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धर्म संकट में पड़ता है तो भगवान लेते हैं अवतार : पंडित घनश्याम
Sat, 16 May 2026 11:44 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sat, 16 May 2026 11:44 PM IST
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करंगोड़ा में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करते श्रद्धालु। स्रोत: आयोजक
करंगोड़ा गांव में सामूहिक श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। उपमंडल घुमारवीं के करंगोड़ा गांव में ग्रामवासियों के सहयोग से सामूहिक श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान कथावाचक पंडित घनश्याम ने भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति, भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन और भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य जन्म और बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब-जब धर्म पर संकट आता है, तब भगवान विभिन्न रूपों में अवतरित होकर मानवता की रक्षा करते हैं। उन्होंने भक्त प्रह्लाद के प्रसंग के माध्यम से बताया कि सच्चे भक्त की भगवान हर परिस्थिति में रक्षा करते हैं। वहीं भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र से मर्यादा, त्याग और कर्तव्य पालन की प्रेरणा मिलती है। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। पंडित घनश्याम ने कहा कि आज का मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं में उलझकर आध्यात्मिकता से दूर होता जा रहा है, जबकि प्रभु भक्ति के बिना जीवन अधूरा है। उन्होंने लोगों से धार्मिक संस्कार, सदाचार और मानव सेवा को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। आयोजकों तिलक राज, अमरनाथ, प्रकाश चंद, राजेश शर्मा, जगत पाल, वेद प्रकाश, सुरेश, बाबू लाल, हंसराज, डिंपल और कमला देवी ने बताया कि गांववासी पिछले कई वर्षों से सामूहिक रूप से भागवत कथा का आयोजन करते आ रहे हैं और भविष्य में भी इस परंपरा को जारी रखेंगे।
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घुमारवीं (बिलासपुर)। उपमंडल घुमारवीं के करंगोड़ा गांव में ग्रामवासियों के सहयोग से सामूहिक श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान कथावाचक पंडित घनश्याम ने भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति, भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन और भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य जन्म और बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब-जब धर्म पर संकट आता है, तब भगवान विभिन्न रूपों में अवतरित होकर मानवता की रक्षा करते हैं। उन्होंने भक्त प्रह्लाद के प्रसंग के माध्यम से बताया कि सच्चे भक्त की भगवान हर परिस्थिति में रक्षा करते हैं। वहीं भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र से मर्यादा, त्याग और कर्तव्य पालन की प्रेरणा मिलती है। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। पंडित घनश्याम ने कहा कि आज का मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं में उलझकर आध्यात्मिकता से दूर होता जा रहा है, जबकि प्रभु भक्ति के बिना जीवन अधूरा है। उन्होंने लोगों से धार्मिक संस्कार, सदाचार और मानव सेवा को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। आयोजकों तिलक राज, अमरनाथ, प्रकाश चंद, राजेश शर्मा, जगत पाल, वेद प्रकाश, सुरेश, बाबू लाल, हंसराज, डिंपल और कमला देवी ने बताया कि गांववासी पिछले कई वर्षों से सामूहिक रूप से भागवत कथा का आयोजन करते आ रहे हैं और भविष्य में भी इस परंपरा को जारी रखेंगे।