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विमल नेगी मामले में दोषियों को बचाने की कोशिश कर रही प्रदेश सरकार : रणधीर
Sat, 31 May 2025 11:25 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sat, 31 May 2025 11:25 PM IST
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भाजपा विधायक बोले, सरकार की मंशा ठीक नहीं, सीबीआई जांच से बचना चाहती है
सरकार की अधिकारियों पर नहीं पकड़, इस्तीफा दें मुख्यमंत्री
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। श्री नयनादेवी जी के विधायक रणधीर शर्मा ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस की प्रदेश सरकार विमल नेगी की मौत के मामले में दोषियों को बचाने की कोशिश कर रही है। सरकार की मंशा ठीक नहीं और सीबीआई जांच से बचना चाहती है। इस मामले में आज सरकार पूरी तरह से कटघरे में खड़ी है। सरकार जांच करने के बजाय अधिकारियों को छुट्टी पर भेज कर लीपापोती कर रही है। सरकार की न तो अधिकारियों और न ही कर्मचारियों पकड़ है। यह सब जिम्मेदारी मुख्यमंत्री की है, इसलिए वह इस्तीफा दें।
परिधि गृह बिलासपुर में प्रेस वार्ता में रणधीर शर्मा ने कहा कि विमल नेगी ऊना के पेखूबेला सौर ऊर्जा परियोजना कार्य देख रहे थे। 32 केवी के इस प्लांट पर 230 करोड़ रुपये खर्च हुए। जबकि गुजरात में ऐसा ही प्रोजेक्ट 130 करोड़ रुपये में बन गया। पेखूबेला परियोजना में 100 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। विमल नेगी पर भ्रष्टाचार के इस पैसे को कागजों में दबाने का दबाव बनाया जा रहा था। इसी दबाव से वह मानसिक रूप से परेशान हो चुके थे। 18 मार्च को नेगी का शव बिलासपुर में मिला। अगले दिन पोस्टमार्टम हुआ तब भी विभाग के उच्च अधिकारी परिजनों से पहले एम्स बिलासपुर पहुंच कर डॉक्टरों बात करते हुए दिखे। सरकार ने इस मामले में एफआईआर दर्ज भी नहीं की। जब परिजनों ने धरना दिया, उसके बाद एफआईआर दर्ज की गई। उसमें भी आरोपी अधिकारी का नाम नहीं लिखा। फिर पता चला कि विमल नेगी का पेन ड्राइव भी गायब हो गया है। भाजपा ने सीबीआई जांच की मांग की। तब मुख्यमंत्री ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया। अब उस जांच का नतीजा सबके सामने है।
इसके बाद विमल नेगी के परिजनों ने सीबीआई जांच की मांग को लेकर हाई कोर्ट में पिटीशन डाली, लेकिन सरकार के वकील ने उसका भी विरोध किया। जब शिमला एसपी और डीजीपी आमने-सामने हुए, तब जाकर कोर्ट ने जांच के आदेश दिए। मुख्यमंत्री ने कुछ दिन पहले कहा कि सीबीआई जांच के खिलाफ अपील दायर नहीं करेंगे, लेकिन विमल नेगी की मौत की जांच करने वाली एसआईटी के संयोजक एसपी शिमला ने कोर्ट में अपील दायर कर दी। एसपी शिमला सरकार के कहने पर सब कुछ कर रहे हैं। यह सरकार सीबीआई जांच से बचना चाहती है। सीबीआई जांच का विरोध करने ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार की मंशा ठीक नहीं है। यह मामला सरकार की कुव्यवस्था का उदाहरण है, जिसमें एक अधिकारी की बलि दे दी गई। यदि सरकार खुद को संवेदनशील मानती है तो वह सीबीआई जांच का समर्थन करे और जिम्मेदारी ले कि सबूतों से कोई छेड़छाड़ नहीं होगी। भाजपा यह भी मांग करती है कि एसपी शिमला ने डीजीपी और मुख्य सचिव पर जो आरोप लगाए है, उनकी भी जांच की जाए।
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सरकार की अधिकारियों पर नहीं पकड़, इस्तीफा दें मुख्यमंत्री
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। श्री नयनादेवी जी के विधायक रणधीर शर्मा ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस की प्रदेश सरकार विमल नेगी की मौत के मामले में दोषियों को बचाने की कोशिश कर रही है। सरकार की मंशा ठीक नहीं और सीबीआई जांच से बचना चाहती है। इस मामले में आज सरकार पूरी तरह से कटघरे में खड़ी है। सरकार जांच करने के बजाय अधिकारियों को छुट्टी पर भेज कर लीपापोती कर रही है। सरकार की न तो अधिकारियों और न ही कर्मचारियों पकड़ है। यह सब जिम्मेदारी मुख्यमंत्री की है, इसलिए वह इस्तीफा दें।
परिधि गृह बिलासपुर में प्रेस वार्ता में रणधीर शर्मा ने कहा कि विमल नेगी ऊना के पेखूबेला सौर ऊर्जा परियोजना कार्य देख रहे थे। 32 केवी के इस प्लांट पर 230 करोड़ रुपये खर्च हुए। जबकि गुजरात में ऐसा ही प्रोजेक्ट 130 करोड़ रुपये में बन गया। पेखूबेला परियोजना में 100 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। विमल नेगी पर भ्रष्टाचार के इस पैसे को कागजों में दबाने का दबाव बनाया जा रहा था। इसी दबाव से वह मानसिक रूप से परेशान हो चुके थे। 18 मार्च को नेगी का शव बिलासपुर में मिला। अगले दिन पोस्टमार्टम हुआ तब भी विभाग के उच्च अधिकारी परिजनों से पहले एम्स बिलासपुर पहुंच कर डॉक्टरों बात करते हुए दिखे। सरकार ने इस मामले में एफआईआर दर्ज भी नहीं की। जब परिजनों ने धरना दिया, उसके बाद एफआईआर दर्ज की गई। उसमें भी आरोपी अधिकारी का नाम नहीं लिखा। फिर पता चला कि विमल नेगी का पेन ड्राइव भी गायब हो गया है। भाजपा ने सीबीआई जांच की मांग की। तब मुख्यमंत्री ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया। अब उस जांच का नतीजा सबके सामने है।
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इसके बाद विमल नेगी के परिजनों ने सीबीआई जांच की मांग को लेकर हाई कोर्ट में पिटीशन डाली, लेकिन सरकार के वकील ने उसका भी विरोध किया। जब शिमला एसपी और डीजीपी आमने-सामने हुए, तब जाकर कोर्ट ने जांच के आदेश दिए। मुख्यमंत्री ने कुछ दिन पहले कहा कि सीबीआई जांच के खिलाफ अपील दायर नहीं करेंगे, लेकिन विमल नेगी की मौत की जांच करने वाली एसआईटी के संयोजक एसपी शिमला ने कोर्ट में अपील दायर कर दी। एसपी शिमला सरकार के कहने पर सब कुछ कर रहे हैं। यह सरकार सीबीआई जांच से बचना चाहती है। सीबीआई जांच का विरोध करने ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार की मंशा ठीक नहीं है। यह मामला सरकार की कुव्यवस्था का उदाहरण है, जिसमें एक अधिकारी की बलि दे दी गई। यदि सरकार खुद को संवेदनशील मानती है तो वह सीबीआई जांच का समर्थन करे और जिम्मेदारी ले कि सबूतों से कोई छेड़छाड़ नहीं होगी। भाजपा यह भी मांग करती है कि एसपी शिमला ने डीजीपी और मुख्य सचिव पर जो आरोप लगाए है, उनकी भी जांच की जाए।
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