मणिमहेश जाने वाला रास्ता भूस्खलन ढहा, यात्रा पर संकट
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अमर उजाला ब्यूरो
भरमौर (चंबा)। हड़सर से मणिमहेश जाने वाला पैदल रास्ता भूस्खलन की चपेट में आने से ढह गया है। इससे अगस्त माह में शुरू होने वाली मणिमहेश यात्रा पर भी संकट के बादल मंडरा गए हैं। वहीं भूस्खलन की जद में आने से हड़सर पंचायत का चेतना भवन धराशायी हो गया। जबकि भूस्खलन की वजह से सुप्पा के पास स्थित जलधार मंदिर, तीन घरों और महंत की कुटिया पर भी खतरा मंडरा रहा है। समय रहते भूस्खलन से इन्हें नहीं बचाया गया तो यहां भारी नुकसान हो सकता है।
लोगों में रोष इस बात का है कि अभी तक घटनास्थल पर प्रशासन की ओर से कोई नहीं पहुंचा है। वहीं मणिमहेश यात्रा से पहले क्षतिग्रस्त रास्ते के स्थान पर वैकल्पिक रास्ता नहीं बनाया गया, तो यात्रा में देश विदेश सहित प्रदेश के विभिन्न राज्यों से आने वाले लाखा श्रद्धालुओं को दिक्कत झेलनी पड़ सकती है। इसकी वजह यह है कि हड़सर से ही लाखों यात्री मणिमहेश के दर्जन लिए जाते हैं।
तीन दिन से हड़सर-कुगति मार्ग बाधित
इस स्थान पर तीन दिन से रुक-रुक कर भूस्खलन हो रहा है। इसकी वजह से तीन दिनों से भरमौर-हड़सर-कुगति मार्ग वाहनों के लिए पूरी तरह से बंद पड़ा है। इससे कुगति क्षेत्र को जाने वाले लोगों को पैदल ही सफर तय करना पड़ रहा है। वहीं कुगति कार्तिक स्वामी मंदिर के दर्शन को गए श्रद्धालुओं के आधा दर्जन वाहन भी यहां पर फंसे हुए हैं।
मार्ग अवरुद्ध होने की वजह से श्रद्धालु वाहनों को नहीं निकाल पा रहे हैं। हड़सर पंचायत प्रधान अंजू देवी और पूर्व बीडीसी सदस्य पवन शर्मा ने बताया कि भूस्खलन की सूचना प्रशासन को समय पर दे दी गई थी। मगर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई अधिकारी नहीं पहुंचा है। लोनिवि के कर्मचारी कुगति मार्ग को खोलने के लिए जरूर दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि मणिमहेश को जाने वाले पैदल रास्ते में सीमेंट स्प्रे या क्रेट वर्क करने की आवश्यकता है। इसके लिए प्रशासन को प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
एसडीएम भरमौर पृथीपाल सिंह ने बताया कि वस्तुस्थिति का जायजा लेने के लिए वह मौके पर जाएंगे। उन्होंने कहा कि जो जरूरी निर्देश होंगे वह लोनिवि के अधिकारियों को जारी किए जाएंगे। ताकि, आगामी समय में आरंभ होने वाली मणिमहेश यात्रा में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो सके।