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Bilaspur News: अपणा रोणा किसने रोये मेरे देशा रा किसान... रचना ने लूटी वाहवाही
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- लदेह में हुई लेखक संघ की मासिक बैठक एवं संगोष्ठी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। लेखक संघ की मासिक बैठक एवं संगोष्ठी डूडियां पंचायत के गांव लदेह में स्थित वन विभाग के विश्रामगृह में हुई। बैठक की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष डॉ. रविंद्र ठाकुर ने की। उन्होंने कहा कि हमें अपनी बोली को बढ़ावा देना चाहिए और बच्चों को भी पहाड़ी में बोलने की आदत डालनी चाहिए। कर्नल जसवंत सिंह चंदेल ने गांव लदेह के इतिहास के बारे में बताया।
डॉ. लेख राम शर्मा ने कोटधार से संबंधित जानकारियां लोगों के साथ साझा कीं। दूसरे सत्र में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता डॉ. लेखराम शर्मा ने की, जबकि मंच संचालन संघ के महासचिव रविंद्र कुमार शर्मा ने किया। काव्य गोष्ठी का आगाज प्रीति शर्मा की रचना वक्त से हुआ। बृजलाल लखनपाल ने गप्प गडौंजा, जसवंत सिंह चंदेल ने नारी का सम्मान करो, डॉ. अनेक राम सांख्यान ने लगदा तां निक्का जेया झींझडू के, पर माहनु पाई ते इने पिंजडूये, प्रवीण शर्मा ने बुरा हाल है शीर्षक से अपनी रचना प्रस्तुत की। सुरजीत चंदेल ने किसान की व्यथा पर अपनी कविता अपणा रोणा किसने रोये मेरे देशा रा किसान, अनीता रानी ने अपनी रचना बुढ़ापा मिंजो आया रे, ममता चंदेल ने मुझे आगे बढ़ते जाना है संसार, चंद कुटलै़ड़िया ने विदेशों में जाकर न लौटने वाले बच्चों पर तुम लौट आओ रचना प्रस्तुत की। रविंद्र कुमार शर्मा ने सज रही है अयोध्या नगरी बिच मेरे राम दा डेरा वे माहिया हो, डॉ. जय अनजान ने खेतों में पीली पीली सरसों है लहरा रही लगता है उनसे स्वर्णिम आभा है आ रही, रविंद्र चंदेल कमल ने सीर खड्ड है पहचान यहां की, द्वारका प्रसाद शर्मा ने पतझड़ शीतोष्ण से डर लगता है जिन को आता उन्हें बसंत नहीं, डॉ. लेखराम शर्मा ने अम्ब किती दूर-दूर नी, पौंदा हुण बूर नी, डॉ. रविंद्र कुमार ठाकुर ने धन-धन ओ पहाड़ियाें लोको लोक पाहड़ियों तुसां जो गलांदे, अनिल चौहान ने यह इश्क मोहब्बत प्यार के नाम पर सिर्फ जिस्मो धंधे हैं कुछ दिन की खुशी के बाद यह गले के लिए फंदे हैं, कुसुमलता ने दखणा डुडियां रा कांगटू उतरा माली टिब्बा, कर्नल जसवंत सिंह चंदेल ने मेरी कोटेधार, करण चंदेल ने पुराणियां गल्लां रचना प्रस्तुत की। इसके अलावा वीना वर्धन, रेखा चंदेल, श्रेया और शालीना शर्मा ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम का आयोजन कुसुमलता ने किया। संघ के महासचिव रवींद्र कुमार शर्मा ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी साहित्यकारों और आयोजकों के आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि अगले माह की बैठक दूसरे शनिवार को स्वतंत्रता सेनानी सदन कोट छाडलू में होगी। इस अवसर पर लेखक संघ के मुख्य संरक्षक कर्नल चंदेल, संरक्षक डॉ. लेख राम शर्मा, प्रधान डॉ. रविंद्र ठाकुर, महासचिव