{"_id":"67a0c775317eef292701df1d","slug":"wherever-you-look-today-you-can-see-the-secret-of-deceit-everywhere-bilaspur-news-c-92-1-bls1002-131404-2025-02-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bilaspur News: चाहे जहां भी चाहो देख लो तुम आज, दिखता है हर जगह चमचागिरी का राज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bilaspur News: चाहे जहां भी चाहो देख लो तुम आज, दिखता है हर जगह चमचागिरी का राज
Mon, 03 Feb 2025 11:09 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Mon, 03 Feb 2025 11:09 PM IST
विज्ञापन
बिलासपुर के गांव अलसू में आयोजित बैठक व कवि गोष्ठी में उपस्थित लेखक संघ के सदस्य व कवि । संवाद
-ललिता कश्यप की जग दर्शन, छंद वृष्टि पुस्तक का किया विमोचन
-लेखक संघ बिलासपुर की बैठक एवं कवि गोष्ठी हुई आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। लेखक संघ बिलासपुर की बैठक एवं कवि गोष्ठी गांव अलसू में स्थित एक होटल में हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. रवींद्र ठाकुर ने की और मंच संचालन रविंद्र कुमार शर्मा ने किया।
समारोह में सेवानिवृत्त अतिरिक्त निदेशक लेखराज चौहान ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। विशिष्ट अतिथि के रूप में दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप सोहटा और पूर्व जिला भाषा अधिकारी डॉ. अनीता शर्मा उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में संघ की सदस्य व लेखिका ललिता कश्यप की दो पुस्तकें जग दर्शन और छंद वृष्टि का विमोचन किया गया। जग दर्शन की समीक्षा रविंद्र कुमार शर्मा और रविंद्र ने की। इस पुस्तक में 37 निबंध हैं जो विभिन्न विषयों पर हैं। छंद वृष्टि की समीक्षा शीला सिंह और डॉ रविंद्र ठाकुर ने की। इस पुस्तक में 102 रचनाएं हैं जो विभिन्न छंदों में लिखी गई हैं।
मुख्यातिथि ने बताया कि साहित्य सृजन आसान काम नहीं है। उन्होंने सभी साहित्यकारों से आग्रह किया कि नशे जैसे जनहित से जुड़े मुद्दों पर लोगों को जागरूक करते रहें। उन्होंने बताया कि छंदों में लिखना बहुत कठिन है। कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में काव्य गोष्ठी हुई, जिसकी अध्यक्षता कर्नल जसवंत सिंह चंदेल ने की। केशव शर्मा ने चाहे जहां भी चाहो देख लो तुम आज, दिखता है हर जगह चमचागिरी का राज। कर्ण चंदेल ने यात्रा संस्मरण, बीरबल राम धीमान ने रोडुये रा घराट पुरानी बात, जसवंत सिंह चंदेल ने दिसंबर और जनवरी माह का है बहुत बड़ा गहरा रिश्ता। डॉ. अनेक राम संख्यान ने नवजीवन ऊर्जा देने आ गया बसंत कविता प्रस्तुत की। नरैनू राम हितैषी ने देखो कुदरत की माया पतझड़ गई बसंत आया, कर्नल जसवंत सिंह चंदेल ने मेरे गांव के बूढ़ों का वह खंगारा चला गया, रविंद्र कुमार शर्मा ने जब से झूठों का दरबार सजने लगा है, ढोल कुछ ज्यादा ही ऊंचा बजने लगा है, सच्चाई को हर कोई पीछे धकेल रहा, अब तो मौन ही अच्छा लगने लगा है प्रस्तुत की। अरुण डोगरा रितु ने इस देशा री बीमारी भूखे भ्रष्टाचारी, सुषमा खजूरिया ने हे शारदे अपनी करुणा से मेरे तम को हर लीजिए, बृजलाल लखनपाल ने फसदी फसदी फसी गई जींद जंजाला विच फसी गई पहाड़ी गाना प्रस्तुत किया।
