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Bilaspur News: बारिश न होने से जिले में शुरू नहीं हुई गेहूं की बिजाई
Mon, 04 Nov 2024 11:51 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Mon, 04 Nov 2024 11:51 PM IST
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- 15 नवंबर तक बिजाई का अनुकूल समय
- जिले में 80 प्रतिशत भूमि बारिश पर निर्भर
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी(बिलासपुर)। जिले में बारिश नहीं होने से गेहूं की बिजाई अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। जबकि बिजाई का अनुकूल समय 20 अक्तूबर से शुरू हो चुका है।
कृषि विशेषज्ञों के 20 अक्तूबर से 15 नवंबर तक गेहूं की बिजाई का बेहतर समय होता है। इस समय में की गई बिजाई से फसल की पैदावार बेहतर रहने की उम्मीद होती है। जहां नमी है, वहां किसान बिजाई कर सकते हैं। जहां जमीन में नमी नहीं है, वो किसान बारिश का इंतजार करें या सिंचाई करके गेहूं की बिजाई करें। जिले में करीब 31,878 हेक्टेयर भूमि पर खेती की जाती है। उसमें से 26 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की बिजाई की जाती है। 57,422 परिवार कृषि क्षेत्र से जुड़े हैं।
वहीं, 6500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है। यह कृषि भूमि का 20 प्रतिशत क्षेत्र है। शेष 80 प्रतिशत क्षेत्र बिजाई के लिए बारिश पर निर्भर है। विशेषज्ञों के मुताबिक किसानों को अच्छी फसल की पैदावार के लिए कई बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है। काली बाली और करनाल बंट जैसी बीमारी से बीज खराब होने का खतरा रहता है। बीज बाहर से देखने के में सही होता है, लेकिन अंदर से काला रंग का हो जाता है।
कृषि विशेषज्ञ डॉ. रवि शर्मा के मुताबिक बिजाई के समय बीज को कारबेंडा जिम दवाई का प्रयोग करें। गेहूं बीज को दो ग्राम प्रति किलो दवाई से ट्रीट करें। नेचुरल फार्मिंग वाले बीजा अमृत से ट्रीट करके बिजाई करें। इससे बीज में कीड़ा लगने का खतरा नहीं रहता है। इसके अलावा प्रति बीघा दस किलो 12-32-16 खाद का प्रयोग करें।
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- जिले में 80 प्रतिशत भूमि बारिश पर निर्भर
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी(बिलासपुर)। जिले में बारिश नहीं होने से गेहूं की बिजाई अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। जबकि बिजाई का अनुकूल समय 20 अक्तूबर से शुरू हो चुका है।
कृषि विशेषज्ञों के 20 अक्तूबर से 15 नवंबर तक गेहूं की बिजाई का बेहतर समय होता है। इस समय में की गई बिजाई से फसल की पैदावार बेहतर रहने की उम्मीद होती है। जहां नमी है, वहां किसान बिजाई कर सकते हैं। जहां जमीन में नमी नहीं है, वो किसान बारिश का इंतजार करें या सिंचाई करके गेहूं की बिजाई करें। जिले में करीब 31,878 हेक्टेयर भूमि पर खेती की जाती है। उसमें से 26 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की बिजाई की जाती है। 57,422 परिवार कृषि क्षेत्र से जुड़े हैं।
वहीं, 6500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है। यह कृषि भूमि का 20 प्रतिशत क्षेत्र है। शेष 80 प्रतिशत क्षेत्र बिजाई के लिए बारिश पर निर्भर है। विशेषज्ञों के मुताबिक किसानों को अच्छी फसल की पैदावार के लिए कई बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है। काली बाली और करनाल बंट जैसी बीमारी से बीज खराब होने का खतरा रहता है। बीज बाहर से देखने के में सही होता है, लेकिन अंदर से काला रंग का हो जाता है।
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कृषि विशेषज्ञ डॉ. रवि शर्मा के मुताबिक बिजाई के समय बीज को कारबेंडा जिम दवाई का प्रयोग करें। गेहूं बीज को दो ग्राम प्रति किलो दवाई से ट्रीट करें। नेचुरल फार्मिंग वाले बीजा अमृत से ट्रीट करके बिजाई करें। इससे बीज में कीड़ा लगने का खतरा नहीं रहता है। इसके अलावा प्रति बीघा दस किलो 12-32-16 खाद का प्रयोग करें।
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