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Bilaspur News: बरसात में मांडवा पुल पर जिंदगी का सफर जोखिम भरा
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प्रेम सिंह ठाकुर
भूस्खलन से बंद होती सड़क, झंडूता क्षेत्र की आधी आबादी को झेलनी पड़ती है परेशानी
पहाड़ियों से गिरती चट्टानों के चलते हर साल बंद होता है मार्ग
सुभाष कपिल
झंडूता (बिलासपुर)। झंडूता विधानसभा क्षेत्र में मानसून का मतलब सिर्फ बारिश नहीं, बल्कि मांडवा पुल पर मंडराने वाला खतरा भी है। जैसे ही तेज बारिश शुरू होती है, मांडवा पुल के दोनों ओर की कमजोर पहाड़ियों से मलबा, पत्थर और भारी-भरकम चट्टानें गिरने लगती हैं। हालात ऐसे बन जाते हैं कि प्रशासन को लोगों की सुरक्षा के लिए सड़क बंद करनी पड़ती है। इसका खामियाजा झंडूता विधानसभा क्षेत्र की आधी से अधिक आबादी को भुगतना पड़ता है। यह स्थिति कोई नई नहीं है। हर साल बरसात के मौसम में यही कहानी दोहराई जाती है। सड़क बंद होते ही जिला मुख्यालय बिलासपुर से झंडूता, शाहतलाई, भड़ोलीकलां और बड़सर क्षेत्र का सीधा संपर्क प्रभावित हो जाता है। मरीजों को अस्पताल पहुंचने, विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेज जाने, कर्मचारियों को कार्यालय पहुंचने और किसानों को अपनी उपज बाजार तक ले जाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मांडवा पुल बंद होने पर लोगों को बलघाड़-धराड़-प्राहु-पिपलूघाट-भल्लू-बिल्लौर या झंडूता-ज्योरा-नंद नगराओं पुल-कोटधार जैसे वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ता है। इन रास्तों से 10 से 12 किलोमीटर अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है। संकरे और घुमावदार इन मार्गों पर समय भी अधिक लगता है और परिवहन खर्च भी बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन हर साल सड़क बंद कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान आज तक नहीं हो पाया। पहाड़ियों को सुरक्षित बनाने और भूस्खलन रोकने के दावे वर्षों से किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति नहीं बदली। पिछले वर्ष भल्लू पुल के समीप हुए दर्दनाक बस हादसे, जिसमें 16 लोगों की जान चली गई थी, ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। इसके बाद भी मांडवा पुल क्षेत्र में सुरक्षा के स्थायी इंतजाम नहीं हो सके। हल्की बारिश में भी पहाड़ियों से पत्थर गिरने लगते हैं, जिससे हर गुजरने वाला वाहन चालक दहशत में रहता है।
वर्ष 1998 में बने मांडवा पुल से क्षेत्र की आधे से अधिक आबादी लाभान्वित हो रही है, लेकिन पुल के दोनों ओर की पहाड़ियां आज भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। कई बार वाहन चट्टानों की चपेट में आ चुके हैं। सड़क किनारे लगे सुरक्षा बैरिकेड भी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। वहीं मलबा हटाने के दौरान लोक निर्माण विभाग के कर्मचारी और जेसीबी चालक भी हर बार जान जोखिम में डालकर काम करते हैं। इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए लोक निर्माण विभाग ने अब मांडवा पुल के साथ नए पुल और बाईपास सड़क का प्रस्ताव तैयार किया है। यदि सरकार से मंजूरी मिलती है तो बरसों से चली आ रही इस समस्या से लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। संवाद
सड़क बंद होते ही जिला मुख्यालय से कट जाता है पूरा क्षेत्र
सड़क बंद होते ही पूरा क्षेत्र जिला मुख्यालय से कट जाता है। मरीजों और स्कूली बच्चों को अतिरिक्त सफर कर परेशानी उठानी पड़ती है। हर साल यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो पाया।
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प्रेम सिंह ठाकुर, स्थानीय निवासी
बरसात में लोगों को करना पड़ता है अतिरिक्त सफर
मांडवा पुल क्षेत्र की समस्या का स्थायी समाधान नए पुल और बाईपास सड़क से ही संभव है। हर बरसात में लोगों को अतिरिक्त सफर करना पड़ता है, लेकिन समस्या अवगत कराने के बाद भी ज्यों की त्यों है।
उपेंद्र पाल, स्थानीय निवासी
कोट
लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। पहाड़ियों से लगातार खतरा बना हुआ है। विभाग ने नए पुल और बाईपास सड़क का प्रस्ताव सरकार को भेजा है। मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
ज्ञान चंद शर्मा, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग, झंडूता
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पहाड़ियों से गिरती चट्टानों के चलते हर साल बंद होता है मार्ग
सुभाष कपिल
झंडूता (बिलासपुर)। झंडूता विधानसभा क्षेत्र में मानसून का मतलब सिर्फ बारिश नहीं, बल्कि मांडवा पुल पर मंडराने वाला खतरा भी है। जैसे ही तेज बारिश शुरू होती है, मांडवा पुल के दोनों ओर की कमजोर पहाड़ियों से मलबा, पत्थर और भारी-भरकम चट्टानें गिरने लगती हैं। हालात ऐसे बन जाते हैं कि प्रशासन को लोगों की सुरक्षा के लिए सड़क बंद करनी पड़ती है। इसका खामियाजा झंडूता विधानसभा क्षेत्र की आधी से अधिक आबादी को भुगतना पड़ता है। यह स्थिति कोई नई नहीं है। हर साल बरसात के मौसम में यही कहानी दोहराई जाती है। सड़क बंद होते ही जिला मुख्यालय बिलासपुर से झंडूता, शाहतलाई, भड़ोलीकलां और बड़सर क्षेत्र का सीधा संपर्क प्रभावित हो जाता है। मरीजों को अस्पताल पहुंचने, विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेज जाने, कर्मचारियों को कार्यालय पहुंचने और किसानों को अपनी उपज बाजार तक ले जाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मांडवा पुल बंद होने पर लोगों को बलघाड़-धराड़-प्राहु-पिपलूघाट-भल्लू-बिल्लौर या झंडूता-ज्योरा-नंद नगराओं पुल-कोटधार जैसे वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ता है। इन रास्तों से 10 से 12 किलोमीटर अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है। संकरे और घुमावदार इन मार्गों पर समय भी अधिक लगता है और परिवहन खर्च भी बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन हर साल सड़क बंद कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान आज तक नहीं हो पाया। पहाड़ियों को सुरक्षित बनाने और भूस्खलन रोकने के दावे वर्षों से किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति नहीं बदली। पिछले वर्ष भल्लू पुल के समीप हुए दर्दनाक बस हादसे, जिसमें 16 लोगों की जान चली गई थी, ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। इसके बाद भी मांडवा पुल क्षेत्र में सुरक्षा के स्थायी इंतजाम नहीं हो सके। हल्की बारिश में भी पहाड़ियों से पत्थर गिरने लगते हैं, जिससे हर गुजरने वाला वाहन चालक दहशत में रहता है।
वर्ष 1998 में बने मांडवा पुल से क्षेत्र की आधे से अधिक आबादी लाभान्वित हो रही है, लेकिन पुल के दोनों ओर की पहाड़ियां आज भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। कई बार वाहन चट्टानों की चपेट में आ चुके हैं। सड़क किनारे लगे सुरक्षा बैरिकेड भी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। वहीं मलबा हटाने के दौरान लोक निर्माण विभाग के कर्मचारी और जेसीबी चालक भी हर बार जान जोखिम में डालकर काम करते हैं। इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए लोक निर्माण विभाग ने अब मांडवा पुल के साथ नए पुल और बाईपास सड़क का प्रस्ताव तैयार किया है। यदि सरकार से मंजूरी मिलती है तो बरसों से चली आ रही इस समस्या से लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। संवाद
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सड़क बंद होते ही जिला मुख्यालय से कट जाता है पूरा क्षेत्र
सड़क बंद होते ही पूरा क्षेत्र जिला मुख्यालय से कट जाता है। मरीजों और स्कूली बच्चों को अतिरिक्त सफर कर परेशानी उठानी पड़ती है। हर साल यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो पाया।
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प्रेम सिंह ठाकुर, स्थानीय निवासी
बरसात में लोगों को करना पड़ता है अतिरिक्त सफर
मांडवा पुल क्षेत्र की समस्या का स्थायी समाधान नए पुल और बाईपास सड़क से ही संभव है। हर बरसात में लोगों को अतिरिक्त सफर करना पड़ता है, लेकिन समस्या अवगत कराने के बाद भी ज्यों की त्यों है।
उपेंद्र पाल, स्थानीय निवासी
कोट
लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। पहाड़ियों से लगातार खतरा बना हुआ है। विभाग ने नए पुल और बाईपास सड़क का प्रस्ताव सरकार को भेजा है। मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
ज्ञान चंद शर्मा, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग, झंडूता

प्रेम सिंह ठाकुर

प्रेम सिंह ठाकुर