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स्मार्ट कार्ड धारक मरीज से वसूले तीस हजार
Updated Thu, 25 Oct 2018 10:28 PM IST
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चंबा। स्वामी हरीगिरी अस्पताल ककिरा में स्मार्ट कार्ड धारक मरीज से इलाज की एवज में तीस हजार रुपये ऐंठने का मामला सामने आया है। इसको लेकर मरीज ने जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पास लिखित में शिकायत दी है। शिकायत के आधार पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने चंबा से तीन सदस्यीय टीम को जांच करने के लिए स्वामी हरीगिरी अस्पताल ककिरा भेजा है। जहां पर विभागीय टीम मामले की जांच करेगी। खामी सामने आने पर विभाग की ओर से अस्पताल प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उपरोक्त अस्पताल स्मार्ट कार्ड योजना से जुड़ा हुआ है।
स्मार्ट कार्ड धारक सुनील कुमार पत्थरी का उपचार करवाने के लिए 20 सितंबर को उपरोक्त अस्पताल में गया। डॉक्टरों ने ऑपरेशन करने की बात कही। ऑपरेशन के लिए 16 हजार रुपये जमा करवाने को कहा। सुनील कुमार ने कहा कि उसके पास राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत स्मार्ट कार्ड बना है। लेकिन, अस्पताल प्रबंधन ने स्मार्ट कार्ड पर उसका उपचार करने से मना कर दिया। मरीज ने उधार लेकर ऑपरेशन के लिए पैसे जुटाए। ऑपरेशन के बाद पांच दिनों तक उसे अस्पताल में रखा गया। करीब 14 हजार रुपये दवाइयों का खर्चा आया। पांच दिन बाद जब वह अस्पताल से डिस्चार्ज हुआ तो ऑपरेशन व दवाइयों का का तीस हजार रुपये का बिल थमाया गया। इस बिल को मरीज को मजबूरन भरना पड़ा।
केंद्र व प्रदेश सरकार ने गरीबों को मुफ्त स्वास्थ्य लाभ देने के लिए आयुष्मान व स्वास्थ्य बीमा योजना चलाई हैं। लेकिन धरातल पर इन योजनाओं का गरीबों को लाभ नहीं मिल रहा है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि निजी अस्पताल ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में मरीजों को इन योजनाओं का लाभ नहीं दे रहे हैं। फिलहाल मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच बिठा दी है।
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हरीगिरी अस्पताल ककिरा के प्रभारी आरसी राणा ने बताया कि जिस दिन सुनील कुमार नामक मरीज का ऑपरेशन हुआ। उस दिन स्मार्ट कार्ड सिस्टम खराब था। इसकी वजह से मरीज को उन्होंने टांडा या चंबा मेडिकल कॉलेज जाने को कहा। लेकिन, मरीज ने स्वयं पेमेंट पर इलाज करवाने की हामी भरी। इसमें अस्पताल प्रबंधन की कोई गलती नहीं है।
जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर वाईडी शर्मा ने बताया कि उनके ध्यान में उपरोक्त मामला आया है। इसकी जांच को लेकर विभागीय टीम अस्पताल में भेजी गई है। टीम की रिपोर्ट आने पर आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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स्मार्ट कार्ड धारक सुनील कुमार पत्थरी का उपचार करवाने के लिए 20 सितंबर को उपरोक्त अस्पताल में गया। डॉक्टरों ने ऑपरेशन करने की बात कही। ऑपरेशन के लिए 16 हजार रुपये जमा करवाने को कहा। सुनील कुमार ने कहा कि उसके पास राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत स्मार्ट कार्ड बना है। लेकिन, अस्पताल प्रबंधन ने स्मार्ट कार्ड पर उसका उपचार करने से मना कर दिया। मरीज ने उधार लेकर ऑपरेशन के लिए पैसे जुटाए। ऑपरेशन के बाद पांच दिनों तक उसे अस्पताल में रखा गया। करीब 14 हजार रुपये दवाइयों का खर्चा आया। पांच दिन बाद जब वह अस्पताल से डिस्चार्ज हुआ तो ऑपरेशन व दवाइयों का का तीस हजार रुपये का बिल थमाया गया। इस बिल को मरीज को मजबूरन भरना पड़ा।
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केंद्र व प्रदेश सरकार ने गरीबों को मुफ्त स्वास्थ्य लाभ देने के लिए आयुष्मान व स्वास्थ्य बीमा योजना चलाई हैं। लेकिन धरातल पर इन योजनाओं का गरीबों को लाभ नहीं मिल रहा है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि निजी अस्पताल ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में मरीजों को इन योजनाओं का लाभ नहीं दे रहे हैं। फिलहाल मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच बिठा दी है।
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हरीगिरी अस्पताल ककिरा के प्रभारी आरसी राणा ने बताया कि जिस दिन सुनील कुमार नामक मरीज का ऑपरेशन हुआ। उस दिन स्मार्ट कार्ड सिस्टम खराब था। इसकी वजह से मरीज को उन्होंने टांडा या चंबा मेडिकल कॉलेज जाने को कहा। लेकिन, मरीज ने स्वयं पेमेंट पर इलाज करवाने की हामी भरी। इसमें अस्पताल प्रबंधन की कोई गलती नहीं है।
जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर वाईडी शर्मा ने बताया कि उनके ध्यान में उपरोक्त मामला आया है। इसकी जांच को लेकर विभागीय टीम अस्पताल में भेजी गई है। टीम की रिपोर्ट आने पर आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।