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नौ दिन बाद भी मलबे में दबे युवक का नहीं लगा सुराग
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मंगला (चंबा)। मंगला के पास दरकी पहाड़ी के नौ दिन बाद भी युवक का कोई सुराग नहीं लग पाया है। जबकि हाईवे के बंद होने से दो दर्जन से अधिक पंचायतों के लोगों की मुुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। इस वजह से क्षेत्र के लोगों को पैदल आवाजाही करनी पड़ रही है। कहने को तो लोनिवि ने लोगों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए चंबा-जोत मार्ग को बीच-बीच में वाहनों की आवाजाही और लोगों के आने-जाने के लिए खोला जा रहा है। लेकिन, अचानक गिरने वाले मलबे और वहां पर लगी मशीनरी के कारण लोगों को परेशानियां उठानी पड़ रही है।
ऐसे में अब ग्रामीणों ने सबसे पहले मार्ग से पूरी तरह से मलबा हटवाने के लिए और अधिक मशीनरी लगवाने की मांग उठाई है। जिससे लोगों को राहत मिल सके। गौरतलब हो कि नौ दिन पूर्व चंबा-जोत मार्ग पर मंगला के पास देर रात दो बजे के करीब पहाड़ी दरकने से पोकलेन मशीन चालक लापता हो गया था। इसके बाद बठिंडा से आए एनडीआरएफ के जवानों ने मोर्चा संभाला। लेकिन, उनको भी सफलता हासिल नहीं हो पाई।
बीते सात दिनों से मार्ग के बंद रहने की सूरत में बढ़ी दिक्कतों के कारण आखिरकार ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट गया। ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर खूब हो-हल्ला कर प्रशासन, एनडीआरएफ, लोनिवि से लोगों की सहूलियत को देखते हुए मार्ग को यातायात के लिए खोलने की मांग उठाई। इसके बाद मार्ग को बीच-बीच में लोगों की सहूलियत और वाहनों की आवाजाही के लिए खोला जा रहा है।
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वहीं, लोनिवि की तरफ से चार पोकलेन मशीनें, दो डोजर, दो जेसीबी व छह टिपर मलबे को हटाने के लिए लगाए गए हैं। ऐसे में अब विभागीय कार्य के चलते स्थानीय लोगों को आवाजाही में परेशानियां उठानी पड़ रही है। इसके अलावा बीच-बीच में गिरने वाला मलबा और उबड़-खाबड़ रास्ता लोगों की दिक्कतों में इजाफा करने से पीछे नहीं रह रहा है। उपायुक्त चंबा हरिकेश मीणा ने बताया कि मार्ग लोगों की सहूलियत के लिए खोल दिया गया है। अधिक मलबे को हटाने के लिए मशीनरी लगाई गई है। ऐसे में संबंधित विभागीय परेशानी को देखते हुए लोगों को भी सहयोग करना होगा।
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ऐसे में अब ग्रामीणों ने सबसे पहले मार्ग से पूरी तरह से मलबा हटवाने के लिए और अधिक मशीनरी लगवाने की मांग उठाई है। जिससे लोगों को राहत मिल सके। गौरतलब हो कि नौ दिन पूर्व चंबा-जोत मार्ग पर मंगला के पास देर रात दो बजे के करीब पहाड़ी दरकने से पोकलेन मशीन चालक लापता हो गया था। इसके बाद बठिंडा से आए एनडीआरएफ के जवानों ने मोर्चा संभाला। लेकिन, उनको भी सफलता हासिल नहीं हो पाई।
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बीते सात दिनों से मार्ग के बंद रहने की सूरत में बढ़ी दिक्कतों के कारण आखिरकार ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट गया। ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर खूब हो-हल्ला कर प्रशासन, एनडीआरएफ, लोनिवि से लोगों की सहूलियत को देखते हुए मार्ग को यातायात के लिए खोलने की मांग उठाई। इसके बाद मार्ग को बीच-बीच में लोगों की सहूलियत और वाहनों की आवाजाही के लिए खोला जा रहा है।
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वहीं, लोनिवि की तरफ से चार पोकलेन मशीनें, दो डोजर, दो जेसीबी व छह टिपर मलबे को हटाने के लिए लगाए गए हैं। ऐसे में अब विभागीय कार्य के चलते स्थानीय लोगों को आवाजाही में परेशानियां उठानी पड़ रही है। इसके अलावा बीच-बीच में गिरने वाला मलबा और उबड़-खाबड़ रास्ता लोगों की दिक्कतों में इजाफा करने से पीछे नहीं रह रहा है। उपायुक्त चंबा हरिकेश मीणा ने बताया कि मार्ग लोगों की सहूलियत के लिए खोल दिया गया है। अधिक मलबे को हटाने के लिए मशीनरी लगाई गई है। ऐसे में संबंधित विभागीय परेशानी को देखते हुए लोगों को भी सहयोग करना होगा।