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जलोटी गांव में टूटा बिजली का खंभा हादसों को दे रहा न्योता
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अमर उजाला ब्यूरो
चंबा। ग्राम पंचायत दुलाड़ा के जलोटी गांव में बिजली बोर्ड की लापरवाही किसी भी समय ग्रामीणों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। इसकी वजह यह है कि यहां पिछले पांच सालों से बोर्ड ने टूटे हुए खंभे पर बिजली की तारें टांग रखी हैं। जो किसी भी समय नीचे गिर सकती हैं। ऐसा होने पर ग्रामीण और मवेशी बिजली तार की चपेट में आ सकते हैं। जहां पर यह टूटा हुआ खंभा लगा है। वहां से पंचायत के चार गांवों को रास्ता जाता है। रास्ते के बिलकुल बीच में यह खंभा बड़े हादसे को न्यौता दे रहा है। ऐसा नहीं है कि बिजली बोर्ड को इसके बारे में पता न हो। बोर्ड को टूटे हुए खंभे के बारे में पूरी जानकारी है। मगर बोर्ड टूटे हुए खंभे को बदलकर नया खंभा लगाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। यही कारण है कि ग्रामीण डर के साय में रास्ते से आवाजाही करने को मजबूर हैं। बारिश और बर्फबारी होने पर कई दिनों तक गांव की बिजली गुल हो जाती है।
ककैल, खवी, ककैल-दो समेत अन्य गांव को उपरोक्त टूटे हुए खंभे से बिजली की सप्लाई दी जा रही है। दो वर्ष पहले बोर्ड ने टूटे हुए खंभे के स्थान पर नया खंभा स्थापित करने के लिए लोहे का पोल वहां पहुंचाया था। मगर अभी तक पोल को टूटे हुए खंभे से नहीं बदला गया है। इसकी वजह से ग्रामीणों को बिजली की समस्या से जूझना पड़ रहा है। ग्रामीण नरेश कुमार, पंकज, भरत सिंह, अमित कुमार, दिनेश कुमार और करनैल सिंह ने बताया कि समय रहते बोर्ड ने टूटे हुए खंभे को नहीं बदला तो आने वाले समय में इसके भीषण परिणाम ग्रामीणों को भुगतने पड़ सकते हैं। इसकी जिम्मेवारी पूर्ण रूप से बोर्ड की होगी।
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इनसेट
बोर्ड के सहायक अभियंता दिनेश मेहता ने बताया कि उनके ध्यान में यह मामला अभी लाया गया है। कनिष्ठ अभियंता को मौके पर जाकर समस्या का समाधान करने के निर्देश दिए गए हैं। टूटे हुए खंभे को बदलकर नया खंभा स्थापित किया जाएगा।
चंबा। ग्राम पंचायत दुलाड़ा के जलोटी गांव में बिजली बोर्ड की लापरवाही किसी भी समय ग्रामीणों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। इसकी वजह यह है कि यहां पिछले पांच सालों से बोर्ड ने टूटे हुए खंभे पर बिजली की तारें टांग रखी हैं। जो किसी भी समय नीचे गिर सकती हैं। ऐसा होने पर ग्रामीण और मवेशी बिजली तार की चपेट में आ सकते हैं। जहां पर यह टूटा हुआ खंभा लगा है। वहां से पंचायत के चार गांवों को रास्ता जाता है। रास्ते के बिलकुल बीच में यह खंभा बड़े हादसे को न्यौता दे रहा है। ऐसा नहीं है कि बिजली बोर्ड को इसके बारे में पता न हो। बोर्ड को टूटे हुए खंभे के बारे में पूरी जानकारी है। मगर बोर्ड टूटे हुए खंभे को बदलकर नया खंभा लगाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। यही कारण है कि ग्रामीण डर के साय में रास्ते से आवाजाही करने को मजबूर हैं। बारिश और बर्फबारी होने पर कई दिनों तक गांव की बिजली गुल हो जाती है।
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ककैल, खवी, ककैल-दो समेत अन्य गांव को उपरोक्त टूटे हुए खंभे से बिजली की सप्लाई दी जा रही है। दो वर्ष पहले बोर्ड ने टूटे हुए खंभे के स्थान पर नया खंभा स्थापित करने के लिए लोहे का पोल वहां पहुंचाया था। मगर अभी तक पोल को टूटे हुए खंभे से नहीं बदला गया है। इसकी वजह से ग्रामीणों को बिजली की समस्या से जूझना पड़ रहा है। ग्रामीण नरेश कुमार, पंकज, भरत सिंह, अमित कुमार, दिनेश कुमार और करनैल सिंह ने बताया कि समय रहते बोर्ड ने टूटे हुए खंभे को नहीं बदला तो आने वाले समय में इसके भीषण परिणाम ग्रामीणों को भुगतने पड़ सकते हैं। इसकी जिम्मेवारी पूर्ण रूप से बोर्ड की होगी।
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बोर्ड के सहायक अभियंता दिनेश मेहता ने बताया कि उनके ध्यान में यह मामला अभी लाया गया है। कनिष्ठ अभियंता को मौके पर जाकर समस्या का समाधान करने के निर्देश दिए गए हैं। टूटे हुए खंभे को बदलकर नया खंभा स्थापित किया जाएगा।