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Bilaspur News: जिला परिषद चुनाव लड़ने के लिए आरोपी ने मांगी अंतरिम जमानत,कोर्ट ने की खारिज

Fri, 08 May 2026 11:54 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Fri, 08 May 2026 11:54 PM IST
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The accused sought interim bail to contest the Zila Parishad elections, but the court rejected it.
एक्सक्लूसिव
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अदालत से
बंबर ठाकुर गोलीकांड के आरोपी मनजीत सिंह नड्डा को अदालत से नहीं मिली राहत
आरोपी के खिलाफ पहले भी करीब 30 एफआईआर दर्ज, 17 से अधिक आपराधिक मामले
कोर्ट बोला, चुनाव लड़ना वैधानिक अधिकार, गंभीर मामलों में नहीं बन सकता जमानत का आधार
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बिलासपुर नविश भारद्वाज की अदालत ने सुनाया आदेश

सरोज पाठक
बिलासपुर। जिला परिषद बरमाणा वार्ड से पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अंतरिम जमानत मांग रहे बंबर ठाकुर गोलीकांड के आरोपी मनजीत सिंह नड्डा को अदालत से राहत नहीं मिली है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बिलासपुर नविश भारद्वाज की अदालत ने आरोपी की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि चुनाव लड़ने की इच्छा को गंभीर आपराधिक मामलों में अंतरिम जमानत का आधार नहीं बनाया जा सकता।

मनजीत सिंह नड्डा निवासी बिनौला, सदर बिलासपुर ने अदालत में दायर याचिका में कहा था कि पंचायत चुनाव 2026 घोषित हो चुके हैं और वह जिला परिषद सदस्य के लिए चुनाव लड़ना चाहता है। उसने दलील दी कि चुनाव लड़ना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है तथा वह लंबे समय से सामाजिक गतिविधियों से जुड़ा हुआ है। याचिका में यह भी कहा गया कि वह एक वर्ष से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में है और अभी तक मामले में आरोप तय नहीं हुए हैं। यह मामला 14 मार्च 2025 को सदर थाना बिलासपुर में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। शिकायतकर्ता विशाल चंदेल ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया था कि होली के दिन पूर्व विधायक बंबर ठाकुर के सरकारी आवास चंगर सेक्टर में चार लोग घुसे और दो लोगों ने पिस्तौल से फायरिंग की। इस घटना में विशाल चंदेल, बंबर ठाकुर और उनके पीएसओ को गोली लगी थी। पुलिस ने जांच के दौरान मनजीत सिंह नड्डा को 15 मार्च 2025 को गिरफ्तार किया था। राज्य सरकार की ओर से अदालत में दलील दी गई कि आरोपी पर गंभीर और संगठित आपराधिक साजिश के आरोप हैं। मामले में पहले भी नियमित जमानत याचिकाएं सत्र न्यायालय और हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट से खारिज हो चुकी हैं। अभियोजन पक्ष ने कहा कि चुनाव लड़ने की इच्छा को परिस्थितियों में बड़ा बदलाव नहीं माना जा सकता। अदालत ने आदेश में कहा कि आरोपी के खिलाफ पहले भी करीब 30 एफआईआर दर्ज हैं और वर्तमान में 17 से अधिक आपराधिक मामले लंबित हैं। अदालत ने माना कि आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड समाज में शांति और सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। आदेश में यह भी कहा गया कि ऐसे मामलों में रिहाई से गवाहों को प्रभावित करने और कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि चुनाव लड़ने का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं बल्कि वैधानिक अधिकार है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि गंभीर आपराधिक मामलों में केवल चुनाव लड़ने की इच्छा अंतरिम जमानत देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हो सकती। मनजीत सिंह नड्डा मार्च 2025 से न्यायिक हिरासत में है। मामले में पुलिस द्वारा दाखिल चालान के बाद ट्रायल की प्रक्रिया जारी है। अदालत ने कहा कि केवल लंबी हिरासत अपने आप में जमानत का आधार नहीं बनती, खासकर तब जब आरोप गंभीर प्रकृति के हों। संवाद
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