PM IST
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It is believed that an account of one's deeds is tallied in the court of Dharmaraj.
चंबा से म​णिमहेश के लिए रवाना होती दशनामी अखाड़े की छड़ी।संवाद
भरमौर के चौरासी परिसर में स्थित है धर्मराज का मंदिर, देशभर से पहुंचते हैं श्रद्धालु
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चित्रगुप्त का आसन, गुप्त यंत्र और स्वर्ग का द्वार मानी जाती हैं ढाई सीढ़ियां

संवाद न्यूज एजेंसी
भरमौर (चंबा)। शिवधाम भरमौर का चौरासी मंदिर परिसर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि कई धार्मिक मान्यताओं और रहस्यों को अपने भीतर समेटे हुए है।
परिसर में स्थित धर्मराज का मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। मान्यता है कि मृत्यु के बाद जीवात्मा के पाप-पुण्य का लेखा-जोखा यहीं होता है और धर्मराज की कचहरी में कर्मों के आधार पर निर्णय होता है। मणिमहेश यात्रा के दौरान देशभर से पहुंचने वाले श्रद्धालु धर्मराज के दर्शन जरूर करते हैं।
मंदिर के ठीक सामने चित्रगुप्त का आसन बना है, जबकि सीढ़ियों के पास एक गुप्त यंत्र स्थापित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी यंत्र के माध्यम से धर्मराज जीव के कर्मों का हिसाब रखते हैं। मंदिर के समीप बनी ढाई सीढ़ियों को स्वर्ग का द्वार भी माना जाता है। कई सिद्ध पुरुषों द्वारा धर्मराज की कचहरी में होने वाले सवाल-जवाब सुनने का दावा किया गया है, हालांकि इनके प्रत्यक्ष प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
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मान्यता के अनुसार यहां पहले टेढ़ा शिवलिंग था। वर्ष 1905 के बाद महाराज कृष्ण गिरि ने यहां साधना शुरू की। शिवलिंग को सीधा करने के लिए खुदाई की गई, लेकिन उसका अंत नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने कई माह तक मंदिर के बाहर साधना की। कहा जाता है कि इसी दौरान उन्हें यहां धर्मराज की कचहरी होने का आभास हुआ। वर्ष 1962 में उनके देहांत के बाद मंदिर के समीप उनकी समाधि बनाई गई।
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चौरासी परिसर की अपनी अलग पहचान
भरमौर चंबा मुख्यालय से करीब 62 किलोमीटर दूर है। चौरासी परिसर में 84 देवी-देवताओं के मंदिर और धार्मिक प्रतीक हैं। मणिमहेश यात्रा के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। मंदिर में सुबह, दोपहर और शाम आरती होती है, जबकि महाशिवरात्रि पर चारों पहर आरती की जाती है।

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कर्म ही तय करते हैं स्वर्ग-नर्क
पुजारी पंडित रवि शर्मा और भुवनेश्वर शर्मा ने बताया कि मानव शरीर नश्वर है और व्यक्ति को अपने कर्मों के अनुसार ही स्वर्ग-नर्क की प्राप्ति होती है। उन्होंने धर्मराज मंदिर को अद्वितीय धार्मिक स्थल बताया। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों से यहां मृत आत्माओं की चीखें सुनाई देने की बातें सुनने को मिलती थीं, हालांकि वर्तमान में ऐसा कोई अनुभव सामने नहीं आया है।
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