विज्ञापन
परमजीत सिंह कहलूरी ने जिसने हृदय में बसाया था हमको, जहर भी उसी ने पिलाया था हमको, जावेद इकबाल ने कल फिर कोई शाम होगी क्या, मोहब्बत फिर से आम होगी क्या, भीम सिंह नेगी ने भजन प्रस्तुत किया। डॉ. प्रशांत आचार्य ने शिवनाद, सुनील शर्मा ने हुण पहले साइ प्यार नी रहया, प्रवीण शर्मा ने हिसाब कौन रखेगा, अजय शर्मा ने मन से मिट जाए बैर भाव सबके, हेमराज शर्मा ने मानव जीवन एक तपस्या है, शिवाय शर्मा ने जिसमें सूरज चांद बनाया प्रस्तुत की।
समारोह में मुख्यातिथि और विशिष्ट अतिथियों को शॉल टोपी व पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान डॉ. प्रशांत आचार्य, रोशन लाल शर्मा, हरवंश सिंह, कर्नल जसवंत सिंह चंदेल, कर्ण चंदेल, रवींद्र कुमार शर्मा, अरुण डोगरा और रविंद्र साथी को भी सम्मानित किया गया।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
लेख राम चौहान ने काश मैं बच्चा होता, रेखा चंदेल ने लोकगीत अंगने ना तेरे पिताजी सोने दी चिडय़िा, राजपूत देवेंद्र ठाकुर ने बसंत पंचमी पर अपनी रचना प्रस्तुत की। धर्मचंद धीमान ने मंडयाली कविता शिवरात्रि रा न्यून्द्रा प्रस्तुत की। प्रीति शर्मा मधु ने अब कोई एहसान न करना, मुझे बस अब खुद में रहने दो, डॉ. अनीता शर्मा ने छोटी इलायची सी तितली जीरे जितने फूल पर मंडराये तो समझो बसंत है, निर्मला ठाकुर ने आज था रविवार परांठे खादे अहें चार, रविंद्र साथी ने आया बसंत पाला उड़ंत सर्दी का हो गया अंत, डॉ. जय अंजान ने जो तेरे मुंह पर तेरे हैं जो मेरे मुंह पर मेरे हैं, विकास कश्यप और मंजू ने बहुत सुंदर गाना प्रस्तुत किया। समारोह में मुख्यातिथि और विशिष्ट अतिथियों को शॉल टोपी व पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान डॉ. प्रशांत आचार्य, रोशन लाल शर्मा, हरवंश सिंह, कर्नल जसवंत सिंह चंदेल, कर्ण चंदेल, रवींद्र कुमार शर्मा, अरुण डोगरा और रविंद्र साथी को भी सम्मानित किया गया।
विज्ञापन
-लेखक संघ बिलासपुर की बैठक एवं कवि गोष्ठी हुई आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। लेखक संघ बिलासपुर की बैठक एवं कवि गोष्ठी गांव अलसू में स्थित एक होटल में हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. रवींद्र ठाकुर ने की और मंच संचालन रविंद्र कुमार शर्मा ने किया।
समारोह में सेवानिवृत्त अतिरिक्त निदेशक लेखराज चौहान ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। विशिष्ट अतिथि के रूप में दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप सोहटा और पूर्व जिला भाषा अधिकारी डॉ. अनीता शर्मा उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में संघ की सदस्य व लेखिका ललिता कश्यप की दो पुस्तकें जग दर्शन और छंद वृष्टि का विमोचन किया गया। जग दर्शन की समीक्षा रविंद्र कुमार शर्मा और रविंद्र ने की। इस पुस्तक में 37 निबंध हैं जो विभिन्न विषयों पर हैं। छंद वृष्टि की समीक्षा शीला सिंह और डॉ रविंद्र ठाकुर ने की। इस पुस्तक में 102 रचनाएं हैं जो विभिन्न छंदों में लिखी गई हैं।
विज्ञापन
