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शिव भजनों पर नाचे श्रद्धालु, भक्तिमय हुआ माहौल
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भरमाणी माता मंदिर के कुंड में स्नान करते श्रद्धालु।
- फोटो : Chamba
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चंबा। मणिमहेश डल झील में राधाष्टमी के शाही स्नान के बाद ऐतिहासिक चंबा चौगान में अब श्रद्धालुओं आराम कर रहे हैं। यात्रा की थकान को मिटाने के लिए शिव भजनों पर खूब थिरक रहे हैं।
रविवार को चारों तरफ श्रद्धालुओं ने डेरा डाले रखा। चौगान के हरेक कोने पर मणिमहेश से लौटी छड़ियां के चिह्नों को गाड़ा गया। यहां पर पूजा अर्चना की गई। इससे पूरा चौगान भगवान शंकर के जयकारों और भजनों से गूंज उठा। चौगान के साथ शहर का पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। मणिमहेश से लौटे श्रद्धालुओं के लिए समितियों ने चौगान में लंगर लगाए।
यहां पर दोपहर से लेकर शाम तक श्रद्धालुओं की लाइनें लगी रहीं। रविवार को चौगान में रात्रि ठहराव के बाद सोमवार सुबह श्रद्धालु जम्मू रवाना होंगे। श्रद्धालुओं कि मान्यता है कि मणिमहेश जाते समय और लौटते समय एक दिन चौगान में डेरा डाला जाता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। यात्रा में जाते वक्त भी वे एक दिन ठहराव चौगान में करते हैं। पड़ाव दर पड़ाव ठहराव के साथ वे यात्रा करते हैं।
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रविवार को चारों तरफ श्रद्धालुओं ने डेरा डाले रखा। चौगान के हरेक कोने पर मणिमहेश से लौटी छड़ियां के चिह्नों को गाड़ा गया। यहां पर पूजा अर्चना की गई। इससे पूरा चौगान भगवान शंकर के जयकारों और भजनों से गूंज उठा। चौगान के साथ शहर का पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। मणिमहेश से लौटे श्रद्धालुओं के लिए समितियों ने चौगान में लंगर लगाए।
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यहां पर दोपहर से लेकर शाम तक श्रद्धालुओं की लाइनें लगी रहीं। रविवार को चौगान में रात्रि ठहराव के बाद सोमवार सुबह श्रद्धालु जम्मू रवाना होंगे। श्रद्धालुओं कि मान्यता है कि मणिमहेश जाते समय और लौटते समय एक दिन चौगान में डेरा डाला जाता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। यात्रा में जाते वक्त भी वे एक दिन ठहराव चौगान में करते हैं। पड़ाव दर पड़ाव ठहराव के साथ वे यात्रा करते हैं।
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