{"_id":"6ab6ac68a22af154800600ea","slug":"doctors-in-khajjiar-learn-about-the-properties-of-medicinal-plantsdoctors-in-khajjiar-learn-about-the-properties-of-medicinal-plants-chamba-news-c-88-1-ssml1004-197844-2026-09-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chamba News: खज्जियार में चिकित्सकों ने जानीं वनौषधियों की खूबियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chamba News: खज्जियार में चिकित्सकों ने जानीं वनौषधियों की खूबियां
Fri, 25 Sep 2026 10:46 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Fri, 25 Sep 2026 10:46 PM IST
विज्ञापन
वनौषधियों की पहचान, औषधीय उपयोग और दवा निर्माण की प्रक्रिया समझी
संवाद न्यूज एजेंसी
खज्जियार (चंबा)। देश के विभिन्न राज्यों से सम्मेलन में पहुंचे चिकित्सकों ने तीसरे दिन खज्जियार रेंज का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में पाई जाने वाली वनौषधियों की उपयोगिता, विशेषताओं और औषधीय गुणों की जानकारी ली।
चिकित्सकों ने वनौषधियों से तैयार होने वाली दवाओं की प्रयोगशाला में निर्माण प्रक्रिया और उससे जुड़ी बारीकियों को भी समझा।
संस्थान के निदेशक डॉ. संजीव शर्मा ने प्रतिभागियों को वनौषधियों की पहचान, औषधीय उपयोग और शोध कार्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्थान में पिछले तीन दशकों से इस दिशा में शोध किया जा रहा है। वनौषधियों से तैयार हर्बल दवाएं देश के विभिन्न हिस्सों में उपलब्ध करवाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि चंबा के अलावा धर्मशाला, इंदौर, कटक और जयपुर में भी ऐसी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
तमिलनाडु के डॉ. थिरूमूर्ती, महाराष्ट्र के डॉ. रवि नितनवरे और गुजरात के डॉ. राज कुमार रावल समेत अन्य चिकित्सकों ने खज्जियार की प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता की सराहना की। उन्होंने चंबा में निर्मित इलेक्ट्रोहोम्योपैथी दवाओं से जुड़े अनुभव भी साझा किए।
विज्ञापन
--
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
खज्जियार (चंबा)। देश के विभिन्न राज्यों से सम्मेलन में पहुंचे चिकित्सकों ने तीसरे दिन खज्जियार रेंज का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में पाई जाने वाली वनौषधियों की उपयोगिता, विशेषताओं और औषधीय गुणों की जानकारी ली।
चिकित्सकों ने वनौषधियों से तैयार होने वाली दवाओं की प्रयोगशाला में निर्माण प्रक्रिया और उससे जुड़ी बारीकियों को भी समझा।
संस्थान के निदेशक डॉ. संजीव शर्मा ने प्रतिभागियों को वनौषधियों की पहचान, औषधीय उपयोग और शोध कार्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्थान में पिछले तीन दशकों से इस दिशा में शोध किया जा रहा है। वनौषधियों से तैयार हर्बल दवाएं देश के विभिन्न हिस्सों में उपलब्ध करवाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि चंबा के अलावा धर्मशाला, इंदौर, कटक और जयपुर में भी ऐसी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
विज्ञापन
तमिलनाडु के डॉ. थिरूमूर्ती, महाराष्ट्र के डॉ. रवि नितनवरे और गुजरात के डॉ. राज कुमार रावल समेत अन्य चिकित्सकों ने खज्जियार की प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता की सराहना की। उन्होंने चंबा में निर्मित इलेक्ट्रोहोम्योपैथी दवाओं से जुड़े अनुभव भी साझा किए।
विज्ञापन