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Bilaspur News: लंपी वायरस से बचाव को तेज हुआ टीकाकरण, लावारिस गोवंश को भी लगेगी वैक्सीन
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बिलासपुर में अभी तक 60 से 65 मामले आ चुके सामने, 19 हजार वैक्सीन की नई खेप पहुंची
पिछली बार की तुलना में इस बार वायरस का असर हल्का, पशु खाना-पीना नहीं छोड़ रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में लंपी वायरस की दस्तक के बाद पशुपालन विभाग ने गोवंश को संक्रमण से बचाने के लिए टीकाकरण अभियान तेज कर दिया है। करीब एक सप्ताह पहले दसलेहड़ा क्षेत्र में पहला मामला सामने आया था। इसके बाद जिले में अब तक 60 से 65 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें करीब 50 पशु अभी संक्रमित हैं, जबकि 8 से 10 पशु उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं। विभाग अब सड़कों पर घूमने वाले करीब 220 से 250 लावारिस पशुओं को भी वैक्सीन लगाएगा। राहत की बात यह है कि अब तक किसी संक्रमित पशु की मौत नहीं हुई है। विभाग के अनुसार इस बार लंपी वायरस पिछली बार की तुलना में कम आक्रामक नजर आ रहा है। संक्रमित पशु खाना-पीना नहीं छोड़ रहे हैं और उपचार मिलने के बाद दो से तीन दिन में स्वस्थ हो रहे हैं। प्रभावित पशुओं में इस बार तेज बुखार, खाना छोड़ना और शरीर पर बड़े-बड़े फोड़े बनने जैसे गंभीर लक्षण सामने नहीं आ रहे हैं। मुख्य रूप से त्वचा पर हल्की सूजन के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। पशुपालन विभाग के अनुसार लंपी वायरस ऊना की तरफ से बिलासपुर पहुंचा है। करीब एक सप्ताह से मामलों की रिपोर्टिंग शुरू हुई है। विभाग नियमित रूप से संक्रमित पशुओं की रिपोर्ट निदेशालय शिमला भेज रहा है। संक्रमण की स्थिति पर विभाग की टीमें लगातार नजर बनाए हुए हैं। विभाग के पास करीब 19 हजार वैक्सीन की नई खेप पहुंच चुकी है, जबकि तीन से चार हजार वैक्सीन पहले से उपलब्ध थीं। एक पशु को वैक्सीन की सिंगल डोज लगाई जाती है। टीकाकरण के करीब 15 दिन बाद पशु के शरीर में एंटीबॉडी बनती हैं। विभाग ने पहले ही वैक्सीनेशन शुरू कर दिया था। ऐसे में इस बार वायरस की तीव्रता कम रहने की उम्मीद जताई जा रही है।
250 लावारिस पशुओं को भी लगेगा टीका
विभाग सड़कों पर घूमने वाले करीब 220 से 250 लावारिस गोवंश का भी टीकाकरण करेगा। कई लावारिस पशु सड़कों पर घूमते हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। विभाग के अनुसार लंपी के लक्षण गोवंश में ही सामने आ रहे हैं, इसलिए सभी गोवंश का टीकाकरण जरूरी है। लावारिस पशुओं की रिपोर्ट हर महीने गो सेवा आयोग को भी भेजी जाती है।
संक्रमित गांव में डेढ़ माह बाद वैक्सीनेशन
जिस गांव में लंपी का मामला सामने आ चुका है, उसे फिलहाल होल्ड पर रखा जाएगा। ऐसे गांव में तत्काल टीकाकरण नहीं किया जाएगा। विभाग करीब डेढ़ महीने बाद संक्रमित गांव में वैक्सीनेशन करेगा। विभाग के अनुसार संक्रमित गांव में तुरंत टीकाकरण करने से बीमारी के फ्लेयरअप का खतरा हो सकता है। इसलिए पहले आसपास के गांवों में टीकाकरण किया जाएगा।
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टीम न पहुंचे तो पशु चिकित्सक को दें सूचना
पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से अपने गोवंश का 100 फीसदी टीकाकरण करवाने की अपील की है। यदि किसी गांव में विभाग की टीम नहीं पहुंचती है तो इसकी सूचना संबंधित पशु चिकित्सा अधिकारी या नजदीकी पशु चिकित्सालय में देने को कहा गया है। पशुपालकों को विशेष रूप से अधिक गोवंश वाले गांवों में सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
कोट
इस बार लंपी की तीव्रता पिछली बार जैसी नहीं है। प्रभावित पशु खाना-पीना नहीं छोड़ रहे हैं और उपचार करने पर दो-तीन दिन में ठीक हो रहे हैं। पशुपालक अपने गोवंश का 100 फीसदी वैक्सीनेशन करवाएं। अगर किसी गांव में केस रिपोर्ट हुआ है तो वहां अभी वैक्सीनेशन न करवाएं, आसपास के गांवों में करवाएं। अगर किसी गांव में हमारा स्टाफ नहीं पहुंचता है तो नजदीकी पशु चिकित्सा अधिकारी को सूचना दें, ताकि जल्दी वैक्सीनेशन हो सके।
- डॉ. केएल शर्मा, सहायक निदेशक, पशुपालन विभाग
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पिछली बार की तुलना में इस बार वायरस का असर हल्का, पशु खाना-पीना नहीं छोड़ रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में लंपी वायरस की दस्तक के बाद पशुपालन विभाग ने गोवंश को संक्रमण से बचाने के लिए टीकाकरण अभियान तेज कर दिया है। करीब एक सप्ताह पहले दसलेहड़ा क्षेत्र में पहला मामला सामने आया था। इसके बाद जिले में अब तक 60 से 65 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें करीब 50 पशु अभी संक्रमित हैं, जबकि 8 से 10 पशु उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं। विभाग अब सड़कों पर घूमने वाले करीब 220 से 250 लावारिस पशुओं को भी वैक्सीन लगाएगा। राहत की बात यह है कि अब तक किसी संक्रमित पशु की मौत नहीं हुई है। विभाग के अनुसार इस बार लंपी वायरस पिछली बार की तुलना में कम आक्रामक नजर आ रहा है। संक्रमित पशु खाना-पीना नहीं छोड़ रहे हैं और उपचार मिलने के बाद दो से तीन दिन में स्वस्थ हो रहे हैं। प्रभावित पशुओं में इस बार तेज बुखार, खाना छोड़ना और शरीर पर बड़े-बड़े फोड़े बनने जैसे गंभीर लक्षण सामने नहीं आ रहे हैं। मुख्य रूप से त्वचा पर हल्की सूजन के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। पशुपालन विभाग के अनुसार लंपी वायरस ऊना की तरफ से बिलासपुर पहुंचा है। करीब एक सप्ताह से मामलों की रिपोर्टिंग शुरू हुई है। विभाग नियमित रूप से संक्रमित पशुओं की रिपोर्ट निदेशालय शिमला भेज रहा है। संक्रमण की स्थिति पर विभाग की टीमें लगातार नजर बनाए हुए हैं। विभाग के पास करीब 19 हजार वैक्सीन की नई खेप पहुंच चुकी है, जबकि तीन से चार हजार वैक्सीन पहले से उपलब्ध थीं। एक पशु को वैक्सीन की सिंगल डोज लगाई जाती है। टीकाकरण के करीब 15 दिन बाद पशु के शरीर में एंटीबॉडी बनती हैं। विभाग ने पहले ही वैक्सीनेशन शुरू कर दिया था। ऐसे में इस बार वायरस की तीव्रता कम रहने की उम्मीद जताई जा रही है।
250 लावारिस पशुओं को भी लगेगा टीका
विभाग सड़कों पर घूमने वाले करीब 220 से 250 लावारिस गोवंश का भी टीकाकरण करेगा। कई लावारिस पशु सड़कों पर घूमते हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। विभाग के अनुसार लंपी के लक्षण गोवंश में ही सामने आ रहे हैं, इसलिए सभी गोवंश का टीकाकरण जरूरी है। लावारिस पशुओं की रिपोर्ट हर महीने गो सेवा आयोग को भी भेजी जाती है।
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संक्रमित गांव में डेढ़ माह बाद वैक्सीनेशन
जिस गांव में लंपी का मामला सामने आ चुका है, उसे फिलहाल होल्ड पर रखा जाएगा। ऐसे गांव में तत्काल टीकाकरण नहीं किया जाएगा। विभाग करीब डेढ़ महीने बाद संक्रमित गांव में वैक्सीनेशन करेगा। विभाग के अनुसार संक्रमित गांव में तुरंत टीकाकरण करने से बीमारी के फ्लेयरअप का खतरा हो सकता है। इसलिए पहले आसपास के गांवों में टीकाकरण किया जाएगा।
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टीम न पहुंचे तो पशु चिकित्सक को दें सूचना
पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से अपने गोवंश का 100 फीसदी टीकाकरण करवाने की अपील की है। यदि किसी गांव में विभाग की टीम नहीं पहुंचती है तो इसकी सूचना संबंधित पशु चिकित्सा अधिकारी या नजदीकी पशु चिकित्सालय में देने को कहा गया है। पशुपालकों को विशेष रूप से अधिक गोवंश वाले गांवों में सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
कोट
इस बार लंपी की तीव्रता पिछली बार जैसी नहीं है। प्रभावित पशु खाना-पीना नहीं छोड़ रहे हैं और उपचार करने पर दो-तीन दिन में ठीक हो रहे हैं। पशुपालक अपने गोवंश का 100 फीसदी वैक्सीनेशन करवाएं। अगर किसी गांव में केस रिपोर्ट हुआ है तो वहां अभी वैक्सीनेशन न करवाएं, आसपास के गांवों में करवाएं। अगर किसी गांव में हमारा स्टाफ नहीं पहुंचता है तो नजदीकी पशु चिकित्सा अधिकारी को सूचना दें, ताकि जल्दी वैक्सीनेशन हो सके।
- डॉ. केएल शर्मा, सहायक निदेशक, पशुपालन विभाग