{"_id":"62263b37e8bf8863856b35c5","slug":"change-fate-by-cultivating-medicinal-plants-chamba-news-sml401846175","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुप्पा और रूहणूकोठी के किसानों की बदलेगी किस्मत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुप्पा और रूहणूकोठी के किसानों की बदलेगी किस्मत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंबा। विधानसभा क्षेत्र भरमौर के सुप्पा और रूहणूकोठी गांवों के किसानों के दिन बहुरने वाले हैं। दोनों गांवों में वनस्पति वन योजना के तहत औषधीय पौधे लगाने के लिए दो क्लस्टरों को अनुमति मिल गई है। अब इन क्लस्टरों के तहत काम करने वाले किसानों को क्षेत्र की ऊंचाई और पौधों के हिसाब से अनुदान दिया जाएगा। इससे अधिक से अधिक औषधीय पौधे लगाकर किसान अपनी आय में बढ़ोतरी कर सकेंगे।
जिले में किसानों का औषधीय पौधों की खेती की ओर का काफी रुझान बढ़ा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते दो साल में औषधीय पौधे लगाने के लिए गठित किए गए सात क्लस्टरों (माणी, झज्जाकोठी, कुंडी, हमलगला, कोटुई, झझाकोठी, सेईकोठी) को जिला आयुर्वेदिक विभाग 36 लाख की सब्सिडी जारी भी कर चुका है। इसी क्रम में अब सुप्पा और रूहणूकोठी के दो क्लस्टरों को भी आयुर्वेदिक निदेशालय ने अनुमति दे दी है, जिससे अब सुप्पा और रूहणूकोठी में 50 हेक्टेयर भूमि पर औषधीय पौधों की खेती होगी। किसानों को औषधीय पौधों को लगाने के लिए बेड शेड बनाने की जानकारी देने के साथ ही पौधे उपलब्ध करवाने, देखरेख सहित जड़ी-बूटियों को बाहरी मंडियों में बेचने तक की प्रक्रिया में विभाग मदद करता है।
किसानों को औषधीय पौधे की खरीद पर पौध के हिसाब से पांच से लेकर दस रुपये तक सब्सिडी विभाग देता है। किसान ब्रह्मी, कूठ, कौड़, समाग, जंगली लहुसन, सिंगली-मिंगली, मुनगा आदि औषधीय पौधों की खेती कर सकते हैं। इन जड़ी-बूटियों की बाहरी मंडियों में काफी मांग रहती है। जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. अनिल गर्ग ने बताया कि सुप्पा और रूहणूकोठी के दो क्लस्टरों को निदेेशालय की ओर से अनुमति प्रदान की गई है। जिले में अब 9 क्लस्टर हो गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिले में किसानों का औषधीय पौधों की खेती की ओर का काफी रुझान बढ़ा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते दो साल में औषधीय पौधे लगाने के लिए गठित किए गए सात क्लस्टरों (माणी, झज्जाकोठी, कुंडी, हमलगला, कोटुई, झझाकोठी, सेईकोठी) को जिला आयुर्वेदिक विभाग 36 लाख की सब्सिडी जारी भी कर चुका है। इसी क्रम में अब सुप्पा और रूहणूकोठी के दो क्लस्टरों को भी आयुर्वेदिक निदेशालय ने अनुमति दे दी है, जिससे अब सुप्पा और रूहणूकोठी में 50 हेक्टेयर भूमि पर औषधीय पौधों की खेती होगी। किसानों को औषधीय पौधों को लगाने के लिए बेड शेड बनाने की जानकारी देने के साथ ही पौधे उपलब्ध करवाने, देखरेख सहित जड़ी-बूटियों को बाहरी मंडियों में बेचने तक की प्रक्रिया में विभाग मदद करता है।
विज्ञापन
किसानों को औषधीय पौधे की खरीद पर पौध के हिसाब से पांच से लेकर दस रुपये तक सब्सिडी विभाग देता है। किसान ब्रह्मी, कूठ, कौड़, समाग, जंगली लहुसन, सिंगली-मिंगली, मुनगा आदि औषधीय पौधों की खेती कर सकते हैं। इन जड़ी-बूटियों की बाहरी मंडियों में काफी मांग रहती है। जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. अनिल गर्ग ने बताया कि सुप्पा और रूहणूकोठी के दो क्लस्टरों को निदेेशालय की ओर से अनुमति प्रदान की गई है। जिले में अब 9 क्लस्टर हो गए हैं।
विज्ञापन