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Bilaspur News: किसानों की उम्मीदों के मुताबिक नहीं बरसे बादल
Sun, 15 Mar 2026 11:12 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sun, 15 Mar 2026 11:12 PM IST
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बिलासपुर शहर में आसमान पर छाए बादल। संवाद
जिले में अलग-अलग स्थानों पर हुई हल्की बारिश
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी (बिलासपुर)। जिले में रविवार को अलग-अलग स्थानों पर हुई हल्की बारिश हुई। किसानों को उम्मीद थी कि अच्छी बारिश होगी, जिससे उन्हें राहत मिलेगी, लेकिन उम्मीद के अनुसार बारिश नहीं हुई है।
जिले में सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहे और हवाएं चलती रहीं। दोपहर बाद विभिन्न स्थानों पर हल्की बारिश शुरू हुई। लंबे समय से किसान गेंहू सहित अन्य फसलों के लिए बारिश का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि शाम तक आसमान में बादल छाए रहे। बारिश न होने से खेतों की नमी खत्म हो रही है। जिले में खेती मुख्य आजीविका का साधन है और करीब 57,822 किसान परिवार प्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर हैं। जिले में कुल 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खेती होती है, जिसमें से केवल 6,500 हेक्टेयर भूमि पर ही सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है। शेष 20,500 हेक्टेयर भूमि पूरी तरह वर्षा आधारित है। बारिश न होने का सबसे अधिक असर इन्हीं गैर-सिंचित क्षेत्रों में देखने को मिलता है। किसानों में संजीव, रामलाल, रामलोक, देशराज, प्रीतम, विजय, विपिन, सुरेंद्र और कुलदीप ने बताया कि बारिश न होने से फसल पैदावार कम होगी। पहले भी समय से बारिश न होने से परेशानी हुई है। यदि उम्मीद के अनुसार बारिश नहीं हुई तो फसल खराब होगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी (बिलासपुर)। जिले में रविवार को अलग-अलग स्थानों पर हुई हल्की बारिश हुई। किसानों को उम्मीद थी कि अच्छी बारिश होगी, जिससे उन्हें राहत मिलेगी, लेकिन उम्मीद के अनुसार बारिश नहीं हुई है।
जिले में सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहे और हवाएं चलती रहीं। दोपहर बाद विभिन्न स्थानों पर हल्की बारिश शुरू हुई। लंबे समय से किसान गेंहू सहित अन्य फसलों के लिए बारिश का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि शाम तक आसमान में बादल छाए रहे। बारिश न होने से खेतों की नमी खत्म हो रही है। जिले में खेती मुख्य आजीविका का साधन है और करीब 57,822 किसान परिवार प्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर हैं। जिले में कुल 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खेती होती है, जिसमें से केवल 6,500 हेक्टेयर भूमि पर ही सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है। शेष 20,500 हेक्टेयर भूमि पूरी तरह वर्षा आधारित है। बारिश न होने का सबसे अधिक असर इन्हीं गैर-सिंचित क्षेत्रों में देखने को मिलता है। किसानों में संजीव, रामलाल, रामलोक, देशराज, प्रीतम, विजय, विपिन, सुरेंद्र और कुलदीप ने बताया कि बारिश न होने से फसल पैदावार कम होगी। पहले भी समय से बारिश न होने से परेशानी हुई है। यदि उम्मीद के अनुसार बारिश नहीं हुई तो फसल खराब होगी।
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