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Bilaspur News: श्रीमद्भागवत गीता से बच्चे सीख सकेंगे जीवन जीने की कला

Mon, 08 Jul 2024 11:38 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 08 Jul 2024 11:38 PM IST
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- Unique initiative of Sanskar Sanstha, gifting Shrimad Bhagwat Geeta to meritorious students as awards, Ghumarwin
-संस्कार संस्था की अनूठी पहल, मेधावी छात्रों को पुरस्कार के रूप में श्रीमद्भागवत गीता कर रहे भेंट
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संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। बच्चों को जीवन का आधार सीखने के लिए श्रीमद्भागवत गीता अहम भूमिका निभाएगी। समाज में लोग जीवन के अंतिम क्षणों में इसका पाठ करते हैं, लेकिन बच्चे इसका स्कूल समय में अध्ययन करेंगे, तो वो जीवन जीने की सही कला सीख पाएंगे। पिछले 16 साल से सामाजिक कार्य कर रही संस्कार संस्था ने अनूठी पहल शुरू की। जहां बच्चों को इनाम के रूप में स्मृति चिह्न और पैसे दिए जाते थे, वहीं संस्था ने संस्कार उत्सव से मेधावी बच्चों को श्रीमद्भागवत गीता देने की पहल शुरू की है। संस्था ने समाज के लिए एक बेहतरीन उदाहरण भी पेश किया।
संस्कार संस्था के संस्थापक महेंद्र धर्माणी ने कहा कि चिट्टे जैसे नशे के खिलाफ संस्था की ओर से चलाए गए अभियान में लोगों को जिस तरह से अपने साथ जोड़ा है और इस मुहिम को सफल बनाया है। यह संस्था का समाज के प्रति अपने कर्तव्य परायणता व निष्ठा को दर्शाता है। संस्कार उत्सव छात्रों को पुरस्कार के रूप में श्रीमद्भागवत गीता भेंट कर एक नई प्रथा शुरू की गई है। इससे बच्चों को अपने धर्म, संस्कार और संस्कृति के प्रति जोड़ने का मौका मिलेगा। विचार, संस्कार, सरोकार का ध्येय लेकर आगे बढ़ने के लिए संस्था श्रीमद्भागवत गीता के उपदेश को बड़ों से लेकर बच्चों तक पहुंचाना चाहती है। अगर बाल्यावस्था से ही बच्चों को श्रीमद् भागवत गीता के उपदेशों को पढ़ाया और सुनाया जाए तो उनके भविष्य की नींव और मजबूत हो सकती है और वह खुद को बेहतर बनाकर सफलता हासिल कर सकते हैं। आज जिस तरह चिट्टे जैसा नशे का जहर पूरे समाज में फैल चुका है, इससे भी तभी छुटकारा मिलेगा, जब बच्चे शुरू से ही अपने धर्म, संस्कृति और कर्तव्यों को समझेंगे।
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धर्माणी ने कहा कि गीता में कर्म को प्रधान बताया गया है। संस्था का मानना है कि गीता सही मायने में जीवन जीने का संदेश देती है। अक्सर आदमी के अंतिम समय में गीता पढ़ने का एक प्रथा बनाई गई है, जबकि गीता को बचपन से ही स्कूली शिक्षा में शामिल करना चाहिए।
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चिट्टा के खिलाफ भी चलाया है अभियान
संस्कार संस्था 2008 से निरंतर विभिन्न गतिविधियां आयोजित कर रही है। इसके माध्यम से समाज में विभिन्न विषयों पर जागरुकता और जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाई में सहयोग,जलसंरक्षण, रक्तदान,पौधरोपण, संस्कृति और परंपरा के संवर्धन के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करती रही है। वहीं, वर्तमान में घुमारवीं अगेंस्ट चिट्टा अभियान के जरिए युवाओं और समाज को एकजुट कर नशे के प्रति जागरूक करने का कार्य कर रही है। इसमें अब तक संस्था घुमारवीं विकासखंड की 26 पंचायतों के 47 से अधिक गांवों में जागरुकता बैठक कर चुकी है, जिसमें अभिभावक, बच्चे, पंचायत प्रतिनिधि, युवक मंडल व महिला मंडलों के सदस्य हजारों की संख्या में सहभागी हुए हैं।
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