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वन भूमि पर कब्जा है तो भरें दावा फार्म

Wed, 23 Feb 2022 10:31 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 23 Feb 2022 10:31 PM IST
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Company's contractors accused of cutting trees
तीसा में वन अधिकार जागरूकता शिविर के दौरान मौजूद ग्रामीण। - फोटो : Chamba
चंबा। चंबा वन अधिकार मंच और हिमधरा पर्यावरण समूह की संयुक्त पहल से तीसा ब्लॉक में 21 से 23 फरवरी तक वन अधिकार कानून जागरूकता यात्रा का आयोजन किया गया। यात्रा के तीसरे दिन ग्राम पंचायत बघेईगढ़ में आठ पंचायतों के प्रतिनिधि, वन अधिकार समिति के सदस्यों और अन्य वन निवासियों के साथ वन अधिकार कानून 2006 के प्रावधानों पर चर्चा की गई। इससे पहले यात्रा के सदस्यों ने चोली पंचायत में तीन पंचायतों और कल्हेल में छह पंचायतों के प्रतिनिधियों, वन अधिकार समिति के सदस्यों और आम जनता के साथ वन अधिकार कानून 2006 के प्रावधानों की जानकारी साझा की।
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चंबा वन अधिकार मंच के सदस्य लाल हुसैन ने कहा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग जो सदियों से वनों पर अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए निर्भर हैं, वे इस कानून के तहत वहां के हकदार हैं। लेकिन, हैरानी की बात है कि उन्हें अपने अधिकारों की कोई जानकारी नहीं है। इसलिए हम यात्रा के जरिये प्रयास कर रहे हैं कि लोगों को अपने अधिकारों और कानून के प्रावधानों पर जागरूक किया जाए। बघेईगढ़ पंचायत की प्रधान शकुंतला देवी ने कहा कि 15 साल से ये कानून बने हैं लेकिन, ग्रामीण आज भी कानून से अनभिज्ञ हैं। चुराह क्षेत्र में बहुत लोग वन भूमि पर आवास के लिए निर्भर हैं और ये लोग हमेशा बेदखली के डर में रहते हैं।
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हिमधरा पर्यावरण समूह के सुमित ने बताया कि जिन लोगों के 13 दिसंबर 2005 के पहले से वन भूमि पर निवास या खेती के लिए कब्जे हैं, वे इस कानून के तहत दावा फार्म भर के बेदखली के दंश से निजात पा सकते हैं। गौरतलब है कि जिले में अभी तक केवल 53 व्यक्तिगत और सात सामुदायिक वन अधिकारों को मान्यता मिली है।
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चंबा वन अधिकार मंच और हिमधरा पर्यावरण समूह ने जागरूकता यात्रा के जरिये तीसा ब्लॉक की करेरी, कल्हेल, भावला, चरोड़ी, जसौरगढ़, दियोला, चोली, सपरोट, कोहाल, बघेईगढ़, चांजू, देहरा, चरडा, टिकरीगढ़, देहरोग, भराड़ा और लेसवीं पंचायत के लोगों को वन अधिकार कानून के तहत जानकारी दी। इस मौके पर कल्हेल वार्ड की जिला परिषद सदस्य अंजू देवी भी उपस्थित रहीं।
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