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Chamba News: आपदा को लेकर प्रशासन सतर्क, रियल टाइम भूस्खलन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने की तैयारी
Thu, 23 Oct 2025 09:35 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 23 Oct 2025 09:35 PM IST
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चंबा। आपदा से सर्तकता को लेकर प्रशासन ने जिले में रियल टाइम भूस्खलन मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित करने की तैयारी कर ली है। वीरवार को उपायुक्त मुकेश रेपसवाल की अध्यक्षता में इस सिस्टम को स्थापित करने को लेकर आईआईटी मंडी के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई। उपायुक्त ने कहा कि जिले के भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में इस तकनीक को चरणबद्ध तरीके से स्थापित करने पर निर्णय लिया जाएगा। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे जिले के भूस्खलन प्रभावित और संभावित स्थलों की पहचान करें और उनकी सूची प्रशासन को शीघ्र उपलब्ध करवाएं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के अन्य जिलों में आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा स्थापित किए इस सिस्टम की फीडबैक के आधार पर आवश्यक उपकरण स्थापित किए जाएंगे, ताकि उनकी कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता का आकलन किया जा सके। ऐसी तकनीकी प्रणालियां आपदा जोखिम न्यूनीकरण में प्रभावी भूमिका निभा सकती हैं। उपायुक्त को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी से आए प्रतिनिधियों द्वारा पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से सिस्टम की कार्यप्रणाली, तकनीकी विशेषताओं और फील्ड में इसके सफल संचालन की जानकारी साझा की। बैठक में वरिष्ठ अनुसंधान सहयोगी डॉ. साहिल संख्यान और वरिष्ठ व्यवसाय प्रबंधक चंदन वैद्य सहित जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
सिस्टम ऐसे करता है काम
रियल टाइम भूस्खलन मॉनिटरिंग सिस्टम एक ऐसी प्रणाली है, जो सेंसर का उपयोग करके भूस्खलन के जोखिम वाले क्षेत्रों की लगातार निगरानी करती है। यह सिस्टम बारिश, नमी, और मिट्टी के दबाव जैसे डेटा को रियल-टाइम में इकट्ठा करता है और भूस्खलन के शुरुआती संकेतों का पता लगाता है। जब यह किसी खतरे का पता लगाता है तो यह तुरंत एक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को सक्रिय करता है, जो अधिकारियों और निवासियों को एसएमएस या अलर्ट के माध्यम से सूचित करता है, ताकि संभावित आपदा से बचा जा सके।
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उन्होंने कहा कि प्रदेश के अन्य जिलों में आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा स्थापित किए इस सिस्टम की फीडबैक के आधार पर आवश्यक उपकरण स्थापित किए जाएंगे, ताकि उनकी कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता का आकलन किया जा सके। ऐसी तकनीकी प्रणालियां आपदा जोखिम न्यूनीकरण में प्रभावी भूमिका निभा सकती हैं। उपायुक्त को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी से आए प्रतिनिधियों द्वारा पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से सिस्टम की कार्यप्रणाली, तकनीकी विशेषताओं और फील्ड में इसके सफल संचालन की जानकारी साझा की। बैठक में वरिष्ठ अनुसंधान सहयोगी डॉ. साहिल संख्यान और वरिष्ठ व्यवसाय प्रबंधक चंदन वैद्य सहित जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
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सिस्टम ऐसे करता है काम
रियल टाइम भूस्खलन मॉनिटरिंग सिस्टम एक ऐसी प्रणाली है, जो सेंसर का उपयोग करके भूस्खलन के जोखिम वाले क्षेत्रों की लगातार निगरानी करती है। यह सिस्टम बारिश, नमी, और मिट्टी के दबाव जैसे डेटा को रियल-टाइम में इकट्ठा करता है और भूस्खलन के शुरुआती संकेतों का पता लगाता है। जब यह किसी खतरे का पता लगाता है तो यह तुरंत एक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को सक्रिय करता है, जो अधिकारियों और निवासियों को एसएमएस या अलर्ट के माध्यम से सूचित करता है, ताकि संभावित आपदा से बचा जा सके।
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