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मेडिकल कॉलेज चंबा में छोटे बच्चों को मुफ्त नहीं मिल रही दवाइयां
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चंबा। पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज चंबा में छोटे बच्चों को नवजात शिशु सुरक्षा योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस योजना के तहत जन्म से लेकर एक वर्ष तक बच्चों का पूरा इलाज मुफ्त करने का प्रावधान है। लेकिन, चंबा मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए आने वाले बच्चों के अभिभावक पैसे देकर दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं।
इस बारे में अस्पताल प्रबंधन को कोई सूचना भी नहीं है। वार्ड में तैनात स्टाफ नर्सों को भी योजना के बारे में कोई जानकारी नहीं है। जब डॉक्टर बच्चों की जांच करने के बाद उनके इलाज के लिए पर्ची पर दवाइयां लिखते हैं तो अभिभावक दवाइयों लेने के लिए वार्ड में नियुक्त स्टाफ नर्सों के पास जाते हैं। स्टाफ नर्सें उन्हें दवाई न होने का हवाला देकर बाहर से दवाई लाने की बात करती हैं। इस कारण अभिभावकों को मजबूरन बाहर से दवाई लानी पड़ती है।
इस समस्या को लेकर तीन बच्चों के अभिभावक मुख्य चिकित्सा अधिकारी से भी मिले। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को दवाइयों के बिल भी दिखाए। जोकि, वह बाहर से खरीद कर लाए थे। इतना ही नहीं अभिभावकों ने इस बारे में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर पर भी शिकायत कर दी है। ओपीडी में तैनात डॉक्टर बीमारी बच्चों का इलाज करने के लिए पूरी बारीकि से उनके स्वास्थ्य की जांच करते हैं।
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जांच के बाद बच्चों को आवश्यकता अनुसार दवाइयां भी लिखते हैं। इन दवाइयों को बच्चों के लिए उपलब्ध करवाना सरकार और अस्पताल प्रबंधन का कार्य बनता है। लेकिन मेडिकल कॉलेज चंबा में बच्चों को ओपीडी में जांच करवाने के बाद निजी केमिस्टों से दवाई खरीदनी पड़ रही है। हालांकि उपरोक्त योजना के तहत एक वर्ष की आयु वाले बच्चे को घर से लाने और छोड़ने के लिए गाड़ी उपलब्ध करवाने का भी प्रावधान है। मगर चंबा में गाड़ी तो दूर की बात है, बच्चों को दवाई भी नहीं मिल पा रही है।
बच्चों को दवाइयां उपलब्ध करवाने के दिए निर्देश : डॉ. राजेश गुलेरी
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश गुलेरी ने बताया कि एक वर्ष तक आयु वाले सभी बच्चों के इलाज को लेकर दवाइयां मुफ्त मिलती है। मेडिकल कॉलेज में भर्ती होने वाले बच्चों को दवाइयां मुफ्त उपलब्ध करवाने के लिए संबंधित स्टाफ को निर्देश दिए जाएंगे। अगर दवाइयां बाहर से भी खरीदनी पड़े तो इसके लिए अस्पताल प्रबंधन व्यवस्था करेगा। अभिभावकों को पैसे नहीं खर्च करने पड़ेंगे।
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इस बारे में अस्पताल प्रबंधन को कोई सूचना भी नहीं है। वार्ड में तैनात स्टाफ नर्सों को भी योजना के बारे में कोई जानकारी नहीं है। जब डॉक्टर बच्चों की जांच करने के बाद उनके इलाज के लिए पर्ची पर दवाइयां लिखते हैं तो अभिभावक दवाइयों लेने के लिए वार्ड में नियुक्त स्टाफ नर्सों के पास जाते हैं। स्टाफ नर्सें उन्हें दवाई न होने का हवाला देकर बाहर से दवाई लाने की बात करती हैं। इस कारण अभिभावकों को मजबूरन बाहर से दवाई लानी पड़ती है।
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इस समस्या को लेकर तीन बच्चों के अभिभावक मुख्य चिकित्सा अधिकारी से भी मिले। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को दवाइयों के बिल भी दिखाए। जोकि, वह बाहर से खरीद कर लाए थे। इतना ही नहीं अभिभावकों ने इस बारे में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर पर भी शिकायत कर दी है। ओपीडी में तैनात डॉक्टर बीमारी बच्चों का इलाज करने के लिए पूरी बारीकि से उनके स्वास्थ्य की जांच करते हैं।
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जांच के बाद बच्चों को आवश्यकता अनुसार दवाइयां भी लिखते हैं। इन दवाइयों को बच्चों के लिए उपलब्ध करवाना सरकार और अस्पताल प्रबंधन का कार्य बनता है। लेकिन मेडिकल कॉलेज चंबा में बच्चों को ओपीडी में जांच करवाने के बाद निजी केमिस्टों से दवाई खरीदनी पड़ रही है। हालांकि उपरोक्त योजना के तहत एक वर्ष की आयु वाले बच्चे को घर से लाने और छोड़ने के लिए गाड़ी उपलब्ध करवाने का भी प्रावधान है। मगर चंबा में गाड़ी तो दूर की बात है, बच्चों को दवाई भी नहीं मिल पा रही है।
बच्चों को दवाइयां उपलब्ध करवाने के दिए निर्देश : डॉ. राजेश गुलेरी
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश गुलेरी ने बताया कि एक वर्ष तक आयु वाले सभी बच्चों के इलाज को लेकर दवाइयां मुफ्त मिलती है। मेडिकल कॉलेज में भर्ती होने वाले बच्चों को दवाइयां मुफ्त उपलब्ध करवाने के लिए संबंधित स्टाफ को निर्देश दिए जाएंगे। अगर दवाइयां बाहर से भी खरीदनी पड़े तो इसके लिए अस्पताल प्रबंधन व्यवस्था करेगा। अभिभावकों को पैसे नहीं खर्च करने पड़ेंगे।