रविंद्र कुमार शर्मा, नायाब सूबेदार ब्रिज लाल, निर्मला देवी, अनिल चौहान और अन्य उपस्थित रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। लेखक संघ की मासिक बैठक एवं संगोष्ठी डूडियां पंचायत के गांव लदेह में स्थित वन विभाग के विश्रामगृह में हुई। बैठक की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष डॉ. रविंद्र ठाकुर ने की। उन्होंने कहा कि हमें अपनी बोली को बढ़ावा देना चाहिए और बच्चों को भी पहाड़ी में बोलने की आदत डालनी चाहिए। कर्नल जसवंत सिंह चंदेल ने गांव लदेह के इतिहास के बारे में बताया।
डॉ. लेख राम शर्मा ने कोटधार से संबंधित जानकारियां लोगों के साथ साझा कीं। दूसरे सत्र में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता डॉ. लेखराम शर्मा ने की, जबकि मंच संचालन संघ के महासचिव रविंद्र कुमार शर्मा ने किया। काव्य गोष्ठी का आगाज प्रीति शर्मा की रचना वक्त से हुआ। बृजलाल लखनपाल ने गप्प गडौंजा, जसवंत सिंह चंदेल ने नारी का सम्मान करो, डॉ. अनेक राम सांख्यान ने लगदा तां निक्का जेया झींझडू के, पर माहनु पाई ते इने पिंजडूये, प्रवीण शर्मा ने बुरा हाल है शीर्षक से अपनी रचना प्रस्तुत की। सुरजीत चंदेल ने किसान की व्यथा पर अपनी कविता अपणा रोणा किसने रोये मेरे देशा रा किसान, अनीता रानी ने अपनी रचना बुढ़ापा मिंजो आया रे, ममता चंदेल ने मुझे आगे बढ़ते जाना है संसार, चंद कुटलै़ड़िया ने विदेशों में जाकर न लौटने वाले बच्चों पर तुम लौट आओ रचना प्रस्तुत की। रविंद्र कुमार शर्मा ने सज रही है अयोध्या नगरी बिच मेरे राम दा डेरा वे माहिया हो, डॉ. जय अनजान ने खेतों में पीली पीली सरसों है लहरा रही लगता है उनसे स्वर्णिम आभा है आ रही, रविंद्र चंदेल कमल ने सीर खड्ड है पहचान यहां की, द्वारका प्रसाद शर्मा ने पतझड़ शीतोष्ण से डर लगता है जिन को आता उन्हें बसंत नहीं, डॉ. लेखराम शर्मा ने अम्ब किती दूर-दूर नी, पौंदा हुण बूर नी, डॉ. रविंद्र कुमार ठाकुर ने धन-धन ओ पहाड़ियाें लोको लोक पाहड़ियों तुसां जो गलांदे, अनिल चौहान ने यह इश्क मोहब्बत प्यार के नाम पर सिर्फ जिस्मो धंधे हैं कुछ दिन की खुशी के बाद यह गले के लिए फंदे हैं, कुसुमलता ने दखणा डुडियां रा कांगटू उतरा माली टिब्बा, कर्नल जसवंत सिंह चंदेल ने मेरी कोटेधार, करण चंदेल ने पुराणियां गल्लां रचना प्रस्तुत की। इसके अलावा वीना वर्धन, रेखा चंदेल, श्रेया और शालीना शर्मा ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम का आयोजन कुसुमलता ने किया। संघ के महासचिव रवींद्र कुमार शर्मा ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी साहित्यकारों और आयोजकों के आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि अगले माह की बैठक दूसरे शनिवार को स्वतंत्रता सेनानी सदन कोट छाडलू में होगी। इस अवसर पर लेखक संघ के मुख्य संरक्षक कर्नल चंदेल, संरक्षक डॉ. लेख राम शर्मा, प्रधान डॉ. रविंद्र ठाकुर, महासचिव रविंद्र कुमार शर्मा, नायाब सूबेदार ब्रिज लाल, निर्मला देवी, अनिल चौहान और अन्य उपस्थित रहे।
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