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चहेते ठेकेदारों को दिया जा रहा काम : जम्वाल
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- काम देने में अनुभवी और योग्य ठेकेदारों को किया जा रहा दरकिनार
- कांग्रेस नेताओं काम देने के दबाव में हो रही सड़कों की बहाली में देरी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भाजपा विधायक त्रिलोक जम्वाल ने भारी बारिश से बंद सड़कों की बहाली में हो रही देरी को लेकर प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि भूस्खलन और मलबा गिरने से ग्रामीण इलाकों की कई सड़कें अभी भी बंद हैं। इसकी वजह से आपदा प्रभावितों के साथ ही अन्य लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि अनुभवी और योग्य ठेकेदारों को दरकिनार करके सड़कों की बहाली का ज्यादातर काम राजनीतिक दबाव में कांग्रेस से जुड़े ठेकेदारों को देना इसका मुख्य कारण है। काम सही ढंग से पूरा करने के बजाय वह अपनी जेबें भरने को प्राथमिकता दे रहे हैं। इस बार जोरदार बारिश की वजह से जहां कई लोग बेघर हुए हैं, वहीं सड़कों को भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। ग्रामीण इलाकों की ज्यादातर सड़कें बंद होने के कारण राहत कार्य प्रभावित हो रहे हैं। न तो समय रहते लोगों तक राहत पहुंच पा रही है और न ही क्षतिग्रस्त पेयजल योजनाओं और बिजली की लाइनों आदि की मरम्मत के लिए जरूरी सामग्री वहां तक पहुंच रही है। इसकी वजह से लोगों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। किसी भी तरह का जरूरी सामान अपने घरों तक पहुंचाने के लिए उनका लेबर खर्च भी बढ़ गया है। कई गांवों से स्कूल-कॉलेज के बच्चों, नौकरीपेशा और अन्य लोगों को अपने गंतव्य पर पहुंचने के लिए मीलों दूरी पैदल तय करनी पड़ रही है।
जम्वाल ने कहा कि आपदा प्रभावितों को तुरंत राहत प्रदान करने के साथ ही बंद सड़कों की बहाली का काम युद्ध स्तर पर किया जाना चाहिए, लेकिन सत्ता पक्ष के नेता अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए आपदा की इस घड़ी में भी अवसर तलाश रहे हैं। अनुभव और योग्यता को दरकिनार करके मलबा हटाने से लेकर क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और पुनर्निर्माण जैसे ज्यादातर कार्य राजनीतिक दबाव में कांग्रेस से जुड़े ठेकेदारों को दिए जा रहे हैं। इनमें से अधिकतर ठेकेदारों के पास पर्याप्त मशीनरी तक नहीं है। इसकी वजह से सड़कों की बहाली में देरी हो रही है। इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। यदि प्रदेश सरकार को आपदा प्रभावितों और अन्य लोगों की वास्तव में ही चिंता है तो सड़कों की बहाली के कार्य की बंदरबांट करने के बजाए अनुभव और योग्यता को प्राथमिकता दी जाए। समय पर सड़कें बहाल होने से लोगों को काफी हद तक राहत मिल सकती है।
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- कांग्रेस नेताओं काम देने के दबाव में हो रही सड़कों की बहाली में देरी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भाजपा विधायक त्रिलोक जम्वाल ने भारी बारिश से बंद सड़कों की बहाली में हो रही देरी को लेकर प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि भूस्खलन और मलबा गिरने से ग्रामीण इलाकों की कई सड़कें अभी भी बंद हैं। इसकी वजह से आपदा प्रभावितों के साथ ही अन्य लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि अनुभवी और योग्य ठेकेदारों को दरकिनार करके सड़कों की बहाली का ज्यादातर काम राजनीतिक दबाव में कांग्रेस से जुड़े ठेकेदारों को देना इसका मुख्य कारण है। काम सही ढंग से पूरा करने के बजाय वह अपनी जेबें भरने को प्राथमिकता दे रहे हैं। इस बार जोरदार बारिश की वजह से जहां कई लोग बेघर हुए हैं, वहीं सड़कों को भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। ग्रामीण इलाकों की ज्यादातर सड़कें बंद होने के कारण राहत कार्य प्रभावित हो रहे हैं। न तो समय रहते लोगों तक राहत पहुंच पा रही है और न ही क्षतिग्रस्त पेयजल योजनाओं और बिजली की लाइनों आदि की मरम्मत के लिए जरूरी सामग्री वहां तक पहुंच रही है। इसकी वजह से लोगों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। किसी भी तरह का जरूरी सामान अपने घरों तक पहुंचाने के लिए उनका लेबर खर्च भी बढ़ गया है। कई गांवों से स्कूल-कॉलेज के बच्चों, नौकरीपेशा और अन्य लोगों को अपने गंतव्य पर पहुंचने के लिए मीलों दूरी पैदल तय करनी पड़ रही है।
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जम्वाल ने कहा कि आपदा प्रभावितों को तुरंत राहत प्रदान करने के साथ ही बंद सड़कों की बहाली का काम युद्ध स्तर पर किया जाना चाहिए, लेकिन सत्ता पक्ष के नेता अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए आपदा की इस घड़ी में भी अवसर तलाश रहे हैं। अनुभव और योग्यता को दरकिनार करके मलबा हटाने से लेकर क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और पुनर्निर्माण जैसे ज्यादातर कार्य राजनीतिक दबाव में कांग्रेस से जुड़े ठेकेदारों को दिए जा रहे हैं। इनमें से अधिकतर ठेकेदारों के पास पर्याप्त मशीनरी तक नहीं है। इसकी वजह से सड़कों की बहाली में देरी हो रही है। इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। यदि प्रदेश सरकार को आपदा प्रभावितों और अन्य लोगों की वास्तव में ही चिंता है तो सड़कों की बहाली के कार्य की बंदरबांट करने के बजाए अनुभव और योग्यता को प्राथमिकता दी जाए। समय पर सड़कें बहाल होने से लोगों को काफी हद तक राहत मिल सकती है।
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