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कुदाली से खुद रास्ता बनाकर ढांक से स्कूल जाने को मजबूर स्कूली बच्चे
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अमर उजाला ब्यूरो
साहो (चंबा)। ग्राम पंचायत बरौर के चार गांवों में रहने वाले स्कूली छात्र-छात्राएं हर रोज जान जोखिम में डालकर स्कूल में पढ़ने के लिए जाने को मजबूर हैं। हालत यह है कि स्कूल को जाने वाला रास्ता भूस्खलन की जद में आने से जमींदोज हो गया है। ऐसे में बच्चे खड़ी ढलान में कुदाली से
पगडंडी बनाकर स्कूल पहुंचते हैं। यहां हालात ऐसे हैं कि किसी भी समय बच्चे हादसे का शिकार हो सकते हैं। हैरानी इस बात की है कि प्रशासन और विभाग की ओर से अभी तक कोई भी कार्रवाई देखने को नहीं मिली है।
ग्रामीण अब्दुल्ला, गुलाम नवी, परमीर, हनीफ, काशम मोहम्मद, महरदीन, माम हुसैन, ओम प्रकाश और शक्ति प्रसाद ने बताया कि सात दिन पहले भूस्खलन होने से अंदरालू से चमेरा पैदल रास्ता भूस्खलन की जद में आने से ढह गया। इस कारण चमीनू, अंदरालू, चमेरी-एक और दो गांव में रहने वाले तीस परिवारों का संपर्क टूट गया। इस वजह से स्कूली बच्चे चार दिन तक स्कूल नहीं गए। सोमवार को छात्रों ने खुद रास्ता बनाकर स्कूल जाने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि छात्रों ने जहां पर पगडंडी बनाई है, उसके नीचे का भाग भी भूस्खलन की चपेट में आने वाला है। इसलिए यह रास्ता किसी भी दृष्टि से सुरक्षित नहीं है। लोगों ने जिला प्रशासन और बीडीओ से गुहार लगाई है कि उपरोक्त पंचायत में क्षतिग्रस्त रास्ते का जल्द निर्माण करवाया जाए। पंचायत प्रधान हनीफ ने बताया कि भूस्खलन से रास्ता क्षतिग्रस्त हो गया है। इसको लेकर वह जल्द ही डीसी चंबा से मिलेंगे। बीडीओ चंबा सुशील शर्मा ने बताया कि ग्रामीणों ने उन्हें रास्ता क्षतिग्रस्त होने की सूचना दी है। क्षतिग्रस्त रास्ते का निर्माण मनरेगा के तहत करवाया जाएगा। उन्होंने ग्रामीणों को एहतियात बरतने की सलाह दी है।
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साहो (चंबा)। ग्राम पंचायत बरौर के चार गांवों में रहने वाले स्कूली छात्र-छात्राएं हर रोज जान जोखिम में डालकर स्कूल में पढ़ने के लिए जाने को मजबूर हैं। हालत यह है कि स्कूल को जाने वाला रास्ता भूस्खलन की जद में आने से जमींदोज हो गया है। ऐसे में बच्चे खड़ी ढलान में कुदाली से
पगडंडी बनाकर स्कूल पहुंचते हैं। यहां हालात ऐसे हैं कि किसी भी समय बच्चे हादसे का शिकार हो सकते हैं। हैरानी इस बात की है कि प्रशासन और विभाग की ओर से अभी तक कोई भी कार्रवाई देखने को नहीं मिली है।
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ग्रामीण अब्दुल्ला, गुलाम नवी, परमीर, हनीफ, काशम मोहम्मद, महरदीन, माम हुसैन, ओम प्रकाश और शक्ति प्रसाद ने बताया कि सात दिन पहले भूस्खलन होने से अंदरालू से चमेरा पैदल रास्ता भूस्खलन की जद में आने से ढह गया। इस कारण चमीनू, अंदरालू, चमेरी-एक और दो गांव में रहने वाले तीस परिवारों का संपर्क टूट गया। इस वजह से स्कूली बच्चे चार दिन तक स्कूल नहीं गए। सोमवार को छात्रों ने खुद रास्ता बनाकर स्कूल जाने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि छात्रों ने जहां पर पगडंडी बनाई है, उसके नीचे का भाग भी भूस्खलन की चपेट में आने वाला है। इसलिए यह रास्ता किसी भी दृष्टि से सुरक्षित नहीं है। लोगों ने जिला प्रशासन और बीडीओ से गुहार लगाई है कि उपरोक्त पंचायत में क्षतिग्रस्त रास्ते का जल्द निर्माण करवाया जाए। पंचायत प्रधान हनीफ ने बताया कि भूस्खलन से रास्ता क्षतिग्रस्त हो गया है। इसको लेकर वह जल्द ही डीसी चंबा से मिलेंगे। बीडीओ चंबा सुशील शर्मा ने बताया कि ग्रामीणों ने उन्हें रास्ता क्षतिग्रस्त होने की सूचना दी है। क्षतिग्रस्त रास्ते का निर्माण मनरेगा के तहत करवाया जाएगा। उन्होंने ग्रामीणों को एहतियात बरतने की सलाह दी है।
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