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खेतों की बाड़बंदी के लिए आवेदन नहीं कर रहे किसान, विभाग ने लौटाए 30 लाख
Updated Wed, 13 Dec 2017 10:15 PM IST
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पंकज सलारिया
चंबा। किसानों की फसलों को इलैक्ट्रिक बाड़बंदी से सुरक्षित रखने की प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना चंबा जिले में दम तोड़ती जा रही है। इसकी वजह यह है कि सरकार के 80 फीसदी अनुदान देने के बावजूद किसान इस योजना के लिए आवेदन नहीं कर रहे हैं। इस वर्ष जिला भरे में योजना के तहत अब तक महज सात आवेदन आए हैं। इस वजह से मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना के तहत जिला चंबा को मिले एक करोड़ की राशि में से तीस लाख रुपये कृषि विभाग ने वापिस भेजने का फैसला किया है। सरकार के जागरूकता अभियानों के बावजूद इस योजना के तहत खेतों की बाड़बंदी करवाने के लिए किसान आगे नहीं आ रहे हैं। इसको देखते हुए कृषि विभाग ने योजना के तहत मिली राशि को वापस भेजने का फैसला लिया है। योजना के तहत किसानों को खेतों के संरक्षण के लिए इलैक्ट्रिक बाड़ लगाने के लिए बाकायदा सब्सिडी का प्रावधान है। इस योजना के जरिये किसान अपनी फसल को जंगली, बेसहारा जानवरों और खासकर बंदरों से बचा सकते हैं। सरकार इस योजना के तहत 80 फीसदी की सब्सिडी दे रहा है। इसमें सिर्फ बीस फीसदी पैसा ही किसान को खर्च करना होता है। बावजूद इसके किसानों का इस योजना के लिए आवेदन न करना हैरान करने वाला है। इससे साफ है कि कृषि विभाग किसानों को इस योजना के फायदा बताने में नाकामयाब रहा है। इस साल विभाग के लिए मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना के तहत एक करोड़ रुपये का बजट जारी हुआ था। इसमें कृषि विभाग चंबा को साठ लाख और पांगी व भरमौर को बीस-बीस लाख रुपये का प्रावधान जारी किए हैं।
इस वर्ष सरकार दे रही 80 फीसदी सब्सिडी
कृषि विभाग के मुताबिक पिछले साल योजना के तहत अनुदान राशि साठ प्रतिशत थी। मगर किसानों ने इलैक्ट्रिक बाड़ लगाने को लेकर आवेदन नहीं किए। ऐसे में सरकार ने इस साल सब्सिडी को साठ प्रतिशत से बढ़ाकर अस्सी प्रतिशत कर दिया। सरकार को यह उम्मीद थी कि सब्सिडी बढ़ने के बाद किसान इस योजना का लाभ उठाएंगे। मगर सब्सिडी बढ़ने के बाद भी किसान इस योजना से दूरी बढ़ा रहे हैं। ऐसे में साफ है कि या तो कृषि विभाग किसानों को जागरूक करने में विफल रहा है या फिर किसान इसकी प्रक्रिया से ही अनभिज्ञ हैं। यही वजह है कि लावारिस पशुओं और बंदरों से परेशान हो चुके किसान इस योजना के तहत आवेदन नहीं कर रहे हैं।
खेत संरक्षण योजना के लिए ऐसे करेें आवेदन
इनसेट
इस योजना से लाभान्वित होने के लिए पहले किसान को एक सादे कागज में प्रार्थना पत्र नजदीकी कृषि कार्यालय में देना होता है। इसके बाद विभाग की ओर से एक कर्मचारी जमीन का एस्टीमेट लगाएगा। इसके बाद किसान अपनी बीस प्रतिशत राशि जमा करवाएगा। इसके बाद कंपनी खेतों में जाकर इलैक्ट्रिक बाड़ बंदी करवाएगी।
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तीख लाख रुपये वापिस भेजें : दया कटोच
कृषि विभाग उपनिदेशक दया कटोच ने बताया कि विभाग को खेत संरक्षण योजना के तहत मिले एक करोड़ की राशि में तीस लाख रुपये वापिस भेज दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि अब चंबा कार्यालय में योजना के तहत तीस लाख रुपये हैं। जबकि भरमौर और पांगी का बजट बीस-बीस लाख रुपये ही है।
चंबा। किसानों की फसलों को इलैक्ट्रिक बाड़बंदी से सुरक्षित रखने की प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना चंबा जिले में दम तोड़ती जा रही है। इसकी वजह यह है कि सरकार के 80 फीसदी अनुदान देने के बावजूद किसान इस योजना के लिए आवेदन नहीं कर रहे हैं। इस वर्ष जिला भरे में योजना के तहत अब तक महज सात आवेदन आए हैं। इस वजह से मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना के तहत जिला चंबा को मिले एक करोड़ की राशि में से तीस लाख रुपये कृषि विभाग ने वापिस भेजने का फैसला किया है। सरकार के जागरूकता अभियानों के बावजूद इस योजना के तहत खेतों की बाड़बंदी करवाने के लिए किसान आगे नहीं आ रहे हैं। इसको देखते हुए कृषि विभाग ने योजना के तहत मिली राशि को वापस भेजने का फैसला लिया है। योजना के तहत किसानों को खेतों के संरक्षण के लिए इलैक्ट्रिक बाड़ लगाने के लिए बाकायदा सब्सिडी का प्रावधान है। इस योजना के जरिये किसान अपनी फसल को जंगली, बेसहारा जानवरों और खासकर बंदरों से बचा सकते हैं। सरकार इस योजना के तहत 80 फीसदी की सब्सिडी दे रहा है। इसमें सिर्फ बीस फीसदी पैसा ही किसान को खर्च करना होता है। बावजूद इसके किसानों का इस योजना के लिए आवेदन न करना हैरान करने वाला है। इससे साफ है कि कृषि विभाग किसानों को इस योजना के फायदा बताने में नाकामयाब रहा है। इस साल विभाग के लिए मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना के तहत एक करोड़ रुपये का बजट जारी हुआ था। इसमें कृषि विभाग चंबा को साठ लाख और पांगी व भरमौर को बीस-बीस लाख रुपये का प्रावधान जारी किए हैं।
इस वर्ष सरकार दे रही 80 फीसदी सब्सिडी
कृषि विभाग के मुताबिक पिछले साल योजना के तहत अनुदान राशि साठ प्रतिशत थी। मगर किसानों ने इलैक्ट्रिक बाड़ लगाने को लेकर आवेदन नहीं किए। ऐसे में सरकार ने इस साल सब्सिडी को साठ प्रतिशत से बढ़ाकर अस्सी प्रतिशत कर दिया। सरकार को यह उम्मीद थी कि सब्सिडी बढ़ने के बाद किसान इस योजना का लाभ उठाएंगे। मगर सब्सिडी बढ़ने के बाद भी किसान इस योजना से दूरी बढ़ा रहे हैं। ऐसे में साफ है कि या तो कृषि विभाग किसानों को जागरूक करने में विफल रहा है या फिर किसान इसकी प्रक्रिया से ही अनभिज्ञ हैं। यही वजह है कि लावारिस पशुओं और बंदरों से परेशान हो चुके किसान इस योजना के तहत आवेदन नहीं कर रहे हैं।
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खेत संरक्षण योजना के लिए ऐसे करेें आवेदन
इनसेट
इस योजना से लाभान्वित होने के लिए पहले किसान को एक सादे कागज में प्रार्थना पत्र नजदीकी कृषि कार्यालय में देना होता है। इसके बाद विभाग की ओर से एक कर्मचारी जमीन का एस्टीमेट लगाएगा। इसके बाद किसान अपनी बीस प्रतिशत राशि जमा करवाएगा। इसके बाद कंपनी खेतों में जाकर इलैक्ट्रिक बाड़ बंदी करवाएगी।
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तीख लाख रुपये वापिस भेजें : दया कटोच
कृषि विभाग उपनिदेशक दया कटोच ने बताया कि विभाग को खेत संरक्षण योजना के तहत मिले एक करोड़ की राशि में तीस लाख रुपये वापिस भेज दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि अब चंबा कार्यालय में योजना के तहत तीस लाख रुपये हैं। जबकि भरमौर और पांगी का बजट बीस-बीस लाख रुपये ही है।