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Chamba News: कुत्ते के काटने पर मरहम पट्टी तो कर दी, कहा- एंटी रेबीज इंजेक्शन नूरपुर में लगाओ
Thu, 25 Jun 2026 10:52 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 25 Jun 2026 10:52 PM IST
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चुवाड़ी अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन का स्टॉक खत्म, निजी स्टोर से करनी पड़ रही खरीद
कुत्तों के काटने पर सरकारी अस्पतालों में निशुल्क लगाया जाता है एंटी रेबीज इंजेक्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
चुवाड़ी/चंबा। चुवाड़ी में स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत उस वक्त सामने आई जब कुत्ते के काटने के बाद मरीज अस्पताल तो पहुंचे लेकिन उन्हें बचाव का सबसे जरूरी एंटी रेबीज इंजेक्शन ही नहीं मिला। स्थिति ऐसी बन गई है कि प्राथमिक उपचार के बाद लोगों को दूर नूरपुर रेफर किया जा रहा है जबकि सरकारी अस्पतालों से लेकर निजी मेडिकल स्टोर तक इस जीवन रक्षक इंजेक्शन का स्टॉक पूरी तरह खत्म बताया जा रहा है। इस कमी ने न सिर्फ मरीजों की मुश्किलें बढ़ाई हैं, बल्कि स्वास्थ्य तंत्र की तैयारियों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नागरिक अस्पताल में इंजेक्शन खत्म हो चुके हैं। निजी दवा स्टोरों पर भी मरीजों को इंजेक्शन नहीं मिल रहा है। जो कंपनी अस्पताल में रेबीज के इंजेक्शन सप्लाई करती थी, वहां से भी स्टॉक खत्म होने का जवाब मिला है। मरीजों की मुश्किल बढ़ गई हैं। मंगलवार को चुवाड़ी की सविता देवी को सड़क पर लावारिस कुत्ते ने काट लिया। वह इलाज के लिए नागरिक अस्पताल पहुंचीं तो उनके जख्मों पर मरहम पट्टी तो कर दी गई लेकिन एंटी रेबीज इंजेक्शन नहीं लगाया। उन्हें नूरपुर अस्पताल जाने की सलाह दी गई। सरकारी अस्पताल में मरीजों को एंटी रेबीज का इंजेक्शन मुफ्त लगता था जबकि निजी स्टोर पर यह 350 रुपये देकर खरीदना पड़ता है। उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर जालम सिंह भारद्वाज ने बताया कि शीघ्र अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन की आपूर्ति करवाई जाएगी।
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स्वास्थ्य विभाग स्वयं लोगों को यह बताता है कि रेबीज एक ऐसी बीमारी है जिसका कोई इलाज नहीं है। समय पर इंजेक्शन लगने पर इससे बचा जा सकता है। - राजेश बलोरिया
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गर्मियों में स्वास्थ्य विभाग को अस्पताल, दवा स्टोरों में एंटी रेबीज के इंजेक्शनों का स्टॉक मुहैया करवाना चाहिए था। अधिकारियों की लापरवाही मरीजों पर भारी पड़ सकती है। - दिनेश गुप्ता
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कुत्ते के काटने के बाद तुरंत एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाना अनिवार्य होता है। अन्यथा संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इसी डर के कारण मरीज टांडा और नूरपुर जा रहे हैं। - सुनील सिंह
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सरकार और स्वास्थ्य विभाग मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं को खत्म करने में लगे हैं। अब भयंकर बीमारी के इलाज का इंजेक्शन भी मुहैया नहीं करवाया जा रहा है। - बलविंद्र सिंह
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कुत्तों के काटने पर सरकारी अस्पतालों में निशुल्क लगाया जाता है एंटी रेबीज इंजेक्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
चुवाड़ी/चंबा। चुवाड़ी में स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत उस वक्त सामने आई जब कुत्ते के काटने के बाद मरीज अस्पताल तो पहुंचे लेकिन उन्हें बचाव का सबसे जरूरी एंटी रेबीज इंजेक्शन ही नहीं मिला। स्थिति ऐसी बन गई है कि प्राथमिक उपचार के बाद लोगों को दूर नूरपुर रेफर किया जा रहा है जबकि सरकारी अस्पतालों से लेकर निजी मेडिकल स्टोर तक इस जीवन रक्षक इंजेक्शन का स्टॉक पूरी तरह खत्म बताया जा रहा है। इस कमी ने न सिर्फ मरीजों की मुश्किलें बढ़ाई हैं, बल्कि स्वास्थ्य तंत्र की तैयारियों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नागरिक अस्पताल में इंजेक्शन खत्म हो चुके हैं। निजी दवा स्टोरों पर भी मरीजों को इंजेक्शन नहीं मिल रहा है। जो कंपनी अस्पताल में रेबीज के इंजेक्शन सप्लाई करती थी, वहां से भी स्टॉक खत्म होने का जवाब मिला है। मरीजों की मुश्किल बढ़ गई हैं। मंगलवार को चुवाड़ी की सविता देवी को सड़क पर लावारिस कुत्ते ने काट लिया। वह इलाज के लिए नागरिक अस्पताल पहुंचीं तो उनके जख्मों पर मरहम पट्टी तो कर दी गई लेकिन एंटी रेबीज इंजेक्शन नहीं लगाया। उन्हें नूरपुर अस्पताल जाने की सलाह दी गई। सरकारी अस्पताल में मरीजों को एंटी रेबीज का इंजेक्शन मुफ्त लगता था जबकि निजी स्टोर पर यह 350 रुपये देकर खरीदना पड़ता है। उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर जालम सिंह भारद्वाज ने बताया कि शीघ्र अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन की आपूर्ति करवाई जाएगी।
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स्वास्थ्य विभाग स्वयं लोगों को यह बताता है कि रेबीज एक ऐसी बीमारी है जिसका कोई इलाज नहीं है। समय पर इंजेक्शन लगने पर इससे बचा जा सकता है। - राजेश बलोरिया
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गर्मियों में स्वास्थ्य विभाग को अस्पताल, दवा स्टोरों में एंटी रेबीज के इंजेक्शनों का स्टॉक मुहैया करवाना चाहिए था। अधिकारियों की लापरवाही मरीजों पर भारी पड़ सकती है। - दिनेश गुप्ता
कुत्ते के काटने के बाद तुरंत एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाना अनिवार्य होता है। अन्यथा संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इसी डर के कारण मरीज टांडा और नूरपुर जा रहे हैं। - सुनील सिंह
सरकार और स्वास्थ्य विभाग मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं को खत्म करने में लगे हैं। अब भयंकर बीमारी के इलाज का इंजेक्शन भी मुहैया नहीं करवाया जा रहा है। - बलविंद्र सिंह