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Bilaspur News: लोगों को सुनाई परीक्षित की जन्म कथा
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-अच्छे कार्य करना ही प्रभु की सच्ची सेवा : पंकज
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। विकासखंड झंडूता की ग्राम पंचायत बड़गांव के बंग्यारियां में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में व्यास आचार्य पंकज शर्मा ने परीक्षित की जन्म कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि जब राजा परीक्षित माता के गर्भ में थे उसी समय अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग उनकी मां उत्तरा के गर्भ पर किया।
कथावाचक ने बताया कि उत्तरा ने भगवान श्री कृष्ण को पुकारा। भगवान श्रीकृष्ण ने उत्तरा के गर्भ की स्वयं रक्षा की। जब परीक्षित पैदा हुआ, उसी समय वह उठकर बैठ गया। जो भी नवजात परीक्षित को उठकर अपनी गोद में बिठाने का प्रयास करता वह उदास होकर बैठ जाता, लेकिन जैसे ही श्री कृष्ण ने नवजात परीक्षित को अपनी गोद में उठाया तो वह जोर-जोर से हंसने लगा। विद्वानों ने नवजात शिशु का नाम परीक्षित रखा, क्योंकि भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं ही इस बच्चे की मां के गर्भ में रक्षा की थी। उन्होंने कहा कि कलयुग राजा परीक्षित की शरणागति हो गया है, इसलिए उसे क्षमा कर दीजिए। कलयुग ने अपने रहने के स्थान को मांगा तो राजा ने चार स्थान दिए। पहला स्थान जुआ क्रीड़ा, दूसरा शराब खाना, तीसरा वैश्य स्थल दिए। तीनों स्थानों के बारे में सुनकर कलयुग ने राजा परीक्षित से कोई अच्छा स्थान प्रदान करने को कहा। इस पर राजा के मुख से चौथे स्थान का नाम सोना निकल गया। उन्होंने कहा कि आज के समय में प्रत्येक व्यक्ति को अच्छे और पुण्य के कार्य करने चाहिए। अच्छे कार्य करना ही प्रभु की सच्ची सेवा है। इस अवसर पर निर्मल गौतम, बीना गौतम, हंसराज गौतम, मदनलाल, संजीव गौतम, सुनील गौतम, ऋषि राम गौतम, विनय गौतम, राजेंद्र गौतम सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। विकासखंड झंडूता की ग्राम पंचायत बड़गांव के बंग्यारियां में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में व्यास आचार्य पंकज शर्मा ने परीक्षित की जन्म कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि जब राजा परीक्षित माता के गर्भ में थे उसी समय अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग उनकी मां उत्तरा के गर्भ पर किया।
कथावाचक ने बताया कि उत्तरा ने भगवान श्री कृष्ण को पुकारा। भगवान श्रीकृष्ण ने उत्तरा के गर्भ की स्वयं रक्षा की। जब परीक्षित पैदा हुआ, उसी समय वह उठकर बैठ गया। जो भी नवजात परीक्षित को उठकर अपनी गोद में बिठाने का प्रयास करता वह उदास होकर बैठ जाता, लेकिन जैसे ही श्री कृष्ण ने नवजात परीक्षित को अपनी गोद में उठाया तो वह जोर-जोर से हंसने लगा। विद्वानों ने नवजात शिशु का नाम परीक्षित रखा, क्योंकि भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं ही इस बच्चे की मां के गर्भ में रक्षा की थी। उन्होंने कहा कि कलयुग राजा परीक्षित की शरणागति हो गया है, इसलिए उसे क्षमा कर दीजिए। कलयुग ने अपने रहने के स्थान को मांगा तो राजा ने चार स्थान दिए। पहला स्थान जुआ क्रीड़ा, दूसरा शराब खाना, तीसरा वैश्य स्थल दिए। तीनों स्थानों के बारे में सुनकर कलयुग ने राजा परीक्षित से कोई अच्छा स्थान प्रदान करने को कहा। इस पर राजा के मुख से चौथे स्थान का नाम सोना निकल गया। उन्होंने कहा कि आज के समय में प्रत्येक व्यक्ति को अच्छे और पुण्य के कार्य करने चाहिए। अच्छे कार्य करना ही प्रभु की सच्ची सेवा है। इस अवसर पर निर्मल गौतम, बीना गौतम, हंसराज गौतम, मदनलाल, संजीव गौतम, सुनील गौतम, ऋषि राम गौतम, विनय गौतम, राजेंद्र गौतम सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।
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