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Chamba News: रोबोटिक सर्जरी से लेकर रीढ़ की हड्डी के इलाज पर मंथन
Mon, 06 Oct 2025 11:15 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 06 Oct 2025 11:15 PM IST
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हिमऑर्थोकोन के समापन अवसर पर प्रतिभागियों को सम्मानित करते आयोजक सचिव डॉ. मानिक। संवाद।
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चंबा। जिले में रोबोटिक सर्जरी पर राष्ट्रीय कार्यशाला हिमऑर्थोकॉन-2025 का समापन रविवार शाम को हुआ। मेडिकल कॉलेज में तीन दिन तक चली इस कार्यशाला में रोबोटिक सर्जरी से लेकर रीढ़ की हड्डी के इलाज को लेकर विशेषज्ञों ने अपने अनुभव एक-दूसरे से साझा किए।
इस कार्यशाला में भाग लेने वाले सभी विशेषज्ञ डॉक्टरों को समापन समारोह में सम्मानित किया गया। इसमें पद्मश्री डॉ. राज बहादुर भी शामिल रहे, जिन्हें पोलियो से ग्रसित बच्चों का ऑपरेशन करके दोबारा चलने लायक बनाने के लिए पद्मश्री अवार्ड मिला है। उन्होंने अपने अनुभव अन्य डॉक्टरों से साझा किए। साथ ही आयोजन समिति को इस राष्ट्रीय कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए धन्यवाद भी किया।
समापन अवसर पर आयोजक सचिव डॉ. मनिक सहगल ने अपने भाषण में टीम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से अपनी पत्नी एवं सह-आयोजक सचिव डॉ. रुबिंदर कौर, डॉ. विनोद भारद्वाज और अन्य टीम को धन्यवाद दिया। इसके साथ उन्होंने डॉ. लकी वर्मा, डॉ. गुरजंत सिंह, डॉ. अनुज, डॉ. आशीष, डॉ. अनिल चरक, डॉ. प्रतीक, डॉ. अनुभव, डॉ. नितीश, डॉ. अनीश, डॉ. बिष्ट, डॉ. आकुल, डॉ. आर्यन और डॉ. राघव को उनके अमूल्य योगदान के लिए हार्दिक धन्यवाद दिया। उन्होंने छात्र स्वयंसेवकों तमन्ना, गर्गी, विधिका, विशाखा, अंजली, दीप्ति, ईशिका, अखिल, आर्शिया, सोनी, सत्यम, शिवांश, सिद्धार्थ कटोच, डॉ. मुदिता, आंश, विशाल, अमन, सक्षम और सुमित की प्रशंसा की।
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इस कार्यशाला में भाग लेने वाले सभी विशेषज्ञ डॉक्टरों को समापन समारोह में सम्मानित किया गया। इसमें पद्मश्री डॉ. राज बहादुर भी शामिल रहे, जिन्हें पोलियो से ग्रसित बच्चों का ऑपरेशन करके दोबारा चलने लायक बनाने के लिए पद्मश्री अवार्ड मिला है। उन्होंने अपने अनुभव अन्य डॉक्टरों से साझा किए। साथ ही आयोजन समिति को इस राष्ट्रीय कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए धन्यवाद भी किया।
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समापन अवसर पर आयोजक सचिव डॉ. मनिक सहगल ने अपने भाषण में टीम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से अपनी पत्नी एवं सह-आयोजक सचिव डॉ. रुबिंदर कौर, डॉ. विनोद भारद्वाज और अन्य टीम को धन्यवाद दिया। इसके साथ उन्होंने डॉ. लकी वर्मा, डॉ. गुरजंत सिंह, डॉ. अनुज, डॉ. आशीष, डॉ. अनिल चरक, डॉ. प्रतीक, डॉ. अनुभव, डॉ. नितीश, डॉ. अनीश, डॉ. बिष्ट, डॉ. आकुल, डॉ. आर्यन और डॉ. राघव को उनके अमूल्य योगदान के लिए हार्दिक धन्यवाद दिया। उन्होंने छात्र स्वयंसेवकों तमन्ना, गर्गी, विधिका, विशाखा, अंजली, दीप्ति, ईशिका, अखिल, आर्शिया, सोनी, सत्यम, शिवांश, सिद्धार्थ कटोच, डॉ. मुदिता, आंश, विशाल, अमन, सक्षम और सुमित की प्रशंसा की।
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