{"_id":"5e932e598ebc3e769b070035","slug":"without-pilgrim-chetra-navrater-completed-bilaspur-news-sml33023237","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिना भक्तों के ही संपन्न हो गए चैत्र मेले, कारोबारी निराश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिना भक्तों के ही संपन्न हो गए चैत्र मेले, कारोबारी निराश
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शाहतलाई (बिलासपुर)। उत्तरी भारत के प्रसिद्ध धार्मिक सिद्धपीठ बाबा बालक नाथ की तपोभूमि शाहतलाई में चैत्र की संक्रांति 14 मार्च से शुरू मेले बिना भक्तों के रविवार को संपन्न हो गए। देश-विदेश से चैत्र माह में लाखों की संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालु कोरोना महामारी के चलते मंदिर के कपाट बंद होने के कारण इस बार बाबा के दरबार शीश झुकाने से वंचित रह गए। इस दौरान करोड़ों का चढ़ावा भक्तों की ओर से एक माह में आता था। लेकिन, इस बार एक बार भी गल्ले को खोला नहीं गया।
तपोस्थली पर लगने वाले मेलों का इंतजार स्थानीय कारोबारी और आमजन पूरा साल करते हैं। कारोबारियों में पवन कौशल, ईश्वरदास, विपिन कुमार, जरनैल सिंह, किशोरी लाल, चमन लाल, नीलम कुमार का कहना है कि बाबा बालक नाथ की तपोस्थली कोई व्यापारिक कस्बा नही हैं।
यहां पर न तो कोई मुख्य कार्यालय है जिससे लोगों का आना जाना लगा रहे। यह मात्र धार्मिक नगरी है। मात्र चैत्र मेले ही उन की आय का साधन है। लेकिन, इस साल महामारी के चलते शाहतलाई के कारोबारियों व मेले से संबंधित आमजन की सारी तैयारियां धरी की धरी रह गईं और करोड़ों का नुकसान हो गया। अब इसकी भरपाई नहीं हो पाएगी। उधर, झंडूता के कार्यवाहक एसडीएम तहसीलदार मुलतान सिंह ने बताया कि चैत्र में मंदिरों के कपाट भक्तों के लिए कोरोना महामारी के चलते बंद रहे। लेकिन, बाबा के मदिरों में पूजा आरती निरंतर जारी रही, जो आगे भी जारी रहेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
तपोस्थली पर लगने वाले मेलों का इंतजार स्थानीय कारोबारी और आमजन पूरा साल करते हैं। कारोबारियों में पवन कौशल, ईश्वरदास, विपिन कुमार, जरनैल सिंह, किशोरी लाल, चमन लाल, नीलम कुमार का कहना है कि बाबा बालक नाथ की तपोस्थली कोई व्यापारिक कस्बा नही हैं।
विज्ञापन
यहां पर न तो कोई मुख्य कार्यालय है जिससे लोगों का आना जाना लगा रहे। यह मात्र धार्मिक नगरी है। मात्र चैत्र मेले ही उन की आय का साधन है। लेकिन, इस साल महामारी के चलते शाहतलाई के कारोबारियों व मेले से संबंधित आमजन की सारी तैयारियां धरी की धरी रह गईं और करोड़ों का नुकसान हो गया। अब इसकी भरपाई नहीं हो पाएगी। उधर, झंडूता के कार्यवाहक एसडीएम तहसीलदार मुलतान सिंह ने बताया कि चैत्र में मंदिरों के कपाट भक्तों के लिए कोरोना महामारी के चलते बंद रहे। लेकिन, बाबा के मदिरों में पूजा आरती निरंतर जारी रही, जो आगे भी जारी रहेगी।
विज्ञापन