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Chamba News: चंबा में सीटू का प्रदर्शन, राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा
Wed, 27 Nov 2024 06:47 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 27 Nov 2024 06:47 AM IST
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चंबा में अपनी मागों को लेकर प्रदर्शन करते विभिन्न संस्थाओं कर्मचारी ओर कार्यकर्ता। संवाद
चंबा। सीटू जिला कमेटी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने संयुक्त ट्रेड यूनियन के आह्वान पर जिला मुख्यालय में रोष रैली निकाली। इस रैली में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और मांगों को पूरा न करने पर नाराजगी जताई। रैली का नेतृत्व सीटू जिला सचिव सुदेश ठाकुर ने किया। रैली के बाद प्रदर्शनकारियों ने उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति को 12 सूत्री मांग पत्र भेजा।
सीटू जिला सचिव सुदेश ठाकुर ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 में ट्रेड यूनियनों ने मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताओं के खिलाफ राष्ट्रव्यापी हड़ताल की थी। किसानों ने तीन काले कृषि कानूनों के विरोध में संसद की ओर ऐतिहासिक मार्च निकाला था, उसके बाद उम्मीद जगी थी कि सरकार किसानों और मजदूरों से किए गए वादे पूरे करेगी।
मगर आज तक उन वादों को लागू नहीं किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चार श्रम कोड न्यूनतम मजदूरी, सुरक्षित रोजगार, उचित कार्य समय और यूनियन बनाने के अधिकार की किसी भी गारंटी को खत्म कर देते हैं। यह मजदूरों के हित में नहीं हैं। सुदेश ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियां, निजीकरण, ठेकाप्रथा और भर्ती न करने की नीति को बढ़ावा देने वाली और नौकरी चाहने वाले युवाओं के लिए भी भविष्य में गंभीर समस्याएं पैदा कर रही हैं।
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उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले तीन वर्षों में खाद्य सब्सिडी और उर्वरक अनुदान में लगातार कटौती की है। इससे आम जनता और किसान बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। ज्ञापन में यह मांग की गई कि सभी फसलों के लिए कानूनी रूप से गारंटीकृत खरीद की व्यवस्था की जाए। एमएसपी को सुनिश्चित किया जाए, सभी के लिए रोजगार सुनिश्चित किया जाए और मजदूरों के लिए प्रति माह न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये किया जाए। इसके साथ ही घरेलू उपयोगकर्ताओं और दुकानों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की भी मांग की गई है। इस रैली में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं और अन्य संगठनों के सदस्यों सहित नरेंद्र कुमार, सुरेश कुमार सहित कई अन्य कार्यकर्ता भी शामिल थे।
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सीटू जिला सचिव सुदेश ठाकुर ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 में ट्रेड यूनियनों ने मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताओं के खिलाफ राष्ट्रव्यापी हड़ताल की थी। किसानों ने तीन काले कृषि कानूनों के विरोध में संसद की ओर ऐतिहासिक मार्च निकाला था, उसके बाद उम्मीद जगी थी कि सरकार किसानों और मजदूरों से किए गए वादे पूरे करेगी।
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मगर आज तक उन वादों को लागू नहीं किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चार श्रम कोड न्यूनतम मजदूरी, सुरक्षित रोजगार, उचित कार्य समय और यूनियन बनाने के अधिकार की किसी भी गारंटी को खत्म कर देते हैं। यह मजदूरों के हित में नहीं हैं। सुदेश ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियां, निजीकरण, ठेकाप्रथा और भर्ती न करने की नीति को बढ़ावा देने वाली और नौकरी चाहने वाले युवाओं के लिए भी भविष्य में गंभीर समस्याएं पैदा कर रही हैं।
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उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले तीन वर्षों में खाद्य सब्सिडी और उर्वरक अनुदान में लगातार कटौती की है। इससे आम जनता और किसान बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। ज्ञापन में यह मांग की गई कि सभी फसलों के लिए कानूनी रूप से गारंटीकृत खरीद की व्यवस्था की जाए। एमएसपी को सुनिश्चित किया जाए, सभी के लिए रोजगार सुनिश्चित किया जाए और मजदूरों के लिए प्रति माह न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये किया जाए। इसके साथ ही घरेलू उपयोगकर्ताओं और दुकानों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की भी मांग की गई है। इस रैली में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं और अन्य संगठनों के सदस्यों सहित नरेंद्र कुमार, सुरेश कुमार सहित कई अन्य कार्यकर्ता भी शामिल थे।