मुख्यातिथि ने बताया कि साहित्य सृजन आसान काम नहीं है। उन्होंने सभी साहित्यकारों से आग्रह किया कि नशे जैसे जनहित से जुड़े मुद्दों पर लोगों को जागरूक करते रहें। उन्होंने बताया कि छंदों में लिखना बहुत कठिन है। कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में काव्य गोष्ठी हुई, जिसकी अध्यक्षता कर्नल जसवंत सिंह चंदेल ने की। केशव शर्मा ने चाहे जहां भी चाहो देख लो तुम आज, दिखता है हर जगह चमचागिरी का राज। कर्ण चंदेल ने यात्रा संस्मरण, बीरबल राम धीमान ने रोडुये रा घराट पुरानी बात, जसवंत सिंह चंदेल ने दिसंबर और जनवरी माह का है बहुत बड़ा गहरा रिश्ता। डॉ. अनेक राम संख्यान ने नवजीवन ऊर्जा देने आ गया बसंत कविता प्रस्तुत की। नरैनू राम हितैषी ने देखो कुदरत की माया पतझड़ गई बसंत आया, कर्नल जसवंत सिंह चंदेल ने मेरे गांव के बूढ़ों का वह खंगारा चला गया, रविंद्र कुमार शर्मा ने जब से झूठों का दरबार सजने लगा है, ढोल कुछ ज्यादा ही ऊंचा बजने लगा है, सच्चाई को हर कोई पीछे धकेल रहा, अब तो मौन ही अच्छा लगने लगा है प्रस्तुत की। अरुण डोगरा रितु ने इस देशा री बीमारी भूखे भ्रष्टाचारी, सुषमा खजूरिया ने हे शारदे अपनी करुणा से मेरे तम को हर लीजिए, बृजलाल लखनपाल ने फसदी फसदी फसी गई जींद जंजाला विच फसी गई पहाड़ी गाना प्रस्तुत किया।
विज्ञापन
परमजीत सिंह कहलूरी ने जिसने हृदय में बसाया था हमको, जहर भी उसी ने पिलाया था हमको, जावेद इकबाल ने कल फिर कोई शाम होगी क्या, मोहब्बत फिर से आम होगी क्या, भीम सिंह नेगी ने भजन प्रस्तुत किया। डॉ. प्रशांत आचार्य ने शिवनाद, सुनील शर्मा ने हुण पहले साइ प्यार नी रहया, प्रवीण शर्मा ने हिसाब कौन रखेगा, अजय शर्मा ने मन से मिट जाए बैर भाव सबके, हेमराज शर्मा ने मानव जीवन एक तपस्या है, शिवाय शर्मा ने जिसमें सूरज चांद बनाया प्रस्तुत की।
समारोह में मुख्यातिथि और विशिष्ट अतिथियों को शॉल टोपी व पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान डॉ. प्रशांत आचार्य, रोशन लाल शर्मा, हरवंश सिंह, कर्नल जसवंत सिंह चंदेल, कर्ण चंदेल, रवींद्र कुमार शर्मा, अरुण डोगरा और रविंद्र साथी को भी सम्मानित किया गया।
लेख राम चौहान ने काश मैं बच्चा होता, रेखा चंदेल ने लोकगीत अंगने ना तेरे पिताजी सोने दी चिडय़िा, राजपूत देवेंद्र ठाकुर ने बसंत पंचमी पर अपनी रचना प्रस्तुत की। धर्मचंद धीमान ने मंडयाली कविता शिवरात्रि रा न्यून्द्रा प्रस्तुत की। प्रीति शर्मा मधु ने अब कोई एहसान न करना, मुझे बस अब खुद में रहने दो, डॉ. अनीता शर्मा ने छोटी इलायची सी तितली जीरे जितने फूल पर मंडराये तो समझो बसंत है, निर्मला ठाकुर ने आज था रविवार परांठे खादे अहें चार, रविंद्र साथी ने आया बसंत पाला उड़ंत सर्दी का हो गया अंत, डॉ. जय अंजान ने जो तेरे मुंह पर तेरे हैं जो मेरे मुंह पर मेरे हैं, विकास कश्यप और मंजू ने बहुत सुंदर गाना प्रस्तुत किया। समारोह में मुख्यातिथि और विशिष्ट अतिथियों को शॉल टोपी व पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान डॉ. प्रशांत आचार्य, रोशन लाल शर्मा, हरवंश सिंह, कर्नल जसवंत सिंह चंदेल, कर्ण चंदेल, रवींद्र कुमार शर्मा, अरुण डोगरा और रविंद्र साथी को भी सम्मानित किया गया।