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अपनी और बच्चों की जिंदगी दांव पर लगाकर पार कर रहे नाला
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बकाणी नाले में आई बाढ़ के बाद स्कूली बच्चों को अस्थायी पुल के रास्ते पार करवाते परिजन।संवाद
- फोटो : Chamba
चंबा। तीन दिन का समय बीत जाने के बाद भी विकास खंड मैहला के तहत आती ग्राम पंचायत धिमला में जनजीवन पटरी पर नहीं लौट पाया है। हालात यह हैं कि लकड़ी के अस्थायी पुल (तरंगड़ी) के सहारे ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं। स्कूली बच्चों की आवाजाही भी इसी पुल से ग्रामीणों को करवानी पड़ रही है। हैरानी की बात तो यह है कि पिछले दो दिन से जिला मुख्यालय से कोई भी अधिकारी घटना स्थल पर नहीं पहुंचा है। लोग नाले से बाइक को रस्सी के सहारे निकालने का प्रयास कर रहे हैं।
बहरहाल, पांच गांवों के ग्रामीण खतरे की जद में आवाजाही कर रहे हैं। गौरतलब है कि रविवार को अचानक बकाणी नाले में बाढ़ आ गई थी। इससे जहां तीन लोग लापता हो गए हैं वहीं सात पुलियां भी बह गई हैं। ऐसे में ग्रामीणों का आपस में संपर्क कट चुका है। ग्रामीणों मदन कुमार, दीपक कुमार, दिलीप कुमार, मनजीत कुमार, चमन सिंह, केशव नाथ, दीप कुमार आदि ने आपात स्थिति के लिए अस्थायी पुल का निर्माण तो किया है लेकिन इससे आवाजाही करना खतरे से खाली नहीं है। वहीं दूसरी तरफ तीन लापता हुए लोगों में से अभी तक एक ही व्यक्ति का अवशेष मिला है। एक महिला और एक अन्य व्यक्ति का अभी तक कोई सुराग नहीं लगा है। प्रशासन का सर्च अभियान भी दम तोड़ता नजर आ रहा है। ऐसे में परिजन अपने पारिवारिक सदस्यों के न मिलने से निराश हैं। वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण अपने स्तर पर नदी और नालों में लापता लोगों के लिए सर्च अभियान चला रहे हैं।
ग्राम पंचायत धिमला के उपप्रधान केवल कुुमार ने बताया कि पंचायत के विभिन्न गांवों का संपर्क टूट गया है। कहा कि लकड़ी के अस्थायी पुल के सहारे जान जोखिम में डालकर लोग बच्चों सहित आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावितों को कोई फौरी राहत भी नहीं दी है।
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एडीएम चंबा अमित मेहरा का कहना है कि प्रशासन की ओर से राहत और सर्च अभियान को तेज किया जा रहा है। पुलिस प्रशासन को भी इसके बारे में जरूरी निर्देश दिए गए हैं। कहा कि लोगों ने भी उन्हें ज्ञापन सौंपा है। कहा कि नुकसान के आधार पर प्रभावितों को उचित मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
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बहरहाल, पांच गांवों के ग्रामीण खतरे की जद में आवाजाही कर रहे हैं। गौरतलब है कि रविवार को अचानक बकाणी नाले में बाढ़ आ गई थी। इससे जहां तीन लोग लापता हो गए हैं वहीं सात पुलियां भी बह गई हैं। ऐसे में ग्रामीणों का आपस में संपर्क कट चुका है। ग्रामीणों मदन कुमार, दीपक कुमार, दिलीप कुमार, मनजीत कुमार, चमन सिंह, केशव नाथ, दीप कुमार आदि ने आपात स्थिति के लिए अस्थायी पुल का निर्माण तो किया है लेकिन इससे आवाजाही करना खतरे से खाली नहीं है। वहीं दूसरी तरफ तीन लापता हुए लोगों में से अभी तक एक ही व्यक्ति का अवशेष मिला है। एक महिला और एक अन्य व्यक्ति का अभी तक कोई सुराग नहीं लगा है। प्रशासन का सर्च अभियान भी दम तोड़ता नजर आ रहा है। ऐसे में परिजन अपने पारिवारिक सदस्यों के न मिलने से निराश हैं। वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण अपने स्तर पर नदी और नालों में लापता लोगों के लिए सर्च अभियान चला रहे हैं।
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ग्राम पंचायत धिमला के उपप्रधान केवल कुुमार ने बताया कि पंचायत के विभिन्न गांवों का संपर्क टूट गया है। कहा कि लकड़ी के अस्थायी पुल के सहारे जान जोखिम में डालकर लोग बच्चों सहित आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावितों को कोई फौरी राहत भी नहीं दी है।
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एडीएम चंबा अमित मेहरा का कहना है कि प्रशासन की ओर से राहत और सर्च अभियान को तेज किया जा रहा है। पुलिस प्रशासन को भी इसके बारे में जरूरी निर्देश दिए गए हैं। कहा कि लोगों ने भी उन्हें ज्ञापन सौंपा है। कहा कि नुकसान के आधार पर प्रभावितों को उचित मुआवजा प्रदान किया जाएगा।