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पीएचसी पांच साल से बंद, निजी अस्पतालों में लुट रहे लोग
Chamba
Updated Tue, 28 Oct 2014 05:33 AM IST
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हिमगिरि (चंबा)। उपमंडल तीसा के हिमगिरि में चिकित्सक के तबादले का दंश यहां के ग्रामीण भुगत रहे हैं। करीब पांच साल पूर्व हुए इस तबादले के बाद चिकित्सक का पद संभालने के लिए दूसरा कोई नहीं आया और हिमगिरि के लोगों की बीमारी में इकलौता सहारा भी उनसे छिन गया। पंझेई में पीएचसी थी जो फिलहाल बंद है। इससे हिमगिरि की पांच पंचायतों के सैकड़ों लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पंचायतों के लोग इलाज के लिए तीसा या सलूणी पर निर्भर हैं।
पंझेई, चीह, बनंतर, लाहरा और हिमगिरि कोठी के लोगों को प्राथमिक इलाज के लिए भी 30 से 35 किलोमीटर का सफर कर तीसा या सलूणी का रुख करना पड़ता है। यहां के नानक, रूमी राम, हेमराज, सिंघु राम, बालकु, मान सिंह राणा, भाग सिंह, किशन राम, संगीता, विद्या और मिष्ठी का कहना है कि हिगगिरि में पीएचसी और अन्य किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य की सुविधा नहीं है। इस वजह से उन्हें बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पंझेई पंचायत की पीएचसी पिछले करीब पांच वर्षो से बंद पड़ी है। यहां स्थायी रूप से चिकित्सक की तैनाती की जानी चाहिए ताकि लोगों को सही समय पर क्षेत्र के नजदीक उपचार मिल सके। प्राइवेट क्लीनिकों में महंगी दवाइयां खरीदना उनकी मजबूरी बन गई है।
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भवन की हालत भी खस्ता
पंझेई पंचायत के पीएचसी भवन की हालत खस्ता हो चुकी है। पीएचसी पिछले पांच वर्षों से बंद पड़ी है। पीएसी में तैनात चिकित्सक का तबादला हो जाने के बाद पीएचसी में किसी भी चिकित्सक को तैनात नहीं किया गया है और तब से यह बंद पड़ी है। आसपास के लोग भवन का जरूरी सामान ले गए हैं। यहांतक कि पीएचसी भवन की खिड़कियां और दरवाजे भी उखाड़ कर ले गए हैं।
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उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. अशोक गुप्ता का कहना है कि पंझेई में पीएचसी को बहाल करने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। जिला में जहां भी चिकित्सकों के पद खाली हैं उसकी रिपोर्ट आलाधिकारियों को भेजी गई है।
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पंझेई, चीह, बनंतर, लाहरा और हिमगिरि कोठी के लोगों को प्राथमिक इलाज के लिए भी 30 से 35 किलोमीटर का सफर कर तीसा या सलूणी का रुख करना पड़ता है। यहां के नानक, रूमी राम, हेमराज, सिंघु राम, बालकु, मान सिंह राणा, भाग सिंह, किशन राम, संगीता, विद्या और मिष्ठी का कहना है कि हिगगिरि में पीएचसी और अन्य किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य की सुविधा नहीं है। इस वजह से उन्हें बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पंझेई पंचायत की पीएचसी पिछले करीब पांच वर्षो से बंद पड़ी है। यहां स्थायी रूप से चिकित्सक की तैनाती की जानी चाहिए ताकि लोगों को सही समय पर क्षेत्र के नजदीक उपचार मिल सके। प्राइवेट क्लीनिकों में महंगी दवाइयां खरीदना उनकी मजबूरी बन गई है।
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भवन की हालत भी खस्ता
पंझेई पंचायत के पीएचसी भवन की हालत खस्ता हो चुकी है। पीएचसी पिछले पांच वर्षों से बंद पड़ी है। पीएसी में तैनात चिकित्सक का तबादला हो जाने के बाद पीएचसी में किसी भी चिकित्सक को तैनात नहीं किया गया है और तब से यह बंद पड़ी है। आसपास के लोग भवन का जरूरी सामान ले गए हैं। यहांतक कि पीएचसी भवन की खिड़कियां और दरवाजे भी उखाड़ कर ले गए हैं।
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उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. अशोक गुप्ता का कहना है कि पंझेई में पीएचसी को बहाल करने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। जिला में जहां भी चिकित्सकों के पद खाली हैं उसकी रिपोर्ट आलाधिकारियों को भेजी गई है।