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तीसा नाट्य विवाद : छात्रों-शिक्षकों पर कार्रवाई के विरोध में उतरी राजपूत महासभा
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कहा- रचनात्मक प्रस्तुति को विवाद बनाकर निशाना न बनाया जाए
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। चंबा के तीसा स्थित नाट्य प्रस्तुति को लेकर उठे विवाद के बीच राजपूत महासभा हिमाचल प्रदेश ने छात्रों, शिक्षकों के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई का विरोध किया है। शनिवार को बिलासपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रदेश महासचिव विजय चंदेल और युवा विंग के प्रदेश अध्यक्ष अनिल ठाकुर ने संयुक्त रूप से कहा कि सरकार इस मामले में किसी भी प्रकार की अनुचित कार्रवाई से बचे।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की ओर से सामाजिक मेले में प्रस्तुत किया गया नाटक समाज में प्रचलित आरक्षण व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं को रचनात्मक तरीके से सामने रखने का प्रयास था। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सामाजिक विषयों पर विचार व्यक्त करना तथा नाटक, साहित्य और अन्य सांस्कृतिक माध्यमों के जरिए जन-जागरूकता फैलाना संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है। महासभा के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ लोग प्रशासन और सरकार पर स्कूल प्रबंधन व शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई का दबाव बना रहे हैं, जो उचित नहीं है। उनका कहना था कि किसी भी रचनात्मक प्रस्तुति को विवाद का विषय बनाकर विद्यार्थियों और शिक्षकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य किसी वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि सामाजिक संवाद को आगे बढ़ाना है। राजपूत महासभा ने चेतावनी दी कि यदि छात्रों, शिक्षकों या विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ अन्यायपूर्ण कार्रवाई की जाती है तो संगठन लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक दायरे में रहकर जिला स्तर पर धरना-प्रदर्शन सहित आगे की रणनीति तय करेगा। साथ ही प्रदेश के जनप्रतिनिधियों से भी इस मामले में निष्पक्ष रुख स्पष्ट करने की अपील की गई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। चंबा के तीसा स्थित नाट्य प्रस्तुति को लेकर उठे विवाद के बीच राजपूत महासभा हिमाचल प्रदेश ने छात्रों, शिक्षकों के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई का विरोध किया है। शनिवार को बिलासपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रदेश महासचिव विजय चंदेल और युवा विंग के प्रदेश अध्यक्ष अनिल ठाकुर ने संयुक्त रूप से कहा कि सरकार इस मामले में किसी भी प्रकार की अनुचित कार्रवाई से बचे।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की ओर से सामाजिक मेले में प्रस्तुत किया गया नाटक समाज में प्रचलित आरक्षण व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं को रचनात्मक तरीके से सामने रखने का प्रयास था। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सामाजिक विषयों पर विचार व्यक्त करना तथा नाटक, साहित्य और अन्य सांस्कृतिक माध्यमों के जरिए जन-जागरूकता फैलाना संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है। महासभा के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ लोग प्रशासन और सरकार पर स्कूल प्रबंधन व शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई का दबाव बना रहे हैं, जो उचित नहीं है। उनका कहना था कि किसी भी रचनात्मक प्रस्तुति को विवाद का विषय बनाकर विद्यार्थियों और शिक्षकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य किसी वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि सामाजिक संवाद को आगे बढ़ाना है। राजपूत महासभा ने चेतावनी दी कि यदि छात्रों, शिक्षकों या विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ अन्यायपूर्ण कार्रवाई की जाती है तो संगठन लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक दायरे में रहकर जिला स्तर पर धरना-प्रदर्शन सहित आगे की रणनीति तय करेगा। साथ ही प्रदेश के जनप्रतिनिधियों से भी इस मामले में निष्पक्ष रुख स्पष्ट करने की अपील की गई।
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