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झोली में डालीं चार सीटें, फिर भी चंबा के हाथ खाली
Updated Wed, 27 Dec 2017 11:10 PM IST
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- फोटो : demo pic
सुभाष कुमार अग्निहोत्री
चंबा। पहली बार इतिहास बनाकर भाजपा की झोली में चार सीटें डालने वाली चंबा जिले के हाथ बुधवार को हुए शपथ ग्रहण समारोह में खाली रह गए। जनता को उम्मीद थी कि जिले से मिले प्रचंड सीटों को देखते हुुए इस बार प्रदेश की भाजपा सरकार में जिले के किसी नेता को मंत्री का पद जरूर मिलेगा। इसको लेकर लोगों को और खासकर भाजपा के कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह भी था। लोग सुबह से ही टीवी के सामने डटे हुए थे ताकि मंत्री मिलने की घोषणा के साथ ही वह इसका जश्न भी मना सके। मगर मंत्रि परिषद की सूची जारी होने के बाद जिले की जनता को निराशा ही हाथ लगी। एक तरफ जहां लोगों में इसकी निराशा साफ झलक रही है तो वहीं नेताओं के समर्थक भी मंत्री पद न मिलने से दुखी हैं।
गौरतलब हैै कि वर्ष 2012 के चुनावों में जिला के पांच विस क्षेत्रों में कांग्रेस दो ही सीटें जीत पाई थी। इसके बावजूद कांग्रेस ने भरमौर से ठाकुर सिंह भरमौरी को वन मंत्री बनाया था। वर्ष 2007 के चुनावों में भाजपा ने यहां तीन सीटें जीतने में सफलता हासिल की थी। इसमें भरमौर से जीत हासिल करने वाले भाजपा प्रत्याशी तुलसी राम शर्मा को विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया था। इसके अलावा वर्ष 2003 के विस चुनावों में चंबा सदर से जीत हासिल करने वाले कांग्रेस उम्मीदवार हर्ष महाजन को पशुपालन मंत्री बनाया गया था। वर्ष 1998 में राजनगर विस क्षेत्र (वर्तमान में चुराह) से बीजेेपी विधायक मोहन लाल को आयुर्वेद मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वहीं वर्ष 1993 से 1998 तक आशा कुमारी बनीखेत (वर्तमान में डलहौजी) से चुनाव जीतने के बाद प्राथमिक शिक्षा मंत्री रहीं है। आशा कुमारी वर्ष 2003 से 2005 तक शिक्षा मंत्री रही। वर्ष 1983 में कांग्रेस सीट पर चुनाव जीतने वाले सागर चंद नैयर को भी शिक्षा मंत्री के रूप में मंत्रिमंडल में स्थान मिला था। वर्ष 2017 के चुनावों में जिला के पांच विस क्षेत्रों में से चार में भाजपा काबिज हुई है। बावजूद भाजपा को प्रचंड रूप से पांच में से चार सीटें जीतने के बाद भी जिले के हाथ खाली ही रह गए हैं।
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चंबा। पहली बार इतिहास बनाकर भाजपा की झोली में चार सीटें डालने वाली चंबा जिले के हाथ बुधवार को हुए शपथ ग्रहण समारोह में खाली रह गए। जनता को उम्मीद थी कि जिले से मिले प्रचंड सीटों को देखते हुुए इस बार प्रदेश की भाजपा सरकार में जिले के किसी नेता को मंत्री का पद जरूर मिलेगा। इसको लेकर लोगों को और खासकर भाजपा के कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह भी था। लोग सुबह से ही टीवी के सामने डटे हुए थे ताकि मंत्री मिलने की घोषणा के साथ ही वह इसका जश्न भी मना सके। मगर मंत्रि परिषद की सूची जारी होने के बाद जिले की जनता को निराशा ही हाथ लगी। एक तरफ जहां लोगों में इसकी निराशा साफ झलक रही है तो वहीं नेताओं के समर्थक भी मंत्री पद न मिलने से दुखी हैं।
गौरतलब हैै कि वर्ष 2012 के चुनावों में जिला के पांच विस क्षेत्रों में कांग्रेस दो ही सीटें जीत पाई थी। इसके बावजूद कांग्रेस ने भरमौर से ठाकुर सिंह भरमौरी को वन मंत्री बनाया था। वर्ष 2007 के चुनावों में भाजपा ने यहां तीन सीटें जीतने में सफलता हासिल की थी। इसमें भरमौर से जीत हासिल करने वाले भाजपा प्रत्याशी तुलसी राम शर्मा को विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया था। इसके अलावा वर्ष 2003 के विस चुनावों में चंबा सदर से जीत हासिल करने वाले कांग्रेस उम्मीदवार हर्ष महाजन को पशुपालन मंत्री बनाया गया था। वर्ष 1998 में राजनगर विस क्षेत्र (वर्तमान में चुराह) से बीजेेपी विधायक मोहन लाल को आयुर्वेद मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वहीं वर्ष 1993 से 1998 तक आशा कुमारी बनीखेत (वर्तमान में डलहौजी) से चुनाव जीतने के बाद प्राथमिक शिक्षा मंत्री रहीं है। आशा कुमारी वर्ष 2003 से 2005 तक शिक्षा मंत्री रही। वर्ष 1983 में कांग्रेस सीट पर चुनाव जीतने वाले सागर चंद नैयर को भी शिक्षा मंत्री के रूप में मंत्रिमंडल में स्थान मिला था। वर्ष 2017 के चुनावों में जिला के पांच विस क्षेत्रों में से चार में भाजपा काबिज हुई है। बावजूद भाजपा को प्रचंड रूप से पांच में से चार सीटें जीतने के बाद भी जिले के हाथ खाली ही रह गए हैं।
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