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घर-घर जाकर टीबी रोगियों की पहचान करेंगी आशा वर्कर
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चंबा। जिला चंबा में टीबी रोगियों की पहचान करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक अगस्त से 31 अगस्त तक एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान में समस्त जिला भर में तैनात आशा वर्कर अपने-अपने क्षेत्र में घर-घर जाकर टीबी रोगियों की पहचान करेंगी। आशा वर्कर घर में रहने वाले परिवार के सभी लोगों से पूछताछ करेंगी। परिवार के सदस्यों में अगर किसी को टीबी संबंधित लक्षण पाए जाते हैं तो उसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दी जाएगी। जिससे रोगी का इलाज प्रारंभ किया जा सके। इससे टीबी रोग को फैलने से रोकने में भी मदद मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कई ऐसे लोग हैं जो टीबी रोग से ग्रसित हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग को ऐसे मरीजों की जानकारी नहीं है।
अब स्वास्थ्य विभाग ऐसे सभी मरीजों की पहचान करके जिला भर में टीबी रोगियों का एक डाटा तैयार करेगा। इस अभियान को सफल बनाने के लिए शुक्रवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सभागार में आशा वर्करों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में आशा वर्करों को टीबी के छुपे हुए मरीजों की पहचान करने का प्रशिक्षण दिया गया। टीबी रोग के लक्षणों के बारे में भी आशा वर्करों को जानकारी दी गई। जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉक्टर करण हितैषी ने बताया कि जिला में एक अगस्त से 31 अगस्त तक एक्टिव केस फाइंडिग अभियान शुरू किया जाएगा। इसमें आशा वर्कर लोगों के घरों में जाकर छुपे हुए टीबी रोगियों की पहचान करेंगी। इस कार्य के लिए आशा वर्करों को विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है।
टीबी रोग होने पर नजर आते हैं ऐसे लक्षण
दो सप्ताह या अधिक समय से किसी व्यक्ति को खांसी, बुखार, वजन में कमी आना, भूख न लगना, बलगम से खून आना व सीने में दर्द होना इस बीमारी के लक्षण हैं। ऐसे लक्षण नजर आने पर लापरवाही न दिखाते हुए तुरंत चिकित्सक से जांच करवानी चाहिए। जिससे इस बीमारी को फैलने से पहले ही रोका जा सकता है।
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अब स्वास्थ्य विभाग ऐसे सभी मरीजों की पहचान करके जिला भर में टीबी रोगियों का एक डाटा तैयार करेगा। इस अभियान को सफल बनाने के लिए शुक्रवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सभागार में आशा वर्करों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में आशा वर्करों को टीबी के छुपे हुए मरीजों की पहचान करने का प्रशिक्षण दिया गया। टीबी रोग के लक्षणों के बारे में भी आशा वर्करों को जानकारी दी गई। जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉक्टर करण हितैषी ने बताया कि जिला में एक अगस्त से 31 अगस्त तक एक्टिव केस फाइंडिग अभियान शुरू किया जाएगा। इसमें आशा वर्कर लोगों के घरों में जाकर छुपे हुए टीबी रोगियों की पहचान करेंगी। इस कार्य के लिए आशा वर्करों को विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है।
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टीबी रोग होने पर नजर आते हैं ऐसे लक्षण
दो सप्ताह या अधिक समय से किसी व्यक्ति को खांसी, बुखार, वजन में कमी आना, भूख न लगना, बलगम से खून आना व सीने में दर्द होना इस बीमारी के लक्षण हैं। ऐसे लक्षण नजर आने पर लापरवाही न दिखाते हुए तुरंत चिकित्सक से जांच करवानी चाहिए। जिससे इस बीमारी को फैलने से पहले ही रोका जा सकता है।
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