{"_id":"602ea98f8ebc3ee8f61a4006","slug":"wheat-crop-damaged-due-to-no-rain-bilaspur-news-sml3614603168","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिले में दो माह से बारिश न होने से सूखी गेहूं की 50 फीसदी फसल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिले में दो माह से बारिश न होने से सूखी गेहूं की 50 फीसदी फसल
विज्ञापन
शाहतलाई में बारिश न होने से सूखी गेहूं की फसल को दिखाता किसान।
- फोटो : BILASPUR
शाहतलाई (बिलासपुर)। जिले में दो माह से बारिश न होने से गेहूं की फसल सूख गई है। करीब पैंसठ हजार किसान परिवारों को मौसम के कारण भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। गत दिनों पूरे प्रदेश में बारिश हुई, लेकिन बिलासपुर में मेघ नहीं बरसे। इस कारण गेहूं की करीब 50 फीसदी फसल को नुकसान पहुंचा है। इससे किसान चिंतित हैं।
बिलासपुर में 31813 हेक्टेयर भूमि पर खेतीबाड़ी की जाती है। 27 हजार हेक्टेयर पर गेहूं की फसल उगाई जाती है। जबकि करीब 5 हजार हेक्टेयर पर बेमौसमी फसलें और जौ की पैदावार होती है। जिले के करीब 65 हजार परिवार खेतीबाड़ी कर गुजर बसर करते हैं। बीते दो माह से बारिश न होने से गैर सिंचित 28906 हेक्टेयर कृषि भूमि पर फसलों को 50 फीसदी से अधिक नुकसान हुआ है। जबकि 2907 हेक्टेयर सिंचाई सुविधा वाले क्षेत्र में जलस्तर कम होने से अधिकतर सिंचाई योजनाएं बंद हो गई हैं या बंद होने की कगार पर हैं। पिछले वर्ष गेहूं की पैदावार अच्छी हुई थी। लेकिन इस साल मौसम के बदलते मिजाज से हरेभरे खेत सूख गए हैं। गेहूं के पौध की बढ़ोतरी रुक गई है।
किसानों मनेद्र सिंह, सीताराम, कुलदीप, सोमदत्त, श्रवण कुमार, प्रकाश चंद, परसराम, दीनानाथ, सोहन लाल, किशोरी लाल का कहना है कि गेहूं की बिजाई के समय खेतों में पर्याप्त नमी थी। गेहूं की बढ़ोतरी सही ढंग से हो रही थी, लेकिन दो माह से बारिश न होने से करीब 50 फीसदी फसल सूख गई है। बाकि बची फसल की बढ़ोतरी रुक गई है। किसानों ने सरकार और कृषि विभाग से मांग की है कि जिले को सूखा ग्रस्त घोषित करके किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए।
विज्ञापन
उधर, जिले के कृषि उपनिदेशक कुलदीप पटियाल ने बताया कि बारिश न होने से गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है। कितने फीसदी नुकसान हुआ है, अभी बताना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर एक-दो दिन में बारिश हो जाती है तो फसल के लिए संजीवनी सिद्ध होगी।
विज्ञापन
बिलासपुर में 31813 हेक्टेयर भूमि पर खेतीबाड़ी की जाती है। 27 हजार हेक्टेयर पर गेहूं की फसल उगाई जाती है। जबकि करीब 5 हजार हेक्टेयर पर बेमौसमी फसलें और जौ की पैदावार होती है। जिले के करीब 65 हजार परिवार खेतीबाड़ी कर गुजर बसर करते हैं। बीते दो माह से बारिश न होने से गैर सिंचित 28906 हेक्टेयर कृषि भूमि पर फसलों को 50 फीसदी से अधिक नुकसान हुआ है। जबकि 2907 हेक्टेयर सिंचाई सुविधा वाले क्षेत्र में जलस्तर कम होने से अधिकतर सिंचाई योजनाएं बंद हो गई हैं या बंद होने की कगार पर हैं। पिछले वर्ष गेहूं की पैदावार अच्छी हुई थी। लेकिन इस साल मौसम के बदलते मिजाज से हरेभरे खेत सूख गए हैं। गेहूं के पौध की बढ़ोतरी रुक गई है।
विज्ञापन
किसानों मनेद्र सिंह, सीताराम, कुलदीप, सोमदत्त, श्रवण कुमार, प्रकाश चंद, परसराम, दीनानाथ, सोहन लाल, किशोरी लाल का कहना है कि गेहूं की बिजाई के समय खेतों में पर्याप्त नमी थी। गेहूं की बढ़ोतरी सही ढंग से हो रही थी, लेकिन दो माह से बारिश न होने से करीब 50 फीसदी फसल सूख गई है। बाकि बची फसल की बढ़ोतरी रुक गई है। किसानों ने सरकार और कृषि विभाग से मांग की है कि जिले को सूखा ग्रस्त घोषित करके किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए।
विज्ञापन
उधर, जिले के कृषि उपनिदेशक कुलदीप पटियाल ने बताया कि बारिश न होने से गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है। कितने फीसदी नुकसान हुआ है, अभी बताना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर एक-दो दिन में बारिश हो जाती है तो फसल के लिए संजीवनी सिद्ध होगी।