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Bilaspur News: जिले में इस साल 215 हेक्टेयर भूमि पर 25 हजार कंर्वटल अदरक उत्पादन का लक्ष्य
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झंडूता (बिलासपुर)। जिले में इस साल 25,00 क्विंटल अदरक उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। बिलासपुर में करीब छह हजार परिवार 215 हेक्टेयर भूमि पर अदरक की खेती करते हैं। जिले के ऊपरी क्षेत्रों में अप्रैल से मई और मध्य और निचले इलाकों में मध्य जून माह में किसान अदरक की बुआई कर देते हैं, जबकि अदरक को निकालने का उचित समय नवंबर से दिसंबर माह में होता है।
बिलासपुर जिले के अदरक की नकदी फसल से करीब छह हजार परिवार जुड़े हैं।
जिले के कुछ किसानों की आजीविका अदरक की खेती पर भी निर्भर है। जिले की कुल 215 हेक्टेयर भूमि, जिसमें विकास खंड घुमारवीं में 65, झंडूता में 60, सदर में 50 और स्वारघाट में 40 हेक्टेयर भूमि पर किसान अदरक की खेती करते हैं। वहीं, सालाना अदरक की पैदावार 22 से 25, 000 क्विंटल हो जाती है। बीते साल कृषि विभाग ने किसानों से 150 क्विंटल अदरक बीज 60 रुपये प्रति किलो के हिसाब से खरीदा था और किसानों को अदरक बीज अनुदान राशि पर 30 रुपये प्रति किलो के हिसाब से वितरित किया था।
किसानों के अनुसार अभी तक उन्हें 40 रुपये प्रति किलोग्राम दाम मिल रहे हैं। जिला कृषि अधिकारी राजीव शर्मा ने बताया कि किसान बीज वाले अदरक को दिसंबर माह में खातियों में जमा कर देते हैं। मार्च माह में जो किसान विभाग को बीज वाले अदरक को बेचते हैं, उन किसानों के घर द्वार के नजदीक बीज को लेकर चौधरी सरवन कुमार विश्वविद्यालय पालमपुर या कृषि विज्ञान केंद्र बरठीं में टेस्ट के लिए भेजता है, ताकि अदरक की राइजोबियम रौट की समस्या की पहचान की जा सके।
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बिलासपुर जिले के अदरक की नकदी फसल से करीब छह हजार परिवार जुड़े हैं।
जिले के कुछ किसानों की आजीविका अदरक की खेती पर भी निर्भर है। जिले की कुल 215 हेक्टेयर भूमि, जिसमें विकास खंड घुमारवीं में 65, झंडूता में 60, सदर में 50 और स्वारघाट में 40 हेक्टेयर भूमि पर किसान अदरक की खेती करते हैं। वहीं, सालाना अदरक की पैदावार 22 से 25, 000 क्विंटल हो जाती है। बीते साल कृषि विभाग ने किसानों से 150 क्विंटल अदरक बीज 60 रुपये प्रति किलो के हिसाब से खरीदा था और किसानों को अदरक बीज अनुदान राशि पर 30 रुपये प्रति किलो के हिसाब से वितरित किया था।
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किसानों के अनुसार अभी तक उन्हें 40 रुपये प्रति किलोग्राम दाम मिल रहे हैं। जिला कृषि अधिकारी राजीव शर्मा ने बताया कि किसान बीज वाले अदरक को दिसंबर माह में खातियों में जमा कर देते हैं। मार्च माह में जो किसान विभाग को बीज वाले अदरक को बेचते हैं, उन किसानों के घर द्वार के नजदीक बीज को लेकर चौधरी सरवन कुमार विश्वविद्यालय पालमपुर या कृषि विज्ञान केंद्र बरठीं में टेस्ट के लिए भेजता है, ताकि अदरक की राइजोबियम रौट की समस्या की पहचान की जा सके।
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