{"_id":"6add0124e38bb1a6bd05c354","slug":"students-were-taught-the-techniques-for-discovering-new-drugs-bilaspur-news-c-92-1-ssml1001-170584-2026-10-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bilaspur News: विद्यार्थियों को नई दवाओं की खोज की तकनीक बताई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bilaspur News: विद्यार्थियों को नई दवाओं की खोज की तकनीक बताई
विज्ञापन
शिवा इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी चांदपुर में आयोजित कार्यशाला में मौजूद प्रबंधन सदस्य व प्रशिक्षु।
शिवा इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी में कार्यशाला, मॉलिक्यूलर डॉकिंग की दी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शिवा इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी चांदपुर में एमफार्मेसी के विद्यार्थियों के लिए मॉलिक्यूलर डॉकिंग और ड्रग डिस्कवरी विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विद्यार्थियों को कंप्यूटर आधारित तकनीकों से नई दवाओं की खोज और संभावित औषधीय अणुओं की पहचान करने की प्रक्रिया समझाई गई।
कार्यशाला में चितकारा विश्वविद्यालय के फार्मास्यूटिकल केमिस्ट्री विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं असिस्टेंट डीन (एडमिनिस्ट्रेटिव) डॉ. सोमदत्त मुजावर मुख्य वक्ता रहे। उन्होंने मॉलिक्यूलर डॉकिंग की मूल अवधारणाओं और औषधि विकास में इसकी उपयोगिता के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि कंप्यूटर आधारित तकनीकों से दवाओं के अणुओं और जैविक लक्ष्यों के बीच होने वाली अंतःक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। इससे नई दवाओं के विकास के शुरुआती चरण में संभावित औषधीय अणुओं का मूल्यांकन करने में मदद मिलती है। कार्यशाला में विद्यार्थियों ने डॉकिंग प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से भी समझा।
विज्ञापन
डॉ. मुजावर ने कहा कि आधुनिक औषधि अनुसंधान में कंप्यूटेशनल तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इनका ज्ञान विद्यार्थियों को शोध परियोजनाओं और फार्मास्यूटिकल अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने में मदद करेगा।
संस्थान की प्रधानाचार्या डॉ. ईशा रानी ने कहा कि विद्यार्थियों के व्यावहारिक और अनुसंधान कौशल को विकसित करने के लिए ऐसी कार्यशालाएं जरूरी हैं। कार्यशाला में डॉ. सन्नी धीमान, डॉ. पूनम शर्मा, सुश्री अंकिता शर्मा, मंजू देवी, मनीषा और अदिति शर्मा सहित अन्य फैकल्टी सदस्य और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शिवा इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी चांदपुर में एमफार्मेसी के विद्यार्थियों के लिए मॉलिक्यूलर डॉकिंग और ड्रग डिस्कवरी विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विद्यार्थियों को कंप्यूटर आधारित तकनीकों से नई दवाओं की खोज और संभावित औषधीय अणुओं की पहचान करने की प्रक्रिया समझाई गई।
कार्यशाला में चितकारा विश्वविद्यालय के फार्मास्यूटिकल केमिस्ट्री विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं असिस्टेंट डीन (एडमिनिस्ट्रेटिव) डॉ. सोमदत्त मुजावर मुख्य वक्ता रहे। उन्होंने मॉलिक्यूलर डॉकिंग की मूल अवधारणाओं और औषधि विकास में इसकी उपयोगिता के बारे में जानकारी दी।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि कंप्यूटर आधारित तकनीकों से दवाओं के अणुओं और जैविक लक्ष्यों के बीच होने वाली अंतःक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। इससे नई दवाओं के विकास के शुरुआती चरण में संभावित औषधीय अणुओं का मूल्यांकन करने में मदद मिलती है। कार्यशाला में विद्यार्थियों ने डॉकिंग प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से भी समझा।
विज्ञापन
डॉ. मुजावर ने कहा कि आधुनिक औषधि अनुसंधान में कंप्यूटेशनल तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इनका ज्ञान विद्यार्थियों को शोध परियोजनाओं और फार्मास्यूटिकल अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने में मदद करेगा।
संस्थान की प्रधानाचार्या डॉ. ईशा रानी ने कहा कि विद्यार्थियों के व्यावहारिक और अनुसंधान कौशल को विकसित करने के लिए ऐसी कार्यशालाएं जरूरी हैं। कार्यशाला में डॉ. सन्नी धीमान, डॉ. पूनम शर्मा, सुश्री अंकिता शर्मा, मंजू देवी, मनीषा और अदिति शर्मा सहित अन्य फैकल्टी सदस्य और विद्यार्थी उपस्थित रहे।