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पांच बहनों का सबसे छोटा और लाड़ला भाई बना काल का ग्रास
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हादसे में पांच बहनों के इकलौते भाई की गई जान
बेटे की मौत की खबर सुनकी चौखट पर गश खा गिरी मां
हादसे ने पिता रांझा राम को दिए कभी न भरने वाले जख्म
रणजीत शर्मा
भरमौर (चंबा)। चंबा-भरमौर मार्ग पर शंकु पट्टी में हुए दर्दनाक हादसे ने कई परिवारों को कभी न भूलने वाले जख्म दिए हैं। हादसे में पांच बहनों के इकलौते भाई भी काल का ग्रास बन गया है। इकलौते भाई की मौत की खबर जब घर पहुंची तो मानों परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। लव की मां गश खाकर दरवाजे की चौखट पर ही गिर पड़ी। वहीं, बहनें (श्रृष्ठा और शिक्षा) का भी रो-रोकर बुरा हाल है। जवान बेटे की मौत ने रांझा राम की कमर तोड़ कर रख दी है। वह इसी कशमकश में थे कि पत्नी, बच्चियों को संभालें या बेटे के शव को लेकर घर लाएं। बता दें कि रांझा राम और गिलमो देवी के घर पांच बेटियों ने जन्म लिया।
पुत्र की चाह में दोनों ने हर मंदिर में शीश नवाया। मगर हादसे ने लाखों मन्नतों के बाद जन्मे बेटे को उनसे हमेशा के लिए छीन लिया है। खेतीबाड़ी कर परिवार का पालन-पोषण करने वाले रांझाराम को बेटे से काफी उम्मीदें थी। खेेतीबाड़ी कर और मणिमहेश यात्रा के दौरान धनछो में ढाबा चलाकर दोनों पति-पत्नी घर खर्च चलाते हैं। लव के बड़े होने पर उसने गाड़ी चालक का काम कर पैसा कमाना शुरू किया।
ऐसे में अब बुजुर्ग रांझा राम का भी बेटा हाथ बंटाने लगा। तीन बड़ी बहनों तृप्ता देवी, अनु देवी और रजनी की शादी होने के बाद अब घर पर उससे बड़ी दो बहने श्रृष्ठा और शिक्षा ही रहीं थी। लव कुुमार और उसके माता-पिता ने दोनों बहनों की भी जल्द शादी करवाने के सपने संजोए थे। लेकिन, काल को कुछ और ही मंजूर था।
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वीरवार की सुबह दोनों बहनों, मां-बाप को घर जल्द लौटने की बात कहकर निकले लव कुमार को क्या मालूम था कि जिस सफर पर जाने के लिए वह निकला है, अब वहां से वह वापिस नहीं आएगा। दोपहर बाद लव कुमार के घर लौटने की जगह पर उसकी मौत की खबर घर पहुंची।
इसे सुनकर सबके पांव तले जमीन ही खिसक गई। वहीं, गांव की महिलाएं और अन्य लोग लव के घर उसकी मां-बहनों और पिता को सांत्वना देने के लिए पहुंच रहे हैं। किसी को भी विश्वास नहीं हो रहा है कि हंसमुख सा रहने वाला लव अब कभी वापिस नहीं आएगा।
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बेटे की मौत की खबर सुनकी चौखट पर गश खा गिरी मां
हादसे ने पिता रांझा राम को दिए कभी न भरने वाले जख्म
रणजीत शर्मा
भरमौर (चंबा)। चंबा-भरमौर मार्ग पर शंकु पट्टी में हुए दर्दनाक हादसे ने कई परिवारों को कभी न भूलने वाले जख्म दिए हैं। हादसे में पांच बहनों के इकलौते भाई भी काल का ग्रास बन गया है। इकलौते भाई की मौत की खबर जब घर पहुंची तो मानों परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। लव की मां गश खाकर दरवाजे की चौखट पर ही गिर पड़ी। वहीं, बहनें (श्रृष्ठा और शिक्षा) का भी रो-रोकर बुरा हाल है। जवान बेटे की मौत ने रांझा राम की कमर तोड़ कर रख दी है। वह इसी कशमकश में थे कि पत्नी, बच्चियों को संभालें या बेटे के शव को लेकर घर लाएं। बता दें कि रांझा राम और गिलमो देवी के घर पांच बेटियों ने जन्म लिया।
पुत्र की चाह में दोनों ने हर मंदिर में शीश नवाया। मगर हादसे ने लाखों मन्नतों के बाद जन्मे बेटे को उनसे हमेशा के लिए छीन लिया है। खेतीबाड़ी कर परिवार का पालन-पोषण करने वाले रांझाराम को बेटे से काफी उम्मीदें थी। खेेतीबाड़ी कर और मणिमहेश यात्रा के दौरान धनछो में ढाबा चलाकर दोनों पति-पत्नी घर खर्च चलाते हैं। लव के बड़े होने पर उसने गाड़ी चालक का काम कर पैसा कमाना शुरू किया।
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ऐसे में अब बुजुर्ग रांझा राम का भी बेटा हाथ बंटाने लगा। तीन बड़ी बहनों तृप्ता देवी, अनु देवी और रजनी की शादी होने के बाद अब घर पर उससे बड़ी दो बहने श्रृष्ठा और शिक्षा ही रहीं थी। लव कुुमार और उसके माता-पिता ने दोनों बहनों की भी जल्द शादी करवाने के सपने संजोए थे। लेकिन, काल को कुछ और ही मंजूर था।
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वीरवार की सुबह दोनों बहनों, मां-बाप को घर जल्द लौटने की बात कहकर निकले लव कुमार को क्या मालूम था कि जिस सफर पर जाने के लिए वह निकला है, अब वहां से वह वापिस नहीं आएगा। दोपहर बाद लव कुमार के घर लौटने की जगह पर उसकी मौत की खबर घर पहुंची।
इसे सुनकर सबके पांव तले जमीन ही खिसक गई। वहीं, गांव की महिलाएं और अन्य लोग लव के घर उसकी मां-बहनों और पिता को सांत्वना देने के लिए पहुंच रहे हैं। किसी को भी विश्वास नहीं हो रहा है कि हंसमुख सा रहने वाला लव अब कभी वापिस नहीं आएगा।