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तूफान ले उड़ा गरामोड़ बैरियर पर बना कोविड-19 सहायता कक्ष
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स्वारघाट के गरामोड़ा में तूफान से तबाह हुआ कोविड सहायता कक्ष।
- फोटो : BILASPUR
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स्वारघाट(बिलासपुर)। पंजाब-हिमाचल के प्रवेश द्वार गरामौड़ में अस्थाई रूप से बनाया कोविड-19 सहायता कक्ष शनिवार रात को आए भारी तूफान की भेंट चढ़ गया। तूफान इतना भयंकर था कि अस्थाई केबिन उखड़ कर पलट गया। गनीमत इतनी रही कि इस हादसे के दौरान यहां उपस्थित कर्मी समय से बाहर निकल गए और किसी को कोई जानी नुकसान नहीं हुआ।
गौरतलब है कि इससे पहले भी दो बार इस अस्थाई नाके को तूफान ने तहस-नहस किया है। लेकिन प्रशासन ने इसकी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। जिसके चलते शनिवार रात को भारी तूफान ने तीसरी बार इस अस्थाई नाके को उखाड़ फेंका। हालांकि हादसे में किसी कर्मचारी को चोट नहीं लगी। नाके पर प्रशासन के कर्मियों द्वारा प्रदेश में एकत्रित किया गया सारा रिकॉर्ड पानी व मिट्टी की भेंट चढ़ गया। हालांकि रविवार को इस अस्थाई नाके के केबिन को खड़ा कर के काम चलाया जा रहा है। लेकिन बरसात का मौसम है और ऐसे में अगर फिर से यही वारदात सामने आए और किसी कर्मी को कोई हानी पहुंची तो इसका जिम्मेवार कौन होगा? प्रशासन की लापरवाही व शनिवार रात को हुई घटना से कर्मचारी सहम गए हैं।
बिलासपुर प्रशासन को पता है कि यह कोरोना संक्रमण की महामारी लंबी चलने वाली है तथा सरहद का यह नाका भी उतने दिन तक ही रहेगा। लेकिन इसके बावजूद भी जिला बिलासपुर प्रशासन की तरफ से यहां पर सिल्वर मेटल से अस्थाई केबिन बना के रख दिए गए हैं।
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बताते चलें कि बैरियर पर प्रदेश में दाखिल होने वाले लोगों को औपचारिकता पूरी करने के लिए घंटो लाइनों में इंतजार करना पड़ता है। इसके लिए प्रशासन ने एक किराए का टेंट लगाया है। जो जरा सी हवा लगने से उड़ जाता है। अस्थाई केबिन को मात्र जमीन के ऊपर रखा गया है। जिसने हल्की फुल्की हवा तो सहन कर ली लेकिन शनिवार रात को आए तूफ ान के जोर को सहन नहीं कर सका और पलट गया। प्रशासन को चाहिए कि इस नाके को पक्का बनाया जाए ताकि यहां पर कार्य कर्मचारी सुरक्षित रह सके।
इनसेट
फिलहाल यहां अस्थाई तौर पर नाका लगाया गया है। लेकिन फिर भी यहां पर तैनात कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अस्थाई केबिन को मजबूत कर दिया जाएगा। ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना का सामना ना करना पड़े। इस बारे में उपायुक्त बिलासपुर से बात की गई है तथा शीघ्र ही इस समस्या का समाधान कर लिया जाएगा। -दिवाकर शर्मा, एसपी बिलासपुर
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गौरतलब है कि इससे पहले भी दो बार इस अस्थाई नाके को तूफान ने तहस-नहस किया है। लेकिन प्रशासन ने इसकी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। जिसके चलते शनिवार रात को भारी तूफान ने तीसरी बार इस अस्थाई नाके को उखाड़ फेंका। हालांकि हादसे में किसी कर्मचारी को चोट नहीं लगी। नाके पर प्रशासन के कर्मियों द्वारा प्रदेश में एकत्रित किया गया सारा रिकॉर्ड पानी व मिट्टी की भेंट चढ़ गया। हालांकि रविवार को इस अस्थाई नाके के केबिन को खड़ा कर के काम चलाया जा रहा है। लेकिन बरसात का मौसम है और ऐसे में अगर फिर से यही वारदात सामने आए और किसी कर्मी को कोई हानी पहुंची तो इसका जिम्मेवार कौन होगा? प्रशासन की लापरवाही व शनिवार रात को हुई घटना से कर्मचारी सहम गए हैं।
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बिलासपुर प्रशासन को पता है कि यह कोरोना संक्रमण की महामारी लंबी चलने वाली है तथा सरहद का यह नाका भी उतने दिन तक ही रहेगा। लेकिन इसके बावजूद भी जिला बिलासपुर प्रशासन की तरफ से यहां पर सिल्वर मेटल से अस्थाई केबिन बना के रख दिए गए हैं।
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बताते चलें कि बैरियर पर प्रदेश में दाखिल होने वाले लोगों को औपचारिकता पूरी करने के लिए घंटो लाइनों में इंतजार करना पड़ता है। इसके लिए प्रशासन ने एक किराए का टेंट लगाया है। जो जरा सी हवा लगने से उड़ जाता है। अस्थाई केबिन को मात्र जमीन के ऊपर रखा गया है। जिसने हल्की फुल्की हवा तो सहन कर ली लेकिन शनिवार रात को आए तूफ ान के जोर को सहन नहीं कर सका और पलट गया। प्रशासन को चाहिए कि इस नाके को पक्का बनाया जाए ताकि यहां पर कार्य कर्मचारी सुरक्षित रह सके।
इनसेट
फिलहाल यहां अस्थाई तौर पर नाका लगाया गया है। लेकिन फिर भी यहां पर तैनात कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अस्थाई केबिन को मजबूत कर दिया जाएगा। ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना का सामना ना करना पड़े। इस बारे में उपायुक्त बिलासपुर से बात की गई है तथा शीघ्र ही इस समस्या का समाधान कर लिया जाएगा। -दिवाकर शर्मा, एसपी बिलासपुर