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Bilaspur News: टनल प्रभावितों ने सरकार से की हस्तक्षेप की मांग
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बध्यात में टनल के बाहर धरने पर बैठे प्रभावित। स्रोत: प्रभावित
नोग बध्यात में 199वें दिन भी जारी रहा संघर्ष
प्रशासनिक उदासीनता से आक्रोश, बोले-जब तक कार्रवाई नहीं, धरना रहेगा जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भानुपल्ली-बिलासपुर रेल लाइन की टनल नंबर 17, नोग बध्यात में ग्रामीणों का संघर्ष रविवार को 199वें दिन में पहुंच गया। वहीं क्रमिक भूख हड़ताल भी 176वें दिन जारी रही। लगभग सात महीनों से लगातार धरना दे रहे प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनकी समस्या गंभीर है, लेकिन प्रशासन की चुप्पी उनकी पीड़ा को और बढ़ा रही है।
रविवार को धरने पर रामलाल, रूप लाल, बंटी देवी, मीना देवी और कौशल्या देवी बैठे रहे। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि टनल निर्माण के कारण उनके घर, जमीन और जीवन प्रभावित हुए हैं। कई बार प्रशासन को ज्ञापन और आग्रह भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक किसी भी अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर समस्याओं का समाधान करने की कोशिश नहीं की।
ग्रामीणों ने कहा कि 199 दिनों का यह धरना सिर्फ उनके संघर्ष की मजबूरी नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक बन गया है। लगातार 176 दिन से क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठना आसान नहीं, लेकिन मजबूरी में उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है।
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प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि गरीब परिवारों की समस्याओं को जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि यही मामला किसी प्रभावशाली व्यक्ति से जुड़ा होता, तो इतने लंबे इंतजार की नौबत नहीं आती। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक धरना और भूख हड़ताल जारी रहेगी। उन्होंने प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की, ताकि प्रभावित परिवारों को राहत मिल सके।
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प्रशासनिक उदासीनता से आक्रोश, बोले-जब तक कार्रवाई नहीं, धरना रहेगा जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भानुपल्ली-बिलासपुर रेल लाइन की टनल नंबर 17, नोग बध्यात में ग्रामीणों का संघर्ष रविवार को 199वें दिन में पहुंच गया। वहीं क्रमिक भूख हड़ताल भी 176वें दिन जारी रही। लगभग सात महीनों से लगातार धरना दे रहे प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनकी समस्या गंभीर है, लेकिन प्रशासन की चुप्पी उनकी पीड़ा को और बढ़ा रही है।
रविवार को धरने पर रामलाल, रूप लाल, बंटी देवी, मीना देवी और कौशल्या देवी बैठे रहे। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि टनल निर्माण के कारण उनके घर, जमीन और जीवन प्रभावित हुए हैं। कई बार प्रशासन को ज्ञापन और आग्रह भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक किसी भी अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर समस्याओं का समाधान करने की कोशिश नहीं की।
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ग्रामीणों ने कहा कि 199 दिनों का यह धरना सिर्फ उनके संघर्ष की मजबूरी नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक बन गया है। लगातार 176 दिन से क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठना आसान नहीं, लेकिन मजबूरी में उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है।
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प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि गरीब परिवारों की समस्याओं को जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि यही मामला किसी प्रभावशाली व्यक्ति से जुड़ा होता, तो इतने लंबे इंतजार की नौबत नहीं आती। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक धरना और भूख हड़ताल जारी रहेगी। उन्होंने प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की, ताकि प्रभावित परिवारों को राहत मिल सके।