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गोवंश के गोबर से बनी पूजा सामग्री को मिले बढ़ावा : परिषद ने आयोग को सौंपा ज्ञापन
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पदाधिकारियों ने गोशालाओं को तकनीकी व वित्तीय सहयोग की रखी मांग
प्रमुख मंदिरों में बिक्री केंद्र खोलने का भी आयोग को दिया सुझाव
ग्रामीणों को मिलेगा रोजगार, बेसहारा गोवंश की स्थिति भी सुधरेगी
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। भारतीय गोवंश रक्षण संवर्धन परिषद की हिमाचल इकाई ने प्रदेश में हिमाचली पहाड़ी नस्ल की गायों के गोबर से निर्मित पूजा सामग्री को बढ़ावा देने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने हिमाचल प्रदेश गोसेवा आयोग के सदस्य सचिव डॉ. संजीव धीमान को ज्ञापन सौंपकर इस दिशा में नीति तैयार करने का आग्रह किया।
प्रतिनिधिमंडल में परिषद के पदाधिकारी राम ऋषि भारद्वाज, रती राम शर्मा, राजेंद्र भारद्वाज और अनिल सरस्वती शामिल रहे। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा के अनुसार स्वदेशी गायों के गोबर से निर्मित धूप, समिधा व हवन सामग्री आदि का धार्मिक अनुष्ठानों में विशेष महत्व है। हिमाचल में कुछ गोशालाएं इस दिशा में सीमित स्तर पर काम कर रही हैं, लेकिन तकनीकी और वित्तीय सहायता के अभाव में ये प्रयास व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहे हैं। परिषद ने मांग की कि गोशालाओं के साथ-साथ महिला व युवक मंडलों को आसान ऋण और तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाए। साथ ही इन उत्पादों के प्रचार-प्रसार और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सरकार विशेष कार्यक्रम और नीतियां बनाए। उन्होंने प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में भी इन उत्पादों के बिक्री केंद्र खोलने की आवश्यकता बताई, जिससे एक ओर ग्रामीण युवाओं को रोजगार मिलेगा और दूसरी ओर बेसहारा गोवंश की समस्या का भी समाधान हो सकेगा। सदस्य सचिव डॉ. संजीव धीमान ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि परिषद की मांगों पर हर संभव उचित कार्रवाई की जाएगी। वहीं, प्रांत गो रक्षा प्रमुख अश्विनी कपिल ने भी गोशालाओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार व आयोग से हर संभव सहायता देने की मांग की है।
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प्रमुख मंदिरों में बिक्री केंद्र खोलने का भी आयोग को दिया सुझाव
ग्रामीणों को मिलेगा रोजगार, बेसहारा गोवंश की स्थिति भी सुधरेगी
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। भारतीय गोवंश रक्षण संवर्धन परिषद की हिमाचल इकाई ने प्रदेश में हिमाचली पहाड़ी नस्ल की गायों के गोबर से निर्मित पूजा सामग्री को बढ़ावा देने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने हिमाचल प्रदेश गोसेवा आयोग के सदस्य सचिव डॉ. संजीव धीमान को ज्ञापन सौंपकर इस दिशा में नीति तैयार करने का आग्रह किया।
प्रतिनिधिमंडल में परिषद के पदाधिकारी राम ऋषि भारद्वाज, रती राम शर्मा, राजेंद्र भारद्वाज और अनिल सरस्वती शामिल रहे। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा के अनुसार स्वदेशी गायों के गोबर से निर्मित धूप, समिधा व हवन सामग्री आदि का धार्मिक अनुष्ठानों में विशेष महत्व है। हिमाचल में कुछ गोशालाएं इस दिशा में सीमित स्तर पर काम कर रही हैं, लेकिन तकनीकी और वित्तीय सहायता के अभाव में ये प्रयास व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहे हैं। परिषद ने मांग की कि गोशालाओं के साथ-साथ महिला व युवक मंडलों को आसान ऋण और तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाए। साथ ही इन उत्पादों के प्रचार-प्रसार और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सरकार विशेष कार्यक्रम और नीतियां बनाए। उन्होंने प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में भी इन उत्पादों के बिक्री केंद्र खोलने की आवश्यकता बताई, जिससे एक ओर ग्रामीण युवाओं को रोजगार मिलेगा और दूसरी ओर बेसहारा गोवंश की समस्या का भी समाधान हो सकेगा। सदस्य सचिव डॉ. संजीव धीमान ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि परिषद की मांगों पर हर संभव उचित कार्रवाई की जाएगी। वहीं, प्रांत गो रक्षा प्रमुख अश्विनी कपिल ने भी गोशालाओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार व आयोग से हर संभव सहायता देने की मांग की है।
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