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Bilaspur News: गोशाला हार में तीन दिवसीय यज्ञोपवीत अनुष्ठान शुरू
Sun, 19 Apr 2026 11:21 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sun, 19 Apr 2026 11:21 PM IST
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गोशाला हार में आयोजित यज्ञोपवीत (जनेऊ) अनुष्ठान में मौजूद बच्चे। संवाद
100 से अधिक बच्चे अनुष्ठान में ले रहे भाग
संवाद न्यूज एजेंसी
गेहड़वीं (बिलासपुर)। झंडूता उपमंडल के गोशाला हार स्थित स्थानीय गोशाला परिसर में तीन दिवसीय यज्ञोपवीत (जनेऊ) अनुष्ठान का शुभारंभ हुआ। आचार्य शेखर भारद्वाज के सान्निध्य में हुए धार्मिक आयोजन में 100 से अधिक छोटे बच्चों ने भाग लेकर यज्ञोपवीत संस्कार ग्रहण किया।
अनुष्ठान में समोह क्षेत्र से करीब 20 लोगों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम के दौरान आचार्य शेखर भारद्वाज बच्चों को प्राचीन भारतीय संस्कृति, अच्छे संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों की शिक्षा देंगे। यह अनुष्ठान तीन दिनों तक चलेगा, जिसमें विभिन्न धार्मिक क्रियाएं, मंत्रोच्चारण और प्रवचन होंगे। आचार्य ने बताया कि ऐसे अनुष्ठानों का उद्देश्य बच्चों को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ना है, ताकि वे एक संस्कारी और जिम्मेदार नागरिक बन सकें। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को नशे और सामाजिक विकृतियों से दूर रखने के लिए इस प्रकार के आयोजन अत्यंत आवश्यक हैं। आयोजकों के अनुसार इस तरह के धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गेहड़वीं (बिलासपुर)। झंडूता उपमंडल के गोशाला हार स्थित स्थानीय गोशाला परिसर में तीन दिवसीय यज्ञोपवीत (जनेऊ) अनुष्ठान का शुभारंभ हुआ। आचार्य शेखर भारद्वाज के सान्निध्य में हुए धार्मिक आयोजन में 100 से अधिक छोटे बच्चों ने भाग लेकर यज्ञोपवीत संस्कार ग्रहण किया।
अनुष्ठान में समोह क्षेत्र से करीब 20 लोगों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम के दौरान आचार्य शेखर भारद्वाज बच्चों को प्राचीन भारतीय संस्कृति, अच्छे संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों की शिक्षा देंगे। यह अनुष्ठान तीन दिनों तक चलेगा, जिसमें विभिन्न धार्मिक क्रियाएं, मंत्रोच्चारण और प्रवचन होंगे। आचार्य ने बताया कि ऐसे अनुष्ठानों का उद्देश्य बच्चों को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ना है, ताकि वे एक संस्कारी और जिम्मेदार नागरिक बन सकें। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को नशे और सामाजिक विकृतियों से दूर रखने के लिए इस प्रकार के आयोजन अत्यंत आवश्यक हैं। आयोजकों के अनुसार इस तरह के धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
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