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परमात्मा के दीदार से मिटते हैं भ्रम : अबरोल
Mon, 13 Jan 2025 07:00 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 13 Jan 2025 07:00 AM IST
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निरंकारी सत्संग भवन बनीखेत में सत्संग सुनते अनुयायी। -संवाद
बनीखेत (चंबा)। निरंकारी सत्संग भवन बनीखेत में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता महात्मा ललित अबरोल ने की। उन्होंने निरंकारी अनुयायियों को संबोधित करते हुए कहा कि संत निरंकारी मिशन कोई धर्म या संप्रदाय नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक विचारधारा है। निरंकारी मिशन संसार के सभी इंसानों का सम्मान करता है, चाहे उनकी आस्था किसी भी विचारधारा में हो
उन्होंने कहा कि निरंकारी मिशन यह मान्यता रखता है कि साकार सतगुरु के माध्यम से ही परमपिता परमात्मा की जानकारी प्राप्त हो सकती है। परमात्मा का बोध केवल सतगुरु की कृपा से ही संभव है, जिसे ब्रह्मज्ञान कहा जाता है। जब हमें परमात्मा का दीदार हो जाता है, तो इसके बाद कोई भ्रम नहीं रहता। ब्रह्मज्ञानी वही कहलाता है, जो परमात्मा को अंग-संग महसूस करते हुए सद्मार्ग पर चलता है, नफरत और निंदा से परे रहता है और दूसरों के सुख में अपनी खुशियां मनाता है।
महात्मा ललित अबरोल ने कहा कि निरंकारी मिशन का संदेश यह है कि परमात्मा को जाना जा सकता है और इसके लिए किसी तपस्या या भक्ति की आवश्यकता नहीं है। एक जिज्ञासू व्यक्ति सद्गुरु से मिलकर पल भर में कण-कण में व्याप्त इस निराकार सत्ता की अनुभूति कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि निरंकारी मिशन के उपदेशों का अनुसरण ही मिशन की शिक्षा है, और हमारा व्यवहार सौहार्दपूर्ण और मेल-मिलाप वाला होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अपने व्यवहार से निरंकारी बनना चाहिए, न कि केवल शब्दों से यह बताना चाहिए कि हम निरंकारी हैं।
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उन्होंने कहा कि निरंकारी मिशन यह मान्यता रखता है कि साकार सतगुरु के माध्यम से ही परमपिता परमात्मा की जानकारी प्राप्त हो सकती है। परमात्मा का बोध केवल सतगुरु की कृपा से ही संभव है, जिसे ब्रह्मज्ञान कहा जाता है। जब हमें परमात्मा का दीदार हो जाता है, तो इसके बाद कोई भ्रम नहीं रहता। ब्रह्मज्ञानी वही कहलाता है, जो परमात्मा को अंग-संग महसूस करते हुए सद्मार्ग पर चलता है, नफरत और निंदा से परे रहता है और दूसरों के सुख में अपनी खुशियां मनाता है।
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महात्मा ललित अबरोल ने कहा कि निरंकारी मिशन का संदेश यह है कि परमात्मा को जाना जा सकता है और इसके लिए किसी तपस्या या भक्ति की आवश्यकता नहीं है। एक जिज्ञासू व्यक्ति सद्गुरु से मिलकर पल भर में कण-कण में व्याप्त इस निराकार सत्ता की अनुभूति कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि निरंकारी मिशन के उपदेशों का अनुसरण ही मिशन की शिक्षा है, और हमारा व्यवहार सौहार्दपूर्ण और मेल-मिलाप वाला होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अपने व्यवहार से निरंकारी बनना चाहिए, न कि केवल शब्दों से यह बताना चाहिए कि हम निरंकारी हैं।
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