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न्यूजीलैंड से आए विशेषज्ञों ने दिए बागवानी के टिप्स
Updated Wed, 14 Feb 2018 09:52 PM IST
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तीसा (चंबा)। विश्व बैंक की ओर से तीसा में बागवानी पर आधारित कार्यशाला करवाई गई। इसमें बागवानी विभाग के अधिकारियों और उन्नत बागवानों ने भाग लिया। कार्यशाला में न्यूजीलैंड की सात सदस्यीय टीम ने कोआपरेटिव सोसायटी तीसा में फलों के उत्पादन बढ़ाने और उनकी गुणवत्ता सुधारने के लिए न्यूजीलैंड की तकनीकों को साझा किया। इस दौरान सेब के बगीचों के रखरखाव और पौधों की कांट-छांट पर भी बागवानों व अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला में तीसा और सलूणी के तकरीबन चार सौ बागवान व अधिकारी मौजूद रहे।
दोपहर बाद इन सलाहकारों ने स्टेट कोआपरेटिव सोसायटी भंजराड़ू स्थित बाग में सेब के पौधों की कांट-छांट का प्रशिक्षण प्रदान किया। इस दौरान विदेशी सलाहकारों ने कई विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की। इसमें बगीचों में सूर्य के प्रकाश की महत्ता और इसके कारण गुणात्मक व अधिक फसल लेने के तरीके बताए गए। बगीचों के लिए भूमि का चयन करने के लिए किन पहलुओं पर ध्यान देना आवश्यक है और उनका उपचार कैसे किया जाता है, पर भी जागरूक किया गया। साथ ही चुराह के विभिन्न इलाकों चांजू, बैरागढ़, झज्जा कोठी के किसानों ने दो सालों से सेब की फसल न होने के बारे में विशेषज्ञों को बताया। विशेषज्ञों ने बताया कि चुराह के किसानों को बदलते मौसम के साथ साथ हाइब्रिड पौधे लगाने की जरूरत है।
कोआपरेटिव सोसायटी भंजराड़ू के मुख्य सलाहकार ओपी शर्मा और अलक्ष पठानिया ने बागवानों को बताया कि सोसायटी 75 प्रतिशत सब्सिडी पर सेब के पौधे उपलब्ध करवा रही है। कार्यक्रम में न्यूजीलैंड के सलाहकार डॉ. डेविड मन्कटेलोव, डॉ. जिन बॉकर, डॉ. रशमीकांत, डॉ. कैन ब्रीन, जैक हयूग्स और परियोजना सलाहकार डॉ. माइक नैलसन आदि मौजूद रहे।
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दोपहर बाद इन सलाहकारों ने स्टेट कोआपरेटिव सोसायटी भंजराड़ू स्थित बाग में सेब के पौधों की कांट-छांट का प्रशिक्षण प्रदान किया। इस दौरान विदेशी सलाहकारों ने कई विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की। इसमें बगीचों में सूर्य के प्रकाश की महत्ता और इसके कारण गुणात्मक व अधिक फसल लेने के तरीके बताए गए। बगीचों के लिए भूमि का चयन करने के लिए किन पहलुओं पर ध्यान देना आवश्यक है और उनका उपचार कैसे किया जाता है, पर भी जागरूक किया गया। साथ ही चुराह के विभिन्न इलाकों चांजू, बैरागढ़, झज्जा कोठी के किसानों ने दो सालों से सेब की फसल न होने के बारे में विशेषज्ञों को बताया। विशेषज्ञों ने बताया कि चुराह के किसानों को बदलते मौसम के साथ साथ हाइब्रिड पौधे लगाने की जरूरत है।
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कोआपरेटिव सोसायटी भंजराड़ू के मुख्य सलाहकार ओपी शर्मा और अलक्ष पठानिया ने बागवानों को बताया कि सोसायटी 75 प्रतिशत सब्सिडी पर सेब के पौधे उपलब्ध करवा रही है। कार्यक्रम में न्यूजीलैंड के सलाहकार डॉ. डेविड मन्कटेलोव, डॉ. जिन बॉकर, डॉ. रशमीकांत, डॉ. कैन ब्रीन, जैक हयूग्स और परियोजना सलाहकार डॉ. माइक नैलसन आदि मौजूद रहे।
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