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कुर्सी कुछ साल की तो पेंशन, नौकरी पूरी उम्र की तो अनिश्चितता क्यों : डॉ. गुलेरिया
Sun, 27 Sep 2026 10:23 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 27 Sep 2026 10:23 PM IST
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बनीखेत में कर्मचारी महासंघ ने उठाया सवाल, एनपीएस-यूपीएस हटाकर पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग
डॉ. संजीव बोले- 30 से 35 साल सेवा करने वाले कर्मचारियों को भी सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक सुरक्षा का अधिकार
संवाद न्यूज एजेंसी
बनीखेत (चंबा)। कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर उठाया गया है। न्यू पेंशन स्कीम सेवानिवृत्त दस वर्ष से कम सेवाकाल वाले कर्मचारी-अधिकारी महासंघ हिमाचल प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजीव गुलेरिया ने केंद्र और राज्य सरकार से पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग की है।
डॉ. गुलेरिया ने कहा कि विधायकों और सांसदों को कम अवधि तक जनप्रतिनिधि रहने के बाद पेंशन का अधिकार मिलता है, जबकि 30 से 35 वर्ष तक राष्ट्र और प्रदेश की सेवा करने वाले कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक सुरक्षा से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन कोई खैरात नहीं, बल्कि सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक जीवन और सामाजिक सुरक्षा का आधार है।
उन्होंने कहा कि कर्मचारी न्यू पेंशन स्कीम और एकीकृत पेंशन योजना को स्वीकार नहीं करते हैं। महासंघ ने दोनों व्यवस्थाओं को समाप्त कर पुरानी पेंशन लागू करने की मांग की। डॉ. गुलेरिया के अनुसार एनपीएस बाजार आधारित व्यवस्था होने के कारण कर्मचारियों की पेंशन को जोखिम और अनिश्चितता से जोड़ती है।
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महासंघ ने नीदरलैंड, तुर्की और क्रोएशिया सहित विभिन्न देशों की पेंशन व्यवस्थाओं का हवाला दिया। संगठन का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए मजबूत पेंशन व्यवस्था जरूरी है। महासंघ ने केंद्र और राज्य सरकार से कर्मचारी परिवारों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग दोहराई।
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डॉ. संजीव बोले- 30 से 35 साल सेवा करने वाले कर्मचारियों को भी सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक सुरक्षा का अधिकार
संवाद न्यूज एजेंसी
बनीखेत (चंबा)। कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर उठाया गया है। न्यू पेंशन स्कीम सेवानिवृत्त दस वर्ष से कम सेवाकाल वाले कर्मचारी-अधिकारी महासंघ हिमाचल प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजीव गुलेरिया ने केंद्र और राज्य सरकार से पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग की है।
डॉ. गुलेरिया ने कहा कि विधायकों और सांसदों को कम अवधि तक जनप्रतिनिधि रहने के बाद पेंशन का अधिकार मिलता है, जबकि 30 से 35 वर्ष तक राष्ट्र और प्रदेश की सेवा करने वाले कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक सुरक्षा से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन कोई खैरात नहीं, बल्कि सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक जीवन और सामाजिक सुरक्षा का आधार है।
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उन्होंने कहा कि कर्मचारी न्यू पेंशन स्कीम और एकीकृत पेंशन योजना को स्वीकार नहीं करते हैं। महासंघ ने दोनों व्यवस्थाओं को समाप्त कर पुरानी पेंशन लागू करने की मांग की। डॉ. गुलेरिया के अनुसार एनपीएस बाजार आधारित व्यवस्था होने के कारण कर्मचारियों की पेंशन को जोखिम और अनिश्चितता से जोड़ती है।
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महासंघ ने नीदरलैंड, तुर्की और क्रोएशिया सहित विभिन्न देशों की पेंशन व्यवस्थाओं का हवाला दिया। संगठन का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए मजबूत पेंशन व्यवस्था जरूरी है। महासंघ ने केंद्र और राज्य सरकार से कर्मचारी परिवारों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग दोहराई।