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Chamba News: पांगी के पुर्थी में बाहरालू मेले की धूम
Sat, 04 Mar 2023 11:08 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sat, 04 Mar 2023 11:08 PM IST
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चंबा के पांगी में जुकारू उत्सव के दौरान नृत्य करते स्थानीय लोग।संवाद
पांगी (चंबा)। चार प्रजामंडलों रेई, पुर्थी, शौर और थांदल के लोगों ने मिलकर पुर्थी में बाहरालू मेला मनाया। इन प्रजामंडलों के लोग 12 दिन के बाद एक-दूसरे के साथ मिलकर काफी खुश हुए। ये लोग जुकारू उत्सव के 12 दिन तक एक-दूसरे के गांव नहीं जाते हैं। ऐसे में जब पुर्थी में मेले का आयोजन किया जाता है तो चारों प्रजामंडलों के लोग ढोल-नगाड़ों के साथ यहां पहुंचते हैं। इस दौरान रेई और शौर से रथ यात्रा भी निकाली जाती है जो पुर्थी पहुंचती है।
रथ यात्रा के साथ जहां माता के गूर शामिल रहते हैं तो वहीं भारी संख्या में स्थानीय लोग भी अपनी मौजूदगी दर्ज करवाते हैं। शनिवार सुबह 6:00 बजे मलासनी माता मंदिर पुर्थी में थांदल और पुर्थी के लोग लकड़ी से बनी कुकड़ी (माता का खिलौना) की सजावट करने में जुट गए। सुबह 9:00 बजे उन्होंने कुकड़ी को आभूषण पहनाकर रथ यात्रा के लिए तैयार कर दिया। जिस घर की छत पर मेला मनाया जाता है वहां 24 घंटे दीया जलाकर बलिदानी राजाओं की पूजा की जाती है। मलासनी माता मंदिर के पुजारी भूरी सिंह, पूर्ण चंद और श्रीकंठ ने बताया कि मेले के खत्म होने के अगले दिन यानी रविवार को सुबह माता के खिलौने कुकड़ी को मेले स्थल से वापस लाया जाएगा। परंपरा के मुताबिक कुकड़ी के गहने उतारने से पहले बलि दी जाती थी लेकिन बलि प्रथा बंद होने के बाद अब नारियल चढ़ाया जाता है। चार प्रजामंडलों के धूमधाम के साथ बाहरालू मेला मनाया। इस दौरान उन्होंने एक-दूसरे के गले मिलकर शुभकामनाएं भी दीं।
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रथ यात्रा के साथ जहां माता के गूर शामिल रहते हैं तो वहीं भारी संख्या में स्थानीय लोग भी अपनी मौजूदगी दर्ज करवाते हैं। शनिवार सुबह 6:00 बजे मलासनी माता मंदिर पुर्थी में थांदल और पुर्थी के लोग लकड़ी से बनी कुकड़ी (माता का खिलौना) की सजावट करने में जुट गए। सुबह 9:00 बजे उन्होंने कुकड़ी को आभूषण पहनाकर रथ यात्रा के लिए तैयार कर दिया। जिस घर की छत पर मेला मनाया जाता है वहां 24 घंटे दीया जलाकर बलिदानी राजाओं की पूजा की जाती है। मलासनी माता मंदिर के पुजारी भूरी सिंह, पूर्ण चंद और श्रीकंठ ने बताया कि मेले के खत्म होने के अगले दिन यानी रविवार को सुबह माता के खिलौने कुकड़ी को मेले स्थल से वापस लाया जाएगा। परंपरा के मुताबिक कुकड़ी के गहने उतारने से पहले बलि दी जाती थी लेकिन बलि प्रथा बंद होने के बाद अब नारियल चढ़ाया जाता है। चार प्रजामंडलों के धूमधाम के साथ बाहरालू मेला मनाया। इस दौरान उन्होंने एक-दूसरे के गले मिलकर शुभकामनाएं भी दीं